Agra Desk, tajnews.in | Thursday, May 7, 2026, 10:51:00 PM IST

ताजनगरी आगरा के पॉश इलाके बाग फरजाना में गुरुवार को नगर निगम की एक बड़ी लापरवाही ने एक बेगुनाह मजदूर की जान ले ली। थाना हरीपर्वत क्षेत्र के अंतर्गत चल रहे नाला निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई। पुराने नाले की जर्जर दीवार को तोड़ते समय, उससे सटी हुई एक डेंटल क्लीनिक की भारी-भरकम मिट्टी की बाउंड्री अचानक भरभराकर काम कर रहे मजदूरों के ऊपर गिर पड़ी। इस भीषण हादसे में मलबे के नीचे दबने से एक संविदा मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसका दूसरा साथी गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल मजदूर का एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में सघन इलाज चल रहा है। इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर निगम प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
पॉश इलाके में गूंजी चीखें: मौत के गड्ढे में तब्दील हुआ नाला
आगरा शहर का बाग फरजाना इलाका अपनी व्यस्तता और पॉश कॉलोनियों के लिए जाना जाता है। गुरुवार की दोपहर यहां का माहौल बिल्कुल सामान्य था। लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे और यातायात सुचारू रूप से चल रहा था। इसी बीच, नगर निगम के निर्देश पर एक पुराने और जर्जर नाले को तोड़कर उसका नवनिर्माण करने का कार्य प्रगति पर था। ठेकेदार के अधीन काम कर रहे संविदा मजदूर भीषण गर्मी में पसीना बहाते हुए नाले की खुदाई कर रहे थे। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग थी और न ही आसपास की कमजोर इमारतों को सहारा देने का कोई तकनीकी इंतजाम किया गया था। मजदूर अपने काम में पूरी तरह तल्लीन थे, तभी अचानक एक तेज गड़गड़ाहट की आवाज ने पूरे इलाके को दहला दिया।
यह खौफनाक आवाज नाले से बिल्कुल सटकर बनी एक डेंटल क्लीनिक की बाउंड्री वॉल के ढहने की थी। मिट्टी और ईंटों से बनी वह भारी दीवार जड़ से कमजोर हो चुकी थी। नाले की खुदाई के कारण उस दीवार को नीचे से मिल रहा सहारा पूरी तरह खत्म हो गया था। बिना किसी पूर्व चेतावनी के, वह पूरी की पूरी दीवार भरभराकर सीधे उन बेबस मजदूरों के ऊपर आ गिरी जो नीचे गड्ढे में काम कर रहे थे। पलक झपकते ही वहां धूल का एक बड़ा गुबार उठ गया और हवा में केवल चीख-पुकार गूंजने लगी। आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही मौत अपना क्रूर खेल खेल चुकी थी।
प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी: रूह कंपा देने वाला था वह खौफनाक मंजर
घटनास्थल के ठीक सामने ठेला लगाने वाले फल विक्रेता रामचंद्र ने इस पूरे रूह कंपा देने वाले हादसे को अपनी आंखों से देखा। कांपती हुई आवाज में रामचंद्र ने बताया कि दोनों मजदूर काफी देर से पूरी लगन के साथ नाले की दीवार तोड़ने का काम कर रहे थे। तभी अचानक वह विशाल मिट्टी की दीवार ताश के पत्तों की तरह ढह गई। दीवार का मलबा इतना ज्यादा था कि दोनों मजदूर सीधे उसके नीचे पूरी तरह से दब गए। एक अन्य मजदूर जो थोड़ा किनारे खड़ा था, उसके हाथ में केवल मामूली चोट आई और वह बाल-बाल बच गया। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने बिना किसी देरी के अपनी जान की परवाह किए बिना मलबे को हाथों से हटाना शुरू कर दिया।
गनीमत यह रही कि जिस समय यह विशाल दीवार सड़क की ओर गिरी, उस वक्त वहां से कोई दुपहिया वाहन चालक या पैदल राहगीर नहीं गुजर रहा था। अन्यथा, यह हादसा एक बड़े जनसंहार में तब्दील हो सकता था। स्थानीय युवाओं ने कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे दोनों मजदूरों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सिर और सीने पर दीवार का भारी मलबा गिरने के कारण एक मजदूर की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं। उसका शरीर पूरी तरह से खून और मिट्टी से सना हुआ था। वहीं दूसरा मजदूर दर्द से कराह रहा था और उसकी हालत बेहद चिंताजनक थी।
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कलाल खेड़िया गांव में पसरा मातम: एक ही बस्ती के थे दोनों मजदूर
इस हृदयविदारक हादसे की जानकारी मिलते ही मजदूरों के परिजनों में हाहाकार मच गया। दोनों मजदूर, मृतक रमेश और गंभीर रूप से घायल करन, थाना ताजगंज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कलाल खेड़िया राकावली गांव के मूल निवासी थे। ये दोनों बेहद गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे और मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। गांव से भागे-भागे घटनास्थल पर पहुंचे पवन नामक एक युवक ने बताया कि रमेश और करन उनके ही गांव के रहने वाले हैं। वे दोनों नगर निगम के ठेकेदार के अधीन संविदा पर बेलदारी का काम करते थे। पवन ने रुंधे हुए गले से बताया कि रमेश की तो दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि करन अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। जब यह मनहूस खबर कलाल खेड़िया गांव पहुंची, तो वहां चूल्हे तक नहीं जले। मृतक रमेश के घर से उठ रही चीखों ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।
एसएन मेडिकल कॉलेज में करन लड़ रहा है जिंदगी की जंग
मलबे से निकाले जाने के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायल करन को तुरंत एंबुलेंस के जरिए आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) पहुंचाया गया। इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सकों की एक विशेष टीम उसकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रारंभिक चिकित्सीय रिपोर्ट के अनुसार, करन के सिर, दोनों पैरों और हाथों में गंभीर अंदरूनी और बाहरी चोटें आई हैं। अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उसे सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। अस्पताल के बाहर करन के परिजन बदहवास हालत में ईश्वर से उसकी सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं। इस भयानक हादसे ने एक हंसते-खेलते गरीब परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल
घटना के बाद मौके पर फैली गंदगी और खून से सने मलबे के बीच से मजदूरों की चप्पलें और सुरक्षा जूते (Safety Shoes) बाहर झांक रहे थे। यह दृश्य चीख-चीख कर नगर निगम और ठेकेदार की घोर लापरवाही की गवाही दे रहा था। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि इतने संवेदनशील इलाके में बिना किसी सपोर्टिंग स्ट्रक्चर (Supporting Structure) के गहरी खुदाई कैसे करवाई जा रही थी। लोगों का सीधा सवाल है कि जब मिट्टी की कमजोर दीवार नाले से बिल्कुल सटी हुई थी, तो उसे गिरने से रोकने के लिए पहले कोई लोहे का जाल या लकड़ी की बल्लियां क्यों नहीं लगाई गईं? चंद रुपयों का मुनाफा कमाने के चक्कर में ठेकेदारों द्वारा मजदूरों की जिंदगी को इस तरह दांव पर लगाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की इस अनदेखी का खामियाजा हमेशा एक गरीब को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।
पुलिस ने शुरू की जांच, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई?
हादसे की सूचना मिलते ही थाना हरीपर्वत पुलिस भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई थी। पुलिस ने तुरंत भीड़ को नियंत्रित किया और उस इलाके को सुरक्षा की दृष्टि से सील कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मृतक रमेश के शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। अगर जांच में ठेकेदार या नगर निगम के किसी इंजीनियर की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ताज न्यूज़ भी प्रशासन से यह मांग करता है कि मृतक के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए और घायलों का मुफ्त एवं बेहतर इलाज सुनिश्चित हो। शहर में चल रहे अन्य निर्माण कार्यों का भी कड़ाई से निरीक्षण होना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और घर का चिराग इस तरह लापरवाही की भेंट न चढ़े।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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