National Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Monday, 25 May 2026, 08:39:08 AM IST

देश के आर्थिक और व्यावसायिक गलियारे से इस समय की एक अत्यंत संवेदनशील और आम जनता को सीधे प्रभावित करने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार सुबह से देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर से भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। पिछले मात्र 10 दिनों के भीतर यह लगातार चौथी बार है, जब वाणिज्यिक तेल कंपनियों द्वारा ईंधन के दामों में वृद्धि की गई है। इस नए संशोधन के उपरांत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 102.12 रुपये प्रति配置 पर पहुंच गई है, जबकि डीजल का भाव 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। तेल कंपनियों द्वारा सोमवार को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी की गई है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण जहां आम उपभोक्ताओं और मध्यम वर्ग का मासिक बजट पूरी तरह से डगमगा गया है, वहीं बाजार में माल ढुलाई के महंगे होने के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंका भी तीव्र हो गई है।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों का मूल्य संशोधन, घरेलू उपभोक्ताओं पर बढ़ा वित्तीय दबाव
देशभर में पेट्रोलियम उत्पादों की खुदरा कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने विनिर्माण और परिवहन क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—ने सोमवार सुबह छह बजे से ईंधन की नई दरें प्रभावी कर दी हैं। सोमवार को दर्ज की गई मूल्य वृद्धि हाल के महीनों में एक दिन में की गई सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है। इससे पूर्व शनिवार को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 87 से 91 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि की थी।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखने के उपरांत अब तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हुई आयात लागत का बोझ धीरे-धीरे घरेलू उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं। पिछले 10 दिनों के भीतर हुए चार संशोधनों के सामूहिक प्रभाव के कारण देश के अधिकांश राज्यों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के समीप पहुंच गई हैं। इस अचानक आई तेजी ने उन नौकरीपेशा लोगों और मध्यम वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को भारी नुकसान पहुंचाया है, जो दैनिक आवागमन के लिए निजी दोपहिया अथवा चारपहिया वाहनों पर पूरी तरह निर्भर हैं।
प्रमुख महानगरों में पेट्रोल की नई दरें और वृद्धि का व्यावहारिक विवरण
| संबंधित शहर (Metros) | पेट्रोल की नई खुदरा कीमत (प्रति लीटर) | सोमवार को की गई प्रत्यक्ष बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 102.12 रुपये | +2.61 रुपये |
| कोलकाता | 113.51 रुपये | +2.87 रुपये |
| मुंबई | 111.21 रुपये | +2.72 रुपये | चेन्नई | 107.77 रुपये | +2.46 रुपये |
वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता और आयात लागत का बढ़ना मुख्य कारण
पेट्रोलियम उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार, इस मूल्य वृद्धि के पीछे अनेक महत्वपूर्ण और कड़े वैश्विक आर्थिक कारण उत्तरदायी हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। भारत अपनी कुल पेट्रोलियम आवश्यकताओं का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रत्येक छोटी-बड़ी हलचल का सीधा प्रभाव घरेलू खुदरा बाजार पर पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में आई क्रमिक गिरावट ने भी कच्चे तेल की आयात लागत को अत्यधिक बढ़ा दिया है। तेल शोधन करने वाली कंपनियों का रिफाइनिंग मार्जिन प्रभावित होने के कारण वाणिज्यिक वित्तीय संतुलन बनाए रखने हेतु खुदरा दरों में बदलाव अपरिहार्य हो गया था। खुदरा तेल विक्रेताओं का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज नहीं की गई, तो आगामी दिनों में तेल कंपनियों द्वारा मूल्य संशोधन के कुछ अन्य कड़े दौर भी देखने को मिल सकते हैं, जो घरेलू मुद्रास्फीति को और अधिक बढ़ा सकते हैं।
प्रमुख शहरों में डीजल की नवीनतम खुदरा कीमतें
| संबंधित शहर (Metros) | डीजल की नई खुदरा कीमत (प्रति लीटर) | सोमवार को की गई प्रत्यक्ष बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 95.20 रुपये | +2.71 रुपये |
| कोलकाता | 99.82 रुपये | +2.80 रुपये |
| मुंबई | 97.83 रुपये | +2.81 रुपये |
माल ढुलाई महंगी होने से चौतरफा महंगाई का संकट, कृषि और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त भार
डीजल की कीमतों में की गई इस बड़ी वृद्धि का व्यापक और बहुआयामी प्रभाव देश के परिवहन, कृषि और रसद क्षेत्रों पर पड़ना निश्चित माना जा रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में माल ढुलाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा डीजल चलित भारी ट्रकों और वाणिज्यिक वाहनों के माध्यम से संपन्न होता है। डीजल की कीमतों में प्रति लीटर पौने तीन रुपये तक की इस वृद्धि के कारण अखिल भारतीय ट्रक ऑपरेटर संघों ने माल ढुलाई की दरों में तत्काल बढ़ोतरी करने के संकेत दिए हैं।
थोक परिवहन लागत बढ़ने का सीधा और तात्कालिक असर स्थानीय बाजारों में फल, हरी सब्जियां, दूध, खाद्यान्न और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देगा। इसके अतिरिक्त, कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए प्रयुक्त होने वाले पंपसेटों और ट्रैक्टरों में डीजल का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत भी काफी बढ़ जाएगी। आगरा संभाग सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न व्यापारिक संगठनों और कलेक्ट्रेट सर्किलों से जुड़े आर्थिक विश्लेषकों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि ईंधन की कीमतें इसी प्रकार अनियंत्रित रूप से बढ़ती रहीं, तो आगामी हफ्तों में थोक और खुदरा मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर अपने कड़े स्तर पर पहुंच सकती है। आम नागरिकों और विभिन्न उपभोक्ता मंचों ने सरकार से पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य स्तरीय वैट में कटौती कर जनता को तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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