फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन से आगरा में गर्भवती महिला की मौत

फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन से 24 वर्षीय प्रसूता की दर्दनाक मौत, क्लीनिक बंद कर फरार हुआ झोलाछाप संचालक

आगरा समाचार

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 27 Feb 2026, 03:50 pm IST

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Taj News Crime & City Desk

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आगरा (Agra): फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन से ताजनगरी आगरा में एक बार फिर स्वास्थ्य महकमे की भारी लापरवाही और झोलाछाप डॉक्टरों के मौत के खेल का पर्दाफाश हुआ है। थाना एकता क्षेत्र के अंतर्गत देवरी रोड पर स्थित तथाकथित ‘सागर हॉस्पिटल’ में इलाज के नाम पर एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला की बेरहमी से जान ले ली गई। ताज न्यूज़ (Taj News) की क्राइम डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, बिना किसी वैध डिग्री और विशेषज्ञता वाले एक झोलाछाप ने खुद को सर्जन बताकर प्रसूता की डिलीवरी का ऑपरेशन शुरू कर दिया। इस दुस्साहसिक और फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन के कारण महिला की हालत बिगड़ गई और ऑपरेशन टेबल पर ही उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। मौत के बाद आरोपी संचालक अपने अस्पताल पर ताला जड़कर मौके से फरार हो गया है। यह घटना उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग (UP Health Department) के उन दावों की भी पोल खोलती है, जिनमें अवैध क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की बात कही जाती है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है और पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।

HIGHLIGHTS
  • मौत का अवैध कारोबार: देवरी रोड के सागर हॉस्पिटल में झोलाछाप डॉक्टर ने 24 वर्षीय मनीषा का किया जानलेवा ऑपरेशन।
  • ऑपरेशन टेबल पर तोड़ा दम: डिलीवरी के दौरान हालत बिगड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण प्रसूता की मौत हो गई।
  • अस्पताल बंद कर आरोपी फरार: महिला की मौत के बाद कथित संचालक पूरे स्टाफ के साथ क्लीनिक बंद करके भाग निकला।
  • पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से मांग: आक्रोशित परिजनों ने थाना एकता पुलिस से सख्त कार्रवाई और अस्पताल सील करने की मांग की है।

सागर हॉस्पिटल का खौफनाक सच: बिना डिग्री के चल रहा था मौत का खेल

आगरा के बाहरी और कस्बाई इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मौत का खुला व्यापार चल रहा है। इस दुखद घटना की शिकार पिनाहट निवासी 24 वर्षीय मनीषा बनी, जो अपने जीवन के एक बेहद नाजुक मोड़— गर्भावस्था— से गुजर रही थी। परिजनों के मुताबिक, मनीषा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने पर उसे देवरी रोड स्थित सागर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों को विश्वास था कि यह एक सुरक्षित और पंजीकृत अस्पताल है, जहां जच्चा और बच्चा दोनों महफूज रहेंगे। लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि वे अपनी बेटी को इलाज के लिए नहीं, बल्कि एक कसाईखाने में ले आए हैं।

अस्पताल में मौजूद कथित संचालक ने खुद को एक बड़ा और अनुभवी डॉक्टर बताकर परिजनों को गुमराह किया और तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) करने की सलाह दे डाली। फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन की शुरुआत यहीं से हुई। चंद रुपयों के लालच में इस झोलाछाप ने बिना किसी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ (Anesthetist) और स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) की मौजूदगी के ही मनीषा का पेट चीर दिया। यह कृत्य केवल मेडिकल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) की श्रेणी में आता है।

झोलाछाप का जानलेवा दुस्साहस: ऑपरेशन के दौरान बिगड़ी हालत और फरार हुआ आरोपी

मेडिकल साइंस में सिजेरियन डिलीवरी एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसके लिए एक पूरी टीम और जीवन रक्षक उपकरणों (Life-saving equipment) की आवश्यकता होती है। लेकिन सागर हॉस्पिटल के उस ऑपरेशन थियेटर में बुनियादी सुविधाओं तक का अभाव था। जैसे ही उस झोलाछाप ने फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन करना शुरू किया, प्रसूता मनीषा की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। अत्यधिक रक्तस्राव (Heavy bleeding) और मेडिकल कॉम्प्लीकेशन्स को संभालने का न तो उस तथाकथित डॉक्टर के पास अनुभव था और न ही अस्पताल में कोई उचित सुविधा थी।

जब हालत पूरी तरह बेकाबू हो गई और मनीषा की सांसें उखड़ने लगीं, तो उस संचालक के हाथ-पैर फूल गए। वह किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाने या महिला को किसी बड़े अस्पताल (जैसे एसएन मेडिकल कॉलेज) में रेफर करने के बजाय, कायरों की तरह मौके से खिसक लिया। कुछ ही देर में तड़प-तड़प कर मनीषा ने दम तोड़ दिया। जब काफी देर तक अंदर से कोई खबर नहीं आई, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका से ऑपरेशन कक्ष का दरवाजा खटखटाया। अंदर का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। महिला मृत पड़ी थी और पूरा स्टाफ वहां से गायब था। फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन की इस वीभत्स घटना ने चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे को कलंकित कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल: किसके संरक्षण में चल रहा था यह फर्जी क्लीनिक?

इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला और चिंताजनक पहलू यह है कि ‘सागर हॉस्पिटल’ के नाम से संचालित यह मौत का केंद्र महज एक छोटे से क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन की आड़ में चलाया जा रहा था। परिजनों और स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि इस अस्पताल का सीएमओ (CMO) कार्यालय में कोई वैध पंजीकरण (Valid Registration) नहीं है। सवाल यह उठता है कि एक छोटे से पंजीकृत क्लीनिक में ऑपरेशन थियेटर कैसे बना लिया गया? बिना मान्यता और बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के इस फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन जैसी गंभीर सर्जरी किसके आदेश और किसके संरक्षण में की जा रही थी?

क्या स्वास्थ्य विभाग की नोडल टीमों और इंस्पेक्टर्स को मुख्य सड़क पर खुलेआम चल रहे इस फर्जी अस्पताल की जानकारी नहीं थी? या फिर ‘सुविधा शुल्क’ (कथित रिश्वत) के दम पर स्वास्थ्य महकमे की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी? यह घटना स्वास्थ्य विभाग के उन दावों की धज्जियां उड़ाती है, जिनमें वे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सघन चेकिंग अभियान चलाने की बात करते हैं। आम जनता का मानना है कि विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ के बिना इतना बड़ा अवैध नर्सिंग होम चलाना असंभव है।

परिजनों का भारी हंगामा और पुलिस की कार्रवाई: न्याय की गुहार

मनीषा की दर्दनाक मौत की खबर मिलते ही मृतका के परिजनों और रिश्तेदारों ने देवरी रोड स्थित सागर हॉस्पिटल के बाहर भारी हंगामा शुरू कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया और झोलाछाप डॉक्टर को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की। स्थिति को बिगड़ता देख थाना एकता पुलिस भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने किसी तरह आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया और मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए भिजवा दिया है।

थाना एकता पुलिस का कहना है कि परिजनों की तरफ से लिखित तहरीर प्राप्त हो गई है। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर इस अस्पताल की पूरी जांच की जाएगी और फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन करके जान लेने वाले फरार झोलाछाप और उसके स्टाफ के खिलाफ कड़ी धाराओं (गैर इरादतन हत्या और धोखाधड़ी) में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

आगरा के ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहा झोलाछाप डॉक्टरों का जानलेवा जाल

आगरा के देहात और सीमावर्ती इलाकों (जैसे पिनाहट, बाह, देवरी रोड) में ऐसे सैकड़ों अवैध क्लीनिक और फर्जी अस्पताल कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं। ग्रामीण अंचल से आने वाले सीधे-सादे मरीज, अक्सर सस्ते और सुलभ इलाज के चक्कर में, इन झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंस जाते हैं। इन फर्जी डॉक्टरों द्वारा छोटी-मोटी बीमारियों में तो मरीजों को स्टेरॉयड (Steroids) देकर आराम दिला दिया जाता है, लेकिन जब बात सर्जरी या डिलीवरी जैसे गंभीर मामलों की आती है, तो फर्जी हॉस्पिटल में गलत ऑपरेशन जैसी त्रासदियां जन्म लेती हैं।

क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishments Act) के कड़े नियमों के बावजूद, जमीनी स्तर पर इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को अब कुंभकर्णी नींद से जागना होगा। केवल एक घटना के बाद कुछ दिन का दिखावटी अभियान चलाने से यह समस्या खत्म नहीं होगी। जरूरत है कि ऐसे मौत के सौदागरों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाए और इनकी संपत्तियों को कुर्क किया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी झोलाछाप किसी और मनीषा की जिंदगी के साथ खेलने की जुर्रत न कर सके।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

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