National Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Tuesday, 26 May 2026, 06:02:48 AM IST

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गोंडोला केबल कार सिस्टम में तकनीकी खराबी आने से सैकड़ों पर्यटक हवा में ही फंस गए। ऊंचे पहाड़ों और खराब मौसम के बीच घंटों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे करीब 320 पर्यटकों को आखिरकार सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीमों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन ने न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता को साबित किया, बल्कि संकट की घड़ी में मानवीय साहस और समन्वय की मिसाल भी पेश की।
जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 1:20 बजे गुलमर्ग गोंडोला सेवा के संचालन के दौरान अचानक तकनीकी खराबी आ गई। खराबी के चलते कई केबिन बीच हवा में रुक गए। इनमें बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और देश-विदेश से आए पर्यटक सवार थे। कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और घाटी के सबसे व्यस्त पर्यटन स्थलों में शामिल गुलमर्ग में अफरातफरी जैसा माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस, स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां सक्रिय हो गईं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात ने बताया कि सबसे पहले गुलमर्ग थाना प्रभारी अपनी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। इसके तुरंत बाद एसडीआरएफ की 14 टीमों को मौके पर भेजा गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए बाद में एक अतिरिक्त टीम और तैनात की गई, जिससे कुल 15 एसडीआरएफ टीमें राहत कार्य में जुट गईं।
रेस्क्यू अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए आठ माउंटेन रेस्क्यू यूनिट और नौ स्नो लेपर्ड टीमों को भी लगाया गया। भारतीय सेना, एनडीआरएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने कठिन मौसम और ऊंचाई के बावजूद लगातार कई घंटों तक राहत कार्य चलाया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती खराब मौसम और तेज बारिश रही। पहाड़ी इलाके में दृश्यता कम होने के कारण राहत कार्य बेहद जोखिम भरा हो गया था। इसके बावजूद जवानों ने साहस और धैर्य के साथ एक-एक पर्यटक को सुरक्षित नीचे उतारा। अधिकारियों के मुताबिक लगभग 45 ऐसे लोग थे जो शारीरिक रूप से कमजोर थे या लंबे समय तक हवा में फंसे रहने के कारण अस्वस्थ हो गए थे। उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया।
घटना के दौरान कई पर्यटक दहशत में आ गए थे। हवा में लटके केबिनों में छोटे बच्चे रोते नजर आए, जबकि बुजुर्ग यात्रियों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। हालांकि बचाव दल लगातार यात्रियों से संवाद बनाए हुए था और उन्हें भरोसा दिला रहा था कि सभी को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा। यही कारण रहा कि कई घंटे तक चले अभियान के बावजूद किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

डीजीपी नलिन प्रभात ने रेस्क्यू अभियान के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह ऑपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सभी एजेंसियों ने शानदार समन्वय के साथ काम किया। उन्होंने कहा कि मौसम खराब होने के बावजूद सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लेना राहत एजेंसियों की बड़ी उपलब्धि है।
गुलमर्ग गोंडोला देश ही नहीं बल्कि दुनिया के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल है। बड़ी संख्या में पर्यटक हर वर्ष यहां पहुंचते हैं। यह गोंडोला सेवा समुद्र तल से हजारों फीट ऊंचाई तक पर्यटकों को बर्फीली पहाड़ियों के बीच ले जाती है। ऐसे में इस तरह की तकनीकी खराबी ने पर्यटन सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन की खुलकर सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कश्मीर के गुलमर्ग में हवा में फंसे 300 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित बचाने के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, स्थानीय पुलिस और प्रशासन बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सभी एजेंसियों ने जिस तत्परता और समन्वय के साथ काम किया, वह प्रशंसनीय है।

गृह मंत्री ने कहा कि 65 केबल कारों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना किसी बड़े मिशन से कम नहीं था। उन्होंने राहत एजेंसियों के साहस, समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि देश को अपने आपदा राहत बलों पर गर्व है।
फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि आखिर गोंडोला सिस्टम में खराबी कैसे आई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।


Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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