वृंदावन में आस्था पर मौत का झपट्टा: यमुना में पलटी 25 श्रद्धालुओं से भरी नाव, 3 की दर्दनाक मौत, घाट पर मची भारी चीख-पुकार

Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Friday, April 10, 2026, 05:15:30 PM IST

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मथुरा: कान्हा की नगरी वृंदावन में शुक्रवार की दोपहर एक ऐसा हृदयविदारक और खौफनाक हादसा हुआ, जिसने पवित्र यमुना नदी के तट पर गूंज रहे भक्ति के भजनों को अचानक चीख-पुकार और मातम में बदल दिया। दूर-दराज से अपने आराध्य के दर्शन और यमुना स्नान की लालसा लेकर आए श्रद्धालुओं के लिए यह दिन एक भयानक दुःस्वप्न साबित हुआ। वृंदावन के प्रसिद्ध केसी घाट के पास करीब 25 श्रद्धालुओं से खचाखच भरी एक नाव अचानक बेकाबू होकर यमुना नदी पर बने पांटून (पीपा) पुल से जोर से टकराई और देखते ही देखते गहरे पानी में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में सभी 25 श्रद्धालु यमुना की तेज और गहरी लहरों में डूबने लगे। स्थानीय नाविकों, गोताखोरों और पुलिस के त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते 15 लोगों को किसी तरह मौत के मुंह से जिंदा बाहर निकाल लिया गया, लेकिन दुर्भाग्य से तीन श्रद्धालुओं की पानी में डूबकर दर्दनाक मौत हो गई है। अभी भी कई लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में यमुना की गहराइयों को गोताखोरों द्वारा खंगाला जा रहा है। इस घटना ने पूरे मथुरा-वृंदावन प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है और नावों के संचालन में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की पोल खोलकर रख दी है।

HIGHLIGHTS
  1. वृंदावन में बड़ा हादसा: केसी घाट के पास 25 श्रद्धालुओं से भरी एक नाव अनियंत्रित होकर पांटून पुल से टकराकर यमुना नदी में पलट गई।
  2. तीन श्रद्धालुओं की मौत: हादसे में अब तक तीन लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि कई अन्य श्रद्धालुओं के अभी भी लापता होने की आशंका है।
  3. 15 लोगों का सफल रेस्क्यू: स्थानीय गोताखोरों और पुलिस की मुस्तैदी से 15 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है।
  4. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: यमुना के गहरे पानी में लापता लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चल रहा है, घाट पर भारी भीड़ जमा है।

आस्था के बीच मौत का झपट्टा: जब लहरों में समा गई 25 जिंदगियां

मथुरा और वृंदावन का केसी घाट हमेशा से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। देश के कोने-कोने से लोग यहां यमुना जी के दर्शन करने और नौका विहार का आनंद लेने आते हैं। शुक्रवार की दोपहर भी माहौल पूरी तरह से भक्तिमय था। वृंदावन और मान इलाके के बीच यमुना नदी में नावें फर्राटे भर रही थीं। इन्हीं में से एक नाव पर करीब 25 श्रद्धालु सवार थे, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे। जब यह नाव केसी घाट से कुछ दूरी पर स्थित पांटून (पीपा) पुल के करीब पहुंची, तो नदी के बहाव और नाव के अत्यधिक वजन के कारण नाविक अपना संतुलन खो बैठा।

इससे पहले कि नाव में सवार श्रद्धालु कुछ समझ पाते, नाव का अगला हिस्सा बहुत जोर से पांटून पुल के लोहे और ड्रमों से जा टकराया। टक्कर इतनी भयंकर थी कि नाव एकाएक एक तरफ झुक गई और फिर पलट गई। पलक झपकते ही 25 के 25 श्रद्धालु यमुना के गहरे और ठंडे पानी में गिर गए। घाट पर खड़े लोगों के सामने अचानक चीख-पुकार और मौत का खौफनाक मंजर पैदा हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए पानी में हाथ-पैर मार रहे थे, लेकिन गहराई और तेज बहाव के कारण वे लगातार नीचे की तरफ जा रहे थे। किनारे पर खड़े श्रद्धालुओं के परिजन और स्थानीय लोग बदहवास होकर मदद के लिए चिल्लाने लगे। भक्ति के जयकारों की जगह अब सिर्फ ‘बचाओ-बचाओ’ की दर्दनाक आवाजें गूंज रही थीं।

देवदूत बनकर कूदे स्थानीय गोताखोर: 15 लोगों को मिला जीवनदान

इस भयानक हादसे को देखते ही यमुना किनारे मौजूद स्थानीय नाविक और गोताखोर बिना एक पल की भी देरी किए अपनी जान की परवाह किए बगैर गहरे पानी में कूद पड़े। उन्होंने डूबते हुए श्रद्धालुओं को उनके बालों, कपड़ों और हाथों से पकड़कर पानी की सतह पर लाना शुरू किया। इस बीच किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को घटना की सूचना दे दी। चंद मिनटों के भीतर ही वृंदावन थाना पुलिस, जल पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी सायरन बजाती हुई गाड़ियों के साथ केसी घाट पर पहुंच गए। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए तत्काल बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। रस्सियों, ट्यूब और अतिरिक्त नावों की मदद से पानी में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे लोगों को बाहर निकालने की जद्दोजहद तेज कर दी गई।

स्थानीय नाविकों की फुर्ती और पुलिस के त्वरित एक्शन का ही नतीजा था कि 15 श्रद्धालुओं को सही समय पर पानी से बाहर निकाल लिया गया। बाहर निकाले गए लोग बुरी तरह डरे हुए थे, उनके पेट में काफी पानी भर चुका था और वे सदमे में कांप रहे थे। किनारे पर पहले से ही एंबुलेंस तैनात कर दी गई थीं। निकाले गए सभी लोगों को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया और उनमें से जिनकी हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें तुरंत वृंदावन के संयुक्त चिकित्सालय और अन्य नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीमें इन बचाए गए श्रद्धालुओं की जान बचाने के लिए लगातार मशक्कत कर रही हैं। इन 15 लोगों के लिए स्थानीय गोताखोर सचमुच किसी देवदूत से कम साबित नहीं हुए।

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तीन परिवारों के उजड़े चिराग और अपनों की तलाश में रोती आंखें

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जो सबसे दुखद और दिल दहला देने वाला पल था, वह था पानी से निकाली गई तीन लाशों का मंजर। पुलिस और गोताखोरों की तमाम कोशिशों के बावजूद तीन श्रद्धालुओं को बचाया नहीं जा सका। उनके शव जैसे ही यमुना से बाहर लाए गए, वहां मौजूद भीड़ की आंखें नम हो गईं। जिन परिवारों ने कुछ घंटे पहले एक साथ भगवान के दर्शन किए थे, अब वे अपने अपनों के शवों से लिपटकर दहाड़ें मार-मार कर रो रहे थे। पुलिस ने तीनों शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उनके परिजनों को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रही है। अभी तक मृतकों की पूरी शिनाख्त सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि पुलिस उनके दूर के रिश्तेदारों से भी संपर्क साधने की कोशिश कर रही है।

खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। बताया जा रहा है कि नाव पर 25 लोग सवार थे, जिनमें से 15 बचा लिए गए और 3 के शव मिल गए। इसका सीधा मतलब है कि अभी भी कई लोग यमुना के अथाह पानी में लापता हैं। एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें मोटर बोट्स और ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ नदी के एक बड़े हिस्से को छान रही हैं। जैसे-जैसे शाम ढल रही है, पानी के तेज बहाव और कम होती रोशनी के कारण बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं। घाट पर लापता लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वे बस किसी चमत्कार की उम्मीद में नदी की लहरों को एकटक निहारे जा रहे हैं।

सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियां: प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी?

मथुरा और वृंदावन में यमुना नदी में नाव पलटने का यह कोई पहला मामला नहीं है। हर साल त्योहारों या सामान्य दिनों में इस तरह के खौफनाक हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन इन घटनाओं से कोई कड़ा सबक लेता हुआ दिखाई नहीं देता। सबसे बड़ा सवाल जो इस वक्त हर किसी के जेहन में उठ रहा है, वह यह है कि आखिर एक छोटी सी नाव में 25 लोगों को एक साथ कैसे बैठा लिया गया? क्या घाटों पर कोई ऐसी अथॉरिटी या जल पुलिस तैनात नहीं है जो नावों की ओवरलोडिंग पर नजर रख सके? इसके अलावा, नाव में सवार किसी भी श्रद्धालु को लाइफ जैकेट (Life Jacket) क्यों नहीं पहनाई गई थी?

अगर लाइफ जैकेट होती, तो शायद आज ये तीन जिंदगियां असमय मौत के मुंह में न समातीं। चंद रुपयों के लालच में नाविक अक्सर क्षमता से दोगुनी सवारियां बिठा लेते हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। इस हादसे के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। आला अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन बिना किसी बाधा के चलता रहे। अब देखना यह है कि क्या इस भीषण त्रासदी के बाद मथुरा का जिला प्रशासन नींद से जागेगा और नावों के संचालन के लिए कोई कड़े सुरक्षा मानक और नियम लागू करेगा, या फिर कुछ दिनों बाद यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा और लोग ऐसे ही अपनी जान गंवाते रहेंगे।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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