नागरी प्रचारिणी सभा में हिन्दी दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन; वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मुनीश्वर गुप्ता बोले—दैनिक व्यवहार और डिजिटल माध्यमों में भाषा का प्रयोग बढ़ाना जरूरी, राजा लक्ष्मण सिंह के योगदान को किया नमन
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | मंगलवार, 15 सितंबर 2026, 09:48:17 AM IST

आगरा: हिन्दी दिवस पर नागरी प्रचारिणी सभा में भाषा और देवनागरी की उपयोगिता पर मंथन
tajnews.in | आगरा। हिन्दी दिवस के अवसर पर नागरी प्रचारिणी सभा, आगरा में आयोजित समारोह में हिन्दी भाषा के महत्व, उसके विकास और देवनागरी लिपि की उपयोगिता पर गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार के साथ युवा पीढ़ी को भाषा से जोड़ने और दैनिक जीवन में हिन्दी के व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक एवं हिन्दी सेवी डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने कहा कि भारतीय भाषाओं में हिन्दी का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि हिन्दी का स्वरूप व्यापक और समावेशी है तथा इसमें देश की अनेक भाषाओं और बोलियों के शब्दों का समावेश हुआ है।
उन्होंने कहा कि हिन्दी को केवल औपचारिक कार्यक्रमों और विशेष अवसरों तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा के जीवन में इसके प्रयोग को बढ़ाना जरूरी है। साहित्य, शिक्षा और सामाजिक संवाद में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग ही इसके विकास को मजबूत आधार दे सकता है।
हिन्दी के साथ देवनागरी के महत्व पर चर्चा
कार्यक्रम में सभा के पदाधिकारियों, साहित्यकारों और हिन्दी प्रेमियों ने हिन्दी भाषा तथा देवनागरी लिपि के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि देवनागरी ने हिन्दी सहित कई भारतीय भाषाओं के लेखन और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समारोह में हिन्दी के इतिहास और उसके विकास में योगदान देने वाले साहित्यकारों तथा भाषा-सेवियों को भी याद किया गया। इस दौरान राजा लक्ष्मण सिंह के योगदान का विशेष उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने हिन्दी और देवनागरी के विकास के लिए उनके कार्यों को महत्वपूर्ण बताया।
हिन्दी दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं
वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी दिवस को केवल एक दिन हिन्दी के प्रति सम्मान व्यक्त करने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह अपनी भाषा के प्रति जिम्मेदारी समझने और उसके व्यापक प्रयोग का संकल्प लेने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि आज हिन्दी के सामने चुनौती केवल दूसरी भाषाओं से प्रतिस्पर्धा की नहीं है। बड़ी चुनौती यह भी है कि नई पीढ़ी को हिन्दी से किस तरह जोड़ा जाए और बदलते समय में हिन्दी को प्रभावी संवाद की भाषा बनाए रखा जाए।
डिजिटल दौर में हिन्दी के विस्तार की जरूरत
समारोह में कहा गया कि डिजिटल माध्यमों, शिक्षा, तकनीक और सामाजिक संवाद में हिन्दी का प्रयोग लगातार बढ़ाने की आवश्यकता है। वक्ताओं के अनुसार तकनीकी और डिजिटल क्षेत्र में हिन्दी की मौजूदगी मजबूत होने से नई पीढ़ी के लिए भाषा का प्रयोग अधिक सहज और व्यवहारिक बनाया जा सकता है। हिन्दी को आधुनिक तकनीक और बदलते संचार माध्यमों से जोड़ना उसके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
नागरी प्रचारिणी सभा का ऐतिहासिक योगदान
नागरी प्रचारिणी सभा का हिन्दी और देवनागरी के विकास से लंबा ऐतिहासिक संबंध रहा है। संस्था की स्थापना 1893 में हुई थी। हिन्दी और देवनागरी के प्रचार-प्रसार में संस्था के योगदान को हिन्दी आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह ने इसी ऐतिहासिक विरासत को वर्तमान समय की चुनौतियों से जोड़ते हुए हिन्दी के व्यवहारिक और व्यापक प्रयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम में हिन्दी भाषा और साहित्य से जुड़े विद्वानों तथा हिन्दी प्रेमियों ने अपने विचार साझा किए। समारोह के अंत में हिन्दी के प्रचार-प्रसार तथा देवनागरी लिपि के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया गया।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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