जबल सईद में दुर्लभ मृदा तत्वों के साथ मिला यूरेनियम का संकेत; विजन 2030 के तहत तेल से आगे हाई-टेक और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दबदबा बढ़ाने की तैयारी
अंतरराष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | मंगलवार, 15 सितंबर 2026, 01:16:45 PM IST

tajnews.in | सऊदी अरब। मदीना क्षेत्र के जबल सईद में करीब 11 करोड़ टन अयस्क संसाधन मिलने के दावे ने सऊदी अरब के खनिज और ऊर्जा क्षेत्र को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। खास बात यह है कि इस अयस्क में भारी दुर्लभ मृदा तत्वों के साथ यूरेनियम की मौजूदगी के संकेत मिलने की बात कही गई है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने और खनन, ऊर्जा, उद्योग तथा आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अपनी रणनीतिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इस दावे को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट करना जरूरी है। 11 करोड़ टन का आंकड़ा शुद्ध यूरेनियम का भंडार नहीं है। यह जबल सईद क्षेत्र में मिले कुल अयस्क संसाधन का अनुमान है। इसमें यूरेनियम की वास्तविक मात्रा कितनी है और उसका व्यावसायिक दोहन कितना संभव है, यह विस्तृत भूगर्भीय और तकनीकी आकलन के बाद ही स्पष्ट होगा।
विजन 2030 के बीच खनिज संसाधनों पर बड़ा दांव
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की विजन 2030 योजना का प्रमुख उद्देश्य सऊदी अर्थव्यवस्था को कच्चे तेल पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकालना है। इसके तहत पर्यटन, उद्योग, तकनीक, खनन और वैकल्पिक ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। खनिज संसाधनों की खोज भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। दुर्लभ मृदा तत्व आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, रक्षा तकनीक और आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। यदि जबल सईद में मिले संसाधनों का व्यावसायिक दोहन संभव साबित होता है तो सऊदी अरब के लिए यह केवल खनन क्षेत्र की उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि हाई-टेक और औद्योगिक अर्थव्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
यूरेनियम की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण?
यूरेनियम का सबसे प्रमुख उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में होता है। इसी कारण इसके खनन, प्रसंस्करण और आगे के इस्तेमाल से जुड़े कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष निगरानी के दायरे में रहते हैं। सऊदी अरब लंबे समय से नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने की इच्छा जाहिर करता रहा है। ऐसे में घरेलू स्तर पर यूरेनियम संसाधनों की उपलब्धता उसके लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संभावित रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। यूरेनियम संसाधन की मौजूदगी और उसका व्यावसायिक उपयोग दो अलग-अलग बातें हैं। वास्तविक मात्रा, अयस्क की गुणवत्ता, निष्कर्षण की लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप उसके इस्तेमाल जैसे सवालों का जवाब आगे की तकनीकी जांच से ही मिलेगा।
अमेरिका के साथ परमाणु सहयोग पर भी नजर
सऊदी अरब और अमेरिका के बीच नागरिक परमाणु सहयोग को लेकर लंबे समय से बातचीत होती रही है। रियाद अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए परमाणु ऊर्जा को भविष्य के महत्वपूर्ण विकल्पों में शामिल करना चाहता है। ऐसे में घरेलू यूरेनियम संसाधनों की पहचान सऊदी अरब को अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए संभावित घरेलू आधार दे सकती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाह इस बात पर रहेगी कि इन संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है और परमाणु अप्रसार संबंधी नियमों का कितना पालन होता है।
ईरान के संदर्भ में भी बढ़ेगा रणनीतिक महत्व
मध्य पूर्व की भू-राजनीति में इस खोज का महत्व केवल आर्थिक नहीं है। सऊदी अरब और ईरान के बीच क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से प्रतिस्पर्धा रही है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। ऐसे वातावरण में सऊदी अरब का परमाणु ऊर्जा और घरेलू यूरेनियम संसाधनों की दिशा में आगे बढ़ना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की बहस को नया आयाम दे सकता है। हालांकि यूरेनियम की मौजूदगी को सीधे परमाणु हथियार कार्यक्रम से जोड़ना उचित नहीं होगा। यूरेनियम का इस्तेमाल शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए भी किया जाता है। किसी देश की परमाणु हथियार क्षमता का आकलन केवल उसके यूरेनियम संसाधनों की मौजूदगी से नहीं किया जा सकता।
मदीना क्षेत्र की संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण
जबल सईद मदीना क्षेत्र में स्थित है। मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल है। ऐसे में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनिज संसाधनों की खोज का महत्व आर्थिक पहलू से आगे बढ़कर सामाजिक और पर्यावरणीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो जाता है। सऊदी सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि खनन और औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाते समय क्षेत्र की धार्मिक, पर्यावरणीय और सामाजिक संवेदनशीलताओं का भी ध्यान रखा जाए।
क्या बदल सकता है सऊदी अरब का आर्थिक मॉडल?
यदि शुरुआती अनुमान आगे की भूगर्भीय जांच और आर्थिक अध्ययन में सही साबित होते हैं तो सऊदी अरब को एक साथ कई संभावित लाभ मिल सकते हैं। दुर्लभ मृदा तत्व उसे हाई-टेक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल उपलब्ध करा सकते हैं, जबकि यूरेनियम उसके नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए संभावित घरेलू संसाधन बन सकता है। इससे सऊदी अरब की महत्वाकांक्षा केवल दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में बने रहने तक सीमित नहीं रहेगी। वह खनिज, हाई-टेक उद्योग और उन्नत ऊर्जा अर्थव्यवस्था में भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।
11 करोड़ टन का आंकड़ा समझना सबसे जरूरी
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम का भंडार नहीं मिला है। यह कुल अयस्क संसाधन का अनुमान है, जिसमें यूरेनियम और दुर्लभ मृदा तत्वों की मौजूदगी बताई गई है। अब आगे की विस्तृत खोज और तकनीकी अध्ययन से यह पता चलेगा कि इस अयस्क में यूरेनियम तथा दुर्लभ मृदा तत्वों की वास्तविक मात्रा कितनी है, उन्हें निकालना तकनीकी रूप से कितना संभव है और उसका आर्थिक मूल्य कितना होगा। इसलिए जबल सईद की खोज को सऊदी अरब की परमाणु और खनिज महत्वाकांक्षाओं के लिए संभावित रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे अभी सऊदी अरब के परमाणु शक्ति बनने की निर्णायक घोषणा के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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