Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Friday, April 10, 2026, 08:15:30 AM IST

आगरा: ताजनगरी आगरा के सबसे पुराने, व्यस्त और घनी आबादी वाले किनारी बाजार में गुरुवार की आधी रात एक ऐसा खौफनाक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस ऐतिहासिक बाजार में एक सराफा कारोबारी का तीन मंजिला भारी-भरकम शोरूम ताश के पत्तों की तरह भरभराकर सड़क पर आ गिरा। रात के सन्नाटे में इमारत गिरने की वह भयानक आवाज किसी भीषण बम धमाके जैसी थी, जिसे सुनकर आसपास से गुजर रहे राहगीरों की रूह कांप गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर भागने लगे। गनीमत यह रही कि यह घटना रात करीब 11:45 बजे हुई, जब बाजार की लगभग सभी दुकानें बंद हो चुकी थीं और सड़क पर भीड़भाड़ न के बराबर थी। वरना इस संकरी और भीड़भाड़ वाली गली में दिन के उजाले में यह हादसा सैकड़ों जिंदगियों को अपना निवाला बना सकता था। इस दर्दनाक घटना में शोरूम मालिक का लाखों रुपये का माल, जिसमें भारी मात्रा में चांदी के जेवरात और बर्तन शामिल हैं, मलबे के नीचे बुरी तरह दफन हो गए हैं। पुलिस और प्रशासन रात भर से मलबे को हटाने और स्थिति को काबू करने में जुटे हुए हैं।
आधी रात का खौफनाक मंजर: जब ताश के पत्तों की तरह ढह गई इमारत
आगरा का किनारी बाजार अपनी संकरी गलियों, ऐतिहासिक बनावट और सोने-चांदी के बड़े व्यापार के लिए पूरे उत्तर भारत में मशहूर है। दिन के समय यहां पैर रखने की जगह नहीं होती, लेकिन रात होते ही यह बाजार एक खामोशी की चादर ओढ़ लेता है। गुरुवार रात करीब पौने बारह बजे इसी खामोशी को चीरते हुए एक गगनभेदी आवाज गूंजी। बल्केश्वर स्थित सीताराम कॉलोनी के रहने वाले कारोबारी रिंकू बंसल का तीन मंजिला सराफा शोरूम अचानक ढह गया। इमारत के गिरने से उठा धूल का गुबार इतनी तेजी से फैला कि कुछ पलों के लिए पूरी गली में अंधेरा छा गया।
आसपास के लोग जो उस वक्त गली से गुजर रहे थे या अपनी दुकानों का काम निपटाकर लौट रहे थे, उन्होंने मौत को अपने सामने नाचते देखा। दहशत में चीखते-चिल्लाते लोग इधर-उधर भागने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि भूकंप आया है या कोई और आपदा। कुछ ही मिनटों में पुलिस कंट्रोल रूम के फोन घनघनाने लगे। कोतवाली थाना पुलिस की कई गाड़ियां सायरन बजाती हुई तत्काल मौके पर पहुंच गईं। इमारत का सारा कंक्रीट, ईंटें और लोहे के गर्डर सड़क पर आ गिरे थे, जिससे किनारी बाजार का मुख्य रास्ता पूरी तरह से ब्लॉक हो गया था। पुलिस ने तुरंत मुआयना किया और राहत की सांस ली कि मलबे के नीचे कोई राहगीर या मजदूर नहीं दबा था।
पांच साल की मेहनत और लाखों की चांदी मलबे में दफन
पुलिस ने घटना की भयावहता को देखते हुए तुरंत आसपास के स्थानीय दुकानदारों से संपर्क साधा और ढही हुई इमारत के मालिक का पता लगाया। जब पुलिस का फोन रिंकू बंसल के पास पहुंचा, तो वह अपने घर पर गहरी नींद में थे। अपनी दुकान के गिरने की खबर सुनते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह बदहवास हालत में रात को ही भागते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। अपनी आंखों के सामने अपनी सालों की मेहनत को मलबे के ढेर में तब्दील देखकर रिंकू फफक-फफक कर रो पड़े।
रिंकू बंसल ने रुंधे हुए गले से बताया कि उन्होंने यह जगह करीब पांच साल पहले खरीदी थी और तब से यहां चांदी के जेवरात, बेशकीमती बर्तन और अन्य आभूषणों का शानदार शोरूम चला रहे थे। वह रोज की तरह गुरुवार रात को भी अपनी दुकान का शटर ठीक से बंद करके घर गए थे। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह वह इस शोरूम को दोबारा कभी नहीं देख पाएंगे। उनका लाखों रुपये का बेशकीमती स्टॉक उस भारी-भरकम कंक्रीट और ईंटों के मलबे के नीचे दब चुका है। सराफा बाजार होने के कारण यह चिंता और भी गहरी है कि मलबे के नीचे से चांदी और अन्य कीमती सामान को सुरक्षित कैसे बाहर निकाला जाएगा। इमारत के गिरने का प्रभाव इतना जबर्दस्त था कि उसके ठीक बगल में मौजूद एक अन्य दुकान भी इसकी चपेट में आ गई और उसका भी काफी नुकसान हुआ है।
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हादसे की जड़: पीछे चल रहा था बेसमेंट का निर्माण कार्य?
तीन मंजिला पक्की इमारत का अचानक इस तरह से ढह जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शुरुआती जांच और स्थानीय लोगों की चर्चाओं से जो बात छनकर बाहर आ रही है, वह प्रशासन की आंखें खोलने वाली है। बताया जा रहा है कि ढहे हुए शोरूम के ठीक पीछे वाली जमीन पर एक नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा था। वहां बेसमेंट या नींव की खुदाई का काम किया जा रहा था। अक्सर घने बाजारों में पुरानी इमारतों के बगल में जब गहरी खुदाई होती है, तो पुरानी बिल्डिंग की नींव कमजोर पड़ जाती है और मिट्टी खिसकने का खतरा बन जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संभवतः इस निर्माण कार्य के दौरान हुई लापरवाही के कारण ही रिंकू बंसल के शोरूम की बुनियाद कमजोर हो गई होगी, जिसके चलते वह तीन मंजिला इमारत अपने ही वजन को नहीं सह पाई और भरभराकर ढह गई। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों की टीम अब मौके का मुआयना करेगी और यह तकनीकी जांच करेगी कि इमारत के ढहने की असली वजह क्या थी। अगर पीछे चल रहे निर्माण कार्य की लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित बिल्डर या मालिक के खिलाफ पुलिस सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी और उसे इस भारी नुकसान का हर्जाना भी चुकाना पड़ सकता है।
रात भर चला रेस्क्यू: पुलिस ने यलो टेप लगाकर सील किया इलाका
किनारी बाजार आगरा का व्यापारिक दिल है। अगर यहां का मुख्य रास्ता बंद हो जाए, तो शुक्रवार सुबह पूरा बाजार और व्यापार ठप पड़ जाता। पुलिस प्रशासन इस बात को अच्छी तरह समझता था। इसलिए, बिना सुबह का इंतजार किए, कोतवाली पुलिस ने रात में ही मलबे को हटाने का एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया। संकरी गली होने के कारण वहां जेसीबी या बड़ी मशीनें नहीं जा सकती थीं, इसलिए प्रशासन ने तुरंत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की व्यवस्था की।
पुलिस के जवानों और मजदूरों ने मिलकर रात भर उस मलबे को ट्रैक्टरों में भरकर वहां से हटाया। इस पूरे काम में पीड़ित सराफ रिंकू बंसल भी अपनी निगरानी बनाए हुए थे, क्योंकि मलबे के हर एक कतरे में उनकी बेशकीमती चांदी और जेवरात छिपे होने की आशंका थी। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए पूरे घटनास्थल को चारों तरफ से ‘यलो बैरिकेडिंग टेप’ लगाकर सील कर दिया है, ताकि सुबह बाजार खुलने पर कोई भी बाहरी व्यक्ति या चोर-उचक्का उस मलबे के आसपास फटक न सके। शुक्रवार सुबह जब बाजार खुला, तो अन्य व्यापारियों में भी इस घटना को लेकर भारी दहशत और अपने पुराने प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। आगरा का नगर निगम अब क्या पुराने बाजारों की जर्जर इमारतों और अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे निर्माणों पर कोई सख्त कदम उठाएगा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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