Agra Desk, tajnews.in | Sunday, April 26, 2026, 11:15:30 PM IST

आगरा: साहित्य किसी भी सभ्य समाज का दर्पण होता है और किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी और सच्ची मित्र होती हैं। डिजिटल युग की चकाचौंध में भी किताबों और साहित्य के प्रति प्रेम को जीवित रखने के लिए ताजनगरी आगरा में एक बेहद शानदार और प्रेरक कदम उठाया गया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, विश्व पुस्तक दिवस (World Book Day) के पावन उपलक्ष्य में आगरा की अग्रणी साहित्यिक संस्था ‘ताज लिटरेचर क्लब’ द्वारा एक भव्य ‘साहित्य महोत्सव’ का आयोजन किया गया। यह गरिमामय कार्यक्रम रविवार दोपहर 2:00 बजे से विजय नगर कॉलोनी स्थित आगरा पब्लिक स्कूल के विशाल ऑडिटोरियम में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस साहित्य महोत्सव में न केवल आगरा, बल्कि दिल्ली, मथुरा, हाथरस, फिरोजाबाद और अकोला सहित कई अन्य शहरों से आए दिग्गज कवियों, कवयित्रियों और प्रख्यात साहित्यकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट काव्य पाठ, साहित्य चर्चा, एक नई अंग्रेजी पुस्तक का विमोचन और विशाल पुस्तक प्रदर्शनी जैसे कई बौद्धिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर उन्हें भी इस मंच से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आइए, साहित्य प्रेमियों के इस महाकुंभ और कवियों की ओजस्वी रचनाओं का विस्तार से आनंद लेते हैं।
दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ भव्य शुभारंभ
किसी भी मांगलिक और साहित्यिक कार्य की शुरुआत ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना से ही होती है। इस भव्य साहित्य महोत्सव का शुभारंभ भी पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में हाथरस से पधारे सुप्रसिद्ध आशु कवि अनिल बोहरे, आयोजन के अध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा, संस्था के संस्थापक राजकुमार शर्मा और ‘ताज लिटरेचर क्लब’ की ऊर्जावान अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा ने अन्य विशिष्ट अतिथियों के साथ मिलकर मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया और माल्यार्पण कर कार्यक्रम को गति प्रदान की।

अतिथियों का स्वागत संस्था के पदाधिकारियों द्वारा फूल-माला पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया। इसके पश्चात, स्वामी लीला शाह सरस्वती विद्या मंदिर के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा एक अत्यंत मनमोहक और सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। बच्चों की इस सांगीतिक और भावपूर्ण प्रस्तुति ने ऑडिटोरियम में बैठे सभी साहित्यकारों और दर्शकों का मन मोह लिया और पूरे माहौल को संगीतमय तथा आध्यात्मिक बना दिया। नन्हे बच्चों के इस प्रयास को सभागार में मौजूद सभी लोगों ने करतल ध्वनि (तालियों) से खूब सराहा। इस शानदार शुरुआत ने बता दिया था कि आने वाले कुछ घंटे साहित्य और संस्कृति के एक बहुत ही सुखद सफर का गवाह बनने वाले हैं।

किताबों से दोस्ती का संदेश और दिनकर को नमन
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए संस्था की अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा ने अपना स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने ऑडिटोरियम में मौजूद सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। अपने सारगर्भित भाषण में भावना वरदान शर्मा ने बताया कि हर वर्ष 23 अप्रैल को ‘विश्व पुस्तक दिवस’ (World Book Day) मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब युवा पीढ़ी मोबाइल और इंटरनेट में सिमटती जा रही है, तब किताबें पढ़ने को प्रोत्साहित करना सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।

इसी महान उद्देश्य और उपलक्ष्य में ताज लिटरेचर क्लब द्वारा इस भव्य साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव में केवल कविता पाठ ही नहीं, बल्कि पुस्तक विमोचन, गंभीर साहित्य चर्चा और एक विस्तृत पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है ताकि लोगों का जुड़ाव किताबों से दोबारा हो सके। चूंकि 23 अप्रैल को हिंदी के महान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की भी जयंती होती है, इसलिए इस महोत्सव में उन्हें विशेष तौर पर याद किया गया। कई वक्ताओं और कवियों ने दिनकर की वीर रस से ओतप्रोत और कालजयी कविताओं का सस्वर पाठ करके उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिनकर की ओजस्वी पंक्तियों ने सभागार में बैठे हर एक शख्स के भीतर ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम का नया संचार कर दिया।
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डॉ. अरविंद कपूर की अंग्रेजी पुस्तक का हुआ भव्य विमोचन
इस साहित्य महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण पुस्तक विमोचन (Book Launch) समारोह रहा। कार्यक्रम के दौरान शहर के जाने-माने साहित्यकार डॉक्टर अरविंद कपूर द्वारा अंग्रेजी भाषा में लिखी गई उत्कृष्ट कविताओं के नवीन संकलन ‘एजिस ऑफ़ क्रीसेंडो’ (Aegis of Crescendo) का अतिथियों के कर-कमलों द्वारा भव्य विमोचन किया गया। डॉक्टर अरविंद कपूर ने अपनी इस किताब में जीवन के विभिन्न रंगों, मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों की उलझनों और प्रकृति की सुंदरता पर आधारित अपनी गहरी कविताओं का अद्भुत संकलन किया है。

मंच से बोलते हुए साहित्यकारों ने कहा कि भाषा कोई भी हो, लेकिन भावनाओं की अभिव्यक्ति सच्ची होनी चाहिए। डॉक्टर कपूर की यह अंग्रेजी पुस्तक भारतीय मूल्यों और सार्वभौमिक भावनाओं का एक बहुत ही सुंदर मिश्रण है। विमोचन के बाद इस पुस्तक की प्रतियां प्रदर्शनी में भी रखी गईं, जहां साहित्य प्रेमियों ने इसे खूब सराहा। इसके अलावा, साहित्य चर्चा सत्र में वर्तमान समय में साहित्य की दशा और दिशा पर भी विद्वानों ने अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। इस दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नए और युवा लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे साहित्यिक मंचों का लगातार आयोजित होते रहना बहुत जरूरी है।

काव्य संध्या: कवियों ने वीर, श्रृंगार और ओज से किया मंत्रमुग्ध
समारोह का सबसे बहुप्रतीक्षित और आकर्षक हिस्सा ‘काव्य संध्या’ (कवि सम्मेलन) रहा। इस काव्य गोष्ठी में आगरा के सुप्रसिद्ध कवियों और कवयित्रियों के अलावा दिल्ली, हाथरस, अकोला, फिरोजाबाद और मथुरा से आए हुए कई नामचीन कवियों ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में अकोला से पधारीं ओजस्वी कवयित्री अंशु छोकर, अमरीश नाथ और राजीव निस्पृह उपस्थित रहे। इस काव्य पाठ में सुषमा सिंह, राजेंद्र मिलन, अशोक अश्रु, डॉक्टर शशी गुप्ता, ब्रज बिहारी लाल बिरजू, प्रभु दत्त उपाध्याय, अमिता त्रिपाठी, विजया तिवारी, कामेश मिश्रा सनसनी, चारुमित्रा, रश्मि जैन, महक, शेशपाल सिंह, संजय गुप्त, अशोक गोयल, डॉक्टर ऊषा गिल, अशोक अग्रवाल और मीना शर्मा सहित कई अन्य रचनाकारों ने अपनी बेहतरीन कविताएं प्रस्तुत कीं। इन कवियों ने वीर, श्रृंगार, हास्य और ओज रस की कविताओं की ऐसी गंगा बहाई कि दर्शक पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गए।

अकोला से आईं कवयित्री अंशु छोकर ने महिला सशक्तिकरण और संस्कारों पर अपनी ओजस्वी पंक्तियों से ऑडिटोरियम में जोश भर दिया। उन्होंने पढ़ा:
“हाड़ी रानी पन्नाधाय, पद्मिनी, सी कहानी चाहिए,
आज की बेटी में संस्कारों की रवानी चाहिए।
चूड़ी वाले हाथों से जमकर तलवारें थाम लो,
हर बेटी में लक्ष्मीबाई सी जवानी चाहिए।।”
उनकी इस रचना पर पूरा ऑडिटोरियम देर तक तालियों से गूंजता रहा। हाथरस से पधारे आशु कवि अनिल बोहरे ने हास्य और व्यंग्य का पुट देते हुए कहा, “कवि की कविता सुनना जरूरी है तथा अच्छा पति बनने को पत्नी की सुनना भी बहुत जरूरी है।” उनकी इस बात पर दर्शक ठहाके लगाने लगे। श्रृंगार रस की छटा बिखेरते हुए कवयित्री मीना शर्मा ने अपनी खूबसूरत पंक्तियां पेश कीं:
“दिल की नगरिया आना, आकर के फिर ना जाना।
रहता है मोती जैसे सीप मेरे साजना।”

इस पूरे कवि सम्मेलन और साहित्य महोत्सव का बेहद शानदार और चुटीला संचालन अनुपमा दीक्षित ने किया। उनकी एंकरिंग ने पूरे कार्यक्रम को एक माला में पिरोए रखा। इस भव्य साहित्यिक महाकुंभ को सफल बनाने में शहर के कई गणमान्य नागरिकों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम में विशेष रूप से कार्तिकेय, अर्चना कपूर, चतुर्भुज तिवारी, जगन प्रसाद तेहरिया, गिराज दीक्षित, आनंद राय, नीतू तेहरिया, हेमलता, शैलेन्द्र शर्मा और सुमित भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और श्रोता उपस्थित रहे।

अंत में संस्था की अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा ने सभी अतिथियों, कवियों और दर्शकों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए इस सफल साहित्य महोत्सव के समापन की घोषणा की। यह आयोजन आगरा के साहित्यिक पटल पर एक अमिट और प्रेरक छाप छोड़ गया है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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