सुरों के संगम से गूंजा आगरा, सिकंदरा में सनातन संगीत संध्या पर झूम उठे श्रद्धालु

खबर शेयर कीजिए

Agra Desk, tajnews.in | Monday, May 18, 2026, 08:50:00 PM IST

Taj News Logo
Taj News
Agra Desk | Culture & Society News

ताजनगरी आगरा का सिकंदरा क्षेत्र सोमवार को पूरी तरह से भक्ति और आध्यात्मिक सुरों के सागर में डूब गया। पवित्र पुरुषोत्तम अधिक मास के पावन अवसर पर सिकंदरा स्थित हरिकृष्ण वृद्धजन सम्मान भवन में एक भव्य सनातन भक्ति संगीत संध्या का आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल (अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन सम्मान समिति) और सुभारत संगीत निकेतन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। संगीत संध्या में गूंजी भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं को पूरी तरह से भावविभोर कर दिया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से पूरा परिसर राम नाम के जयघोष से लगातार गूंजता रहा। इस भव्य सांस्कृतिक समागम ने बुजुर्गों के जीवन में खुशियों के नए रंग भरने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को सनातन संस्कृति की समृद्ध विरासत से जोड़ने का एक बहुत बड़ा काम किया है।

आयोजन के मुख्य बिंदु
  • सनातन संगीत का महासंगम: पुरुषोत्तम मास के शुभ अवसर पर सिकंदरा में भव्य भक्ति संगीत संध्या का सफल आयोजन किया गया।
  • सर्वपंथ भजनों की प्रस्तुति: कार्यक्रम में हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख और राधा स्वामी सत्संग सहित विभिन्न मतों के मधुर भजन गाए गए।
  • युवा कलाकारों ने जीता दिल: सुभारत संगीत निकेतन के जूनियर और सीनियर डिप्लोमा के छात्रों ने अपनी गायकी से समां बांध दिया।
  • आकाशवाणी कलाकारों का जलवा: पंडित देवाशीष गांगुली और मीता गांगुली की विशेष प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

पुरुषोत्तम मास में भक्ति और संगीत का अनूठा समागम

भारतीय संस्कृति में पुरुषोत्तम अधिक मास को आध्यात्मिक साधना और लोक कल्याण के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस पावन महीने में किए जाने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन इंसानी मन को शांति प्रदान करते हैं। इसी पावन श्रृंखला के अंतर्गत आगरा के सिकंदरा इलाके में एक बहुत ही भव्य भक्ति संगीत का ताना-बाना बुना गया। हरिकृष्ण वृद्धजन सम्मान भवन के विशाल सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने कला और श्रद्धा का एक अनूठा उदाहरण पेश किया। रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल और सुभारत संगीत निकेतन ने मिलकर इस सुंदर शाम को यादगार बनाने में अपनी पूरी ताकत लगा दी थी।

समारोह का मुख्य उद्देश्य समाज के बुजुर्गों को मानसिक संबल देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़े रखना था। संगीत में वह अद्भुत शक्ति होती है जो हर प्रकार के कष्ट और अकेलेपन को पूरी तरह दूर कर देती है। यही कारण है कि इस भक्ति संध्या में वृद्धजन सम्मान भवन के आवासियों ने बहुत ही बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भजनों की शुरुआत होते ही पूरा वातावरण एकदम शांत और पवित्र हो गया। भजनों की गूंज से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात ईश्वर उस पावन परिसर में विराजमान हो गए हों। श्रोताओं की आंखों से भक्ति के आंसू छलक पड़े और पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से बार-बार गूंजता रहा।

मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ भव्य शुभारंभ

इस गरिमामयी और राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से किया गया। वृद्धजन सम्मान समिति के कर्मठ संस्थापक एवं सेवा प्रमुख डॉ. गिरीश सी. गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उनके साथ सुभारत संगीत निकेतन के संस्थापक पंडित देवाशीष गांगुली भी मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीडी अग्रवाल, मंजू गुप्ता, मीता गांगुली, देवाशीष रत्ना चैटर्जी और समृद्धि सिंह ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के दिव्य चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया। सभी अतिथियों ने वीणा वादिनी मां शारदे को माल्यार्पण करके उनका आशीर्वाद लिया।

इसके बाद सुभारत संगीत निकेतन की छात्राओं ने बहुत ही सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सरस्वती वंदना की समाप्ति के बाद डॉ. गिरीश सी. गुप्ता ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि बुजुर्गों की सेवा ही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है। संगीत के माध्यम से हम इन बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान लाने का एक छोटा सा प्रयास कर रहे हैं। मुख्य अतिथि बीडी अग्रवाल ने इस सुंदर और मानवीय आयोजन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में नैतिक मूल्यों और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का बहुत बड़ा माध्यम बनते हैं।

सर्वपंथ भजनों की गूंज से दिखा अखंड भारत का स्वरूप

इस सनातन भक्ति संगीत संध्या की सबसे बड़ी और खास विशेषता इसकी सर्वसमावेशी विचारधारा रही। पंडित देवाशीष गांगुली संगीतेश के कुशल और योग्य निर्देशन में एक बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया। मंच से केवल किसी एक संप्रदाय के नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के अंतर्गत आने वाले सभी मतों के भजनों की श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुतियां दी गईं। इसमें हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, आर्य समाज और राधा स्वामी सत्संग सहित विभिन्न पंथों के सुमधुर भजनों को शामिल किया गया था। इस अनूठे प्रयोग ने सभागार में मौजूद हर व्यक्ति को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया।

जब मंच से कलाकारों ने पूरी तन्मयता के साथ यह प्रसिद्ध भजन गाना शुरू किया कि “तेरे मन में राम, तन में राम, रोम-रोम में राम रे, राम सुमिर ले ध्यान लगा रे, छोड़ जगत के काम रे…!” तो पूरा सभागार एक सुर में झूम उठा। क्या युवा और क्या बुजुर्ग, सभी लोग अपने दोनों हाथ उठाकर राम नाम के जयघोष में पूरी तरह मग्न हो गए। यह प्रस्तुति इतनी ज्यादा प्रभावशाली थी कि लोग काफी देर तक अपनी सीटों पर खड़े होकर तालियां बजाते रहे। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, इस भजन ने कार्यक्रम को एक अलग ही आध्यात्मिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इसने साबित किया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती है।

यह भी पढ़ें (आगरा और प्रदेश की बड़ी खबरें)

जूनियर वर्ग के बाल कलाकारों ने बिखेरी सुरों की मधुर छटा

कार्यक्रम के अगले चरण में सुभारत संगीत निकेतन के जूनियर डिप्लोमा वर्ग के नन्हे और युवा छात्र-कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। इन युवा कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत के कठिन नियमों का पालन करते हुए बहुत ही सुंदर प्रस्तुतियां दीं। जूनियर वर्ग के कलाकारों में सविना खान और राजेश कुमार ने अपनी मधुर आवाज से सभी श्रोताओं को चकित कर दिया। इसके बाद महेंद्र प्रताप सिंह, रागिनी जैन और प्रतीक्षा जैन ने भी बहुत ही सधे हुए सुरों में अपने-अपने भजनों को प्रस्तुत किया। इन बच्चों की मासूमियत और गायकी के प्रति उनके समर्पण ने हर किसी का दिल पूरी तरह से जीत लिया।

इसके बाद निशा गोस्वामी, निखिल कुलश्रेष्ठ, करीना गोयल और सरदार अमनदीप सिंह ने मंच संभाला। सरदार अमनदीप सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया सिख शबद कीर्तन इतना शांत और गंभीर था कि पूरा माहौल गुरुवाणी के रंग में पूरी तरह से रंग गया। वैभव शर्मा, भव्यांश गोयल, कपिल सागर, शांभवी ठाकुर और उत्कर्ष तिवारी ने भी अपनी गायकी से कार्यक्रम की निरंतरता को बहुत खूबसूरती से बनाए रखा। इन सभी नन्हे कलाकारों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए वरिष्ठ अतिथियों द्वारा खूब आशीर्वाद और शाबाशी मिली। पंडाल में बैठे अभिभावकों का चेहरा भी अपने बच्चों की इस बड़ी सफलता को देखकर गर्व से पूरी तरह खिल उठा था।

सीनियर और प्रभाकर वर्ग के छात्रों ने कार्यक्रम को दी नई ऊंचाई

जूनियर कलाकारों के बाद संगीत डिप्लोमा के सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों ने मंच पर कदम रखा। इनके पास संगीत का थोड़ा ज्यादा अनुभव था, जो उनकी गायकी में साफ तौर पर झलक रहा था। सीनियर वर्ग की होनहार कलाकार चित्रा गोयल और अयान खां ने जुगलबंदी के साथ एक बहुत ही कठिन शास्त्रीय भजन प्रस्तुत किया। उनकी इस बेहतरीन प्रस्तुति पर शास्त्रीय संगीत के पारखियों ने खूब तालियां बजाईं। इसके बाद विदिशा शांत, प्रशांत परिहार, महिमा सत्संगी और अमिता शांत ने भी सुरों की ऐसी अद्भुत छटा बिखेरी कि पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो गया। इन कलाकारों ने अपनी गायकी से यह साबित किया कि वे भविष्य के बहुत बड़े कलाकार बनने की पूरी क्षमता रखते हैं।

इसके तुरंत बाद संगीत प्रभाकर डिप्लोमा के अंतिम वर्ष के वरिष्ठ छात्रों ने अपनी कला का प्रदर्शन शुरू किया। इस वर्ग की समृद्धि सिंह (कोषाध्यक्ष) ने अपनी प्रभावशाली और सुरीली आवाज से पूरे कार्यक्रम को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। आदित्य सिंह राणा (सह सचिव) ने भी उनका बहुत ही शानदार साथ दिया। अरमा कुमारी और पूजा अग्रहरि की प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं को बहुत देर तक बांधे रखा। इन वरिष्ठ छात्रों ने रागों के साथ-साथ भजनों के भावों को जिस तरह से जनता के सामने व्यक्त किया, वह वाकई में बहुत ही ज्यादा सराहनीय था। कार्यक्रम के इस हिस्से ने शास्त्रीय संगीत के महत्व को एक बार फिर से रेखांकित करने का काम किया है।

आकाशवाणी के वरिष्ठ कलाकारों ने बांधा समां

इस सनातन संगीत संध्या का सबसे बड़ा आकर्षण मुख्य और अनुभवी कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियां रहीं। सुभारत संगीत निकेतन के संस्थापक और देश के जाने-माने संगीतज्ञ पंडित देवाशीष गांगुली ने स्वयं हारमोनियम पर बैठकर अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेरा। उनके साथ आकाशवाणी की प्रतिष्ठित ए-ग्रेड कलाकार एवं संस्था की सह-संस्थापिका मीता गांगुली ने अपनी जादुई प्रस्तुति दी। मीता गांगुली की सुरीली आवाज ने हवा में एक अलग ही पवित्र मिठास पूरी तरह से घोल दी। उन्होंने जब राग आधारित भक्ति गीत गाए, तो पूरा हॉल एकदम शांत होकर उनके सुरों में लीन हो गया।

इस पूरे भव्य कार्यक्रम का कुशल और सफल मंच संचालन आकाशवाणी की मशहूर उद्घोषिका डॉ. वैशाली शर्मा द्वारा किया गया। डॉ. वैशाली शर्मा ने अपनी बेहतरीन शायरी, शुद्ध हिंदी शब्दों और सधी हुई एंकरिंग से पूरे कार्यक्रम की गरिमा को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया। उन्होंने प्रत्येक कलाकार का परिचय बहुत ही सुंदर और सम्मानजनक तरीके से कराया। इसके अलावा, पुष्पांजली नर्सिंग स्कूल की युवा छात्राओं और होनहार कलाकार शिवानी द्वारा प्रस्तुत किए गए भजनों को भी दर्शकों ने खूब सराहा। नर्सिंग स्कूल की छात्राओं ने सामूहिक रूप से एक बहुत ही सुंदर लोक भजन प्रस्तुत किया था, जिसने कार्यक्रम में एक नया रंग भर दिया।

शहर के गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग की रही उपस्थिति

इस राष्ट्रीय स्तर के भक्ति समागम में आगरा शहर के कई नामचीन और प्रतिष्ठित लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ पत्रकार डॉ. महेश धाकड़ मौजूद रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक आयोजन की मीडिया कवरेज और इसके महत्व पर अपने विचार रखे। उनके साथ ही शहर के प्रमुख समाजसेवी राजेश गुप्ता, जेपी शर्मा, तरुण राज, एसके गुप्ता, रामेंद्र शर्मा, मनोज कुमार, कमलदीप और विजय पाठक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम का पूरा आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

वृद्धजन सम्मान भवन के सभी बुजुर्ग आवासी इस कार्यक्रम से सबसे ज्यादा खुश नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में ऐसे सांस्कृतिक आयोजन एक नई ऊर्जा और जीने की नई उम्मीद भर देते हैं। वे भजनों के सुरों के साथ खुद को बहुत ही हल्का और आनंदित महसूस कर रहे थे। कई बुजुर्गों ने कलाकारों को अपने हाथों से आशीर्वाद भी दिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगी संस्थाओं, कलाकारों और आए हुए मेहमानों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे सनातन संस्कृति, शास्त्रीय संगीत और बुजुर्गों के सम्मान के लिए ऐसे आयोजनों की श्रृंखला को भविष्य में भी लगातार जारी रखेंगे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ बहुत ही गौरवपूर्ण तरीके से किया गया।

Trending Tags

Sanatan Sangeet Sandhya, Agra Cultural News, Sikandra Agra Event, Pandit Devashish Ganguly, Respect Age International, Taj News Culture, Devotional Bhajans Agra, Harikrishna Vriddhajan Samman
Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


खबर शेयर कीजिए

Leave a Comment