बंगाल चुनाव हार के बाद तृणमूल में बढ़ी हलचल, कई सांसदों के भाजपा संपर्क में होने की चर्चा

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National Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Tuesday, 26 May 2026, 05:14:42 AM IST

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नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली, टिकट वितरण और संगठन संचालन को लेकर कई सांसदों और नेताओं में नाराजगी बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के कई राज्यसभा सांसद भाजपा के संपर्क में हैं, हालांकि भाजपा फिलहाल इस मामले में जल्दबाजी से बचते हुए बेहद सतर्क रणनीति पर काम कर रही है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति लगातार बढ़ रही है। पार्टी के अंदर एक ऐसा गुट सक्रिय बताया जा रहा है, जो चुनावी हार के लिए संगठनात्मक फैसलों और टिकट बंटवारे को जिम्मेदार मान रहा है। खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर असंतोष की चर्चा सामने आ रही है।

HIGHLIGHTS
  1. बंगाल चुनाव हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में बढ़ा अंदरूनी असंतोष।
  2. कई राज्यसभा सांसदों के भाजपा संपर्क में होने की चर्चा तेज।
  3. अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और टिकट वितरण पर उठे सवाल।
  4. भाजपा फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रखने की रणनीति पर काम कर रही।

सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता चुनाव परिणाम के बाद पार्टी में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। इनमें राज्यसभा सांसदों की संख्या अधिक बताई जा रही है। कुछ लोकसभा सांसद और विधायक भी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। फिलहाल राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के 13 और लोकसभा में 28 सांसद हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद विपक्षी दलों के नेताओं के पाला बदलने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। इसी कारण तृणमूल कांग्रेस को लेकर भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि सांसद काकोली घोष दस्तीदार सहित कई नेताओं की पार्टी बैठकों से दूरी भी अंदरूनी असंतोष का संकेत मानी जा रही है। पार्टी के भीतर एक वर्ग टिकट वितरण में कथित मनमानी और सरकार चलाने के तरीके को लेकर पहले से असंतुष्ट था, लेकिन चुनावी हार के बाद यह असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया कि पार्टी फिलहाल हर नेता के लिए अपने दरवाजे खोलने के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि बिना सोच-समझकर लिए गए फैसलों से पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी कारण चुनाव परिणाम आने के बाद दूसरे दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की एंट्री पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा आने वाले दिनों में स्थिति का आकलन करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय ले सकती है। पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे सकता है जिनकी राजनीतिक छवि साफ-सुथरी मानी जाती है। इस संदर्भ में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी जैसे नेताओं का नाम भी चर्चा में लिया जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर तृणमूल कांग्रेस के सात से आठ सांसद भाजपा के साथ आते हैं तो राज्यसभा में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है। ऐसे में आगामी संसदीय रणनीतियों और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए यह संख्या बल भाजपा के लिए अहम माना जा रहा है।

हालांकि फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन बंगाल की राजनीति में बढ़ती हलचल ने आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों की संभावना को जरूर बढ़ा दिया है।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

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