आगरा के फव्वारा बाजार में ड्रग विभाग की बड़ी कार्रवाई: सैन्य और ईएसआई अस्पताल की एक करोड़ की दवाएं जब्त, अवैध गोदाम सील

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Monday, 25 May 2026, 11:45:18 AM IST

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Agra Desk | Health Department Investigations, Medical Scams & Local Law Enforcement

आगरा के सबसे बड़े दवा बाजार फव्वारा क्षेत्र से स्वास्थ्य विभाग की एक बहुत बड़ी और संदेहास्पद कार्रवाई का मामला प्रकाश में आया है। औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने फव्वारा स्थित झुमरीलाल बाजार में बड़ी छापेमारी करते हुए एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध दवाएं जब्त की हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह दवाएं ज्योति ड्रग हाउस की तीसरी मंजिल पर स्थित एक अवैध गोदाम से बरामद हुई हैं, जिसमें मुख्य रूप से सैन्य और ईएसआई अस्पताल की सरकारी सप्लाई वाली प्रतिबंधित दवाएं तथा फिजिशियन सैंपल शामिल हैं। इस पूरे रैकेट के संचालक नारायण दास हंसराजानी के दोनों अवैध गोदामों को प्रशासन ने पूरी तरह से सील कर दिया है। संचालक के ठिकानों से अब तक कुल ढाई करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय कोतवाली थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज कराई गई हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई से समूचे दवा बाजार के माफियाओं और अवैध कारोबारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

अवैध दवा भंडारण मामले के मुख्य बिंदु
  • सरकारी और सैन्य सप्लाई की दवाएं बरामद: झुमरीलाल बाजार स्थित ज्योति ड्रग हाउस के अवैध गोदाम से सेना और ईएसआई अस्पतालों की एक करोड़ से अधिक की दवाएं मिलीं।
  • ढाई करोड़ का स्टॉक अब तक जब्त: ड्रग विभाग की टीम ने मुख्य आरोपी नारायण दास हंसराजानी के दोनों अवैध गोदामों को सील कर कुल ढाई करोड़ की दवाएं जब्त की हैं।
  • 30 फार्मा कंपनियों को नोटिस जारी: लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर सहायक आयुक्त भेषज ने विभिन्न राज्यों की 30 बड़ी नामी दवा कंपनियों को रिकॉर्ड तलब करने के लिए नोटिस भेजा है।
  • कोतवाली थाने में दो प्राथमिकियां दर्ज: औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार की तहरीर पर मुख्य आरोपी नारायण दास और उसके कर्मचारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।

झुमरीलाल बाजार में तीसरी मंजिल पर चल रहा था मौत का खेल, बिना कोल्ड चेन के रखी थीं जीवनरक्षक दवाएं

आगरा का फव्वारा बाजार समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दवाओं की थोक आपूर्ति का मुख्य केंद्र माना जाता है। इसी बाजार की संकरी गलियों में स्थित झुमरीलाल बाजार में औषधि विभाग की टीम ने विधिक इनपुट के आधार पर दबिश दी थी। लखनऊ मुख्यालय से प्राप्त विशेष निर्देशों के अनुपालन में सहायक आयुक्त औषधि ब्रजेश यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने ज्योति ड्रग हाउस के परिसर पर छापा मारा। अधिकारियों ने जब भवन की तीसरी मंजिल पर बने एक बंद कमरे का ताला तुड़वाया, तो वहां का दृश्य देखकर जांच टीम के अधिकारी भी स्तब्ध रह गए।

उस परिसर के भीतर 37 बड़े बोरों में भरकर अत्यधिक मात्रा में जीवनरक्षक और प्रतिबंधित दवाएं छिपाकर रखी गई थीं। बरामद स्टॉक में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह था कि इनमें बड़ी संख्या में ऐसी दवाएं थीं, जिन पर स्पष्ट रूप से ‘सैन्य अस्पताल’ और ‘ईएसआई अस्पताल’ की सरकारी आपूर्ति की मुहर अंकित थी। इसके अतिरिक्त, वहां गंभीर बीमारियों में काम आने वाले इंसुलिन इंजेक्शन, एंटीबायोटिक्स और रेबीज वैक्सीन जैसी दवाएं भी भारी मात्रा में पाई गईं। नियमानुसार इन जीवनरक्षक टीकों को एक निश्चित तापमान के भीतर रेफ्रिजरेटर में रखा जाना अनिवार्य होता है, किंतु इस अवैध गोदाम में इन्हें बिना किसी वेंटिलेशन और ठंडी व्यवस्था के सामान्य बोरों में ठूस कर रखा गया था। इस भयंकर लापरवाही के कारण इन दवाओं का रासायनिक प्रभाव पूरी तरह नष्ट हो चुका था, जो किसी भी मरीज को दिए जाने पर जानलेवा साबित हो सकता था।

रुड़की की फार्मा कंपनियों से नकली दर्द निवारक की सप्लाई, बस से आती थीं दवाएं और कैश में होता था भुगतान

ड्रग विभाग की इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा राज्यों में फैले नकली दवाओं के एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भी भंडाफोड़ हुआ है। जांच में यह तथ्य प्रमाणित हुआ है कि आगरा के इस अवैध नेटवर्क के तार सीधे उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र की कुछ फर्जी और जाली फार्मा कंपनियों से जुड़े हुए थे। औषधि विभाग की एक टीम ने आगरा के साथ-साथ रुड़की के डंप यार्डों और विनिर्माण इकाइयों में भी समानांतर रूप से जांच शुरू कर दी है।

पकड़े गए एक अन्य मेडिकल एजेंसी संचालक सुरेंद्र गुप्ता ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया है कि रुड़की की एक डिफ़ॉल्टर फार्मा कंपनी से पिछले दो वर्षों से बिना किसी वैध बिल के दर्द निवारक दवाओं की निरंतर तस्करी की जा रही थी। यह नकली दवाएं उत्तराखंड से नियमित यात्री बसों के माध्यम से पार्सल के रूप में आगरा भेजी जाती थीं। पकड़े जाने के भय से इस पूरे अवैध व्यापार का वित्तीय लेन-देन कभी भी बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों से नहीं किया जाता था, अपितु अपराधियों द्वारा हमेशा नकद भुगतान की प्रणाली अपनाई जाती थी। जांच दल ने अब तक 17 हजार से अधिक नकली दर्द निवारक गोलियां और रुड़की की फैक्ट्रियों से जुड़े पैकेजिंग मटेरियल तथा प्रिंटिंग डाई ब्लॉक बरामद किए हैं, जिनका उपयोग दवाओं की जाली पैकिंग तैयार करने में होता था।

30 नामी कंपनियों को नोटिस और रिकॉर्ड तलब, गांव-गांव के झोलाछापों को बेची जा रही थीं दवाएं

औषधि प्रशासन के लखनऊ कार्यालय से जारी आदेश के तहत इस पूरे मामले में विधिक कड़ाई बरतते हुए 30 बड़ी नामी दवा निर्माता कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन कंपनियों के लगभग 150 से अधिक दवाओं के सैंपल इस अवैध गोदाम से प्राप्त हुए हैं। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि संबंधित कंपनियों से लिखित रिकॉर्ड मांगा गया है कि उनके द्वारा निर्मित यह विशिष्ट बैच नंबर की दवाएं किस शहर के, किस अधिकृत मेडिकल स्टोर अथवा चिकित्सा प्रतिनिधि को जारी की गई थीं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी अस्पतालों की दवाएं लीक होकर इस अवैध गोदाम तक कैसे पहुंचीं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, आरोपी नारायण दास हंसराजानी इन सरकारी और सैंपल की दवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों और अनधिकृत क्लीनिकों को बहुत कम दामों पर बेचकर अवैध रूप से मोटी कमाई कर रहा था। चूंकि इन दवाओं पर बिक्री के लिए नहीं लिखा होता है, इसलिए झोलाछाप डॉक्टर मरीजों से पूरा पैसा लेकर इन्हें सीधे उनके घरों पर वितरित कर देते थे। औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार ने बताया कि संदिग्ध दवाओं के 20 अलग-अलग रासायनिक नमूने संकलित कर उन्हें तत्काल राजकीय प्रयोगशाला में गहन विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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