International Desk, tajnews.in | Thursday, May 21, 2026, 12:15:00 AM IST

वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मंच से इस समय की एक बहुत ही बड़ी और बेहद संवेदनशील खबर सामने आ रही है। भारत और नॉर्वे के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों के बीच नॉर्वे के सबसे बड़े और प्रमुख दैनिक समाचार पत्र ‘आफ्टनपोस्टन’ (Aftenposten) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अत्यंत विवादित और अपमानजनक कार्टून प्रकाशित किया है। इस विवादित कार्टून में प्रधानमंत्री को एक पारंपरिक ‘सपेरे’ या ‘मदारी’ के रूप में आपत्तिजनक तरीके से चित्रित किया गया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भारतीय नेटिजन्स, विश्लेषकों और प्रवासी भारतीयों के बीच भारी आक्रोश फैल गया है। कार्टून में प्रधानमंत्री को जमीन पर चटाई बिछाकर पारंपरिक लिबास में बैठे और बीन बजाते हुए दिखाया गया है, जिससे एक सांप के आकार में पेट्रोल पंप का नोजल निकलता हुआ प्रदर्शित हो रहा है। इसके साथ छपे ओपिनियन आर्टिकल की हेडलाइन में उन्हें “एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला व्यक्ति” बताया गया है। इस निंदनीय कृत्य के सामने आते ही कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और भारत सरकार ने इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे पश्चिमी मीडिया की औपनिवेशिक मानसिकता का नतीजा करार दिया है।
अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर नस्लवाद और ओछी पत्रकारिता का खेल
भारत आज के समय में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और डिजिटल तकनीक का एक वैश्विक हब बन चुका है। अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर वैश्विक नीतियों के निर्धारण तक में भारत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। ऐसे गौरवशाली समय में पश्चिमी और यूरोपीय मीडिया द्वारा भारत की इस मजबूत छवि को धूमिल करने के लिए बार-बार ओछे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। नॉर्वे के समाचार पत्र द्वारा किया गया यह निंदनीय कृत्य इसी बौखलाहट और निराशा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर लोग इसे पूरी तरह से नस्लवादी (Racist) और अपमानजनक बता रहे हैं।

इस कार्टून की सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि इसमें जानबूझकर भारत की सदियों पुरानी रूढ़िवादिता को हवा देने का प्रयास किया गया है, जहाँ भारत को केवल ‘सपेरों और मदारियों का देश’ समझा जाता था। यूरोपीय मीडिया अक्सर ऐसी नस्लीय टिप्पणियों और चित्रों को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का बड़ा नाम देकर अपने नैतिक कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेता है। इस विवादित आउटलेट ने भी यही कमजोर तर्क सामने रखा है कि यह केवल एक राजनीतिक व्यंग्य मात्र है। हालांकि, भारतीय समुदाय और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों ने इस बारीक नैतिक रेखा को पार करने पर अखबार को आड़े हाथों लिया है।
ओस्लो में ‘इंडिया-नॉर्डिक समिट’ के दौरान प्रकाशन से कूटनीतिक तनाव की आशंका
इस विवादित कार्टून को प्रकाशित करने का समय भी पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। यह घटना ऐसे नाजुक समय पर सामने आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक राजनयिक यात्रा और ‘इंडिया-नॉर्डिक समिट’ के सिलसिले में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे हुए थे। दोनों देशों के बीच हरित ऊर्जा, समुद्री अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग को लेकर कई बड़े द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने थे। ऐसे में इस नकारात्मक घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक बड़ी दरार डालने का काम किया है।
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, इस घटना के बाद भारत सरकार का कड़ा रुख पूरी तरह से स्पष्ट और सख्त है। भारतीय विदेश मंत्रालय इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और विदेश मंत्री लगातार इस नाजुक स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। नॉर्वे में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने भी स्थानीय समाज में शांतिपूर्ण तरीके से कड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित करना शुरू कर दिया है। वे लगातार इस मीडिया आउटलेट से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं और कुछ संगठनों ने कानूनी कार्रवाई करने की भी सख्त चेतावनी दी है।
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पश्चिमी मीडिया का पुराना इतिहास, न्यू यॉर्क टाइम्स को भी मांगनी पड़ी थी माफ़ी
अंतरराष्ट्रीय मामलों के वरिष्ठ जानकारों का स्पष्ट मानना है कि यह कोई पहली बार बिल्कुल नहीं है जब पश्चिमी मीडिया ने भारतीय नेतृत्व या भारत की सफलताओं का इस तरह मजाक उड़ाया हो। इससे पहले भी अमेरिकी और यूरोपीय मीडिया ऐसे कई विवादित और पक्षपातपूर्ण कार्टून छापता रहा है। उदाहरण के लिए, जब भारत ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर तिरंगा फहराया था, तब अमेरिकी अखबार ‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ ने भारत के मंगल मिशन का मजाक उड़ाते हुए एक बैल के साथ ग्रामीण भारतीय को एलीट स्पेस क्लब के बाहर खड़ा दिखाया था। तब भी भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उस बड़े अखबार को अपनी गलती के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी।
आज का भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है, इसलिए पश्चिमी देशों का यह पुराना और सामंतवादी रवैया अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाता। इंटरनेट पर ‘बायकॉट नॉर्वे’ जैसे तीखे ट्रेंड्स और हैशटैग अभियान बहुत तेजी से चल रहे हैं। भारत के भीतर भी सभी राजनीतिक दल इस संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट हो गए हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने ही इस कार्टून की घोर निंदा की है। नेताओं का स्पष्ट रूप से कहना है कि नरेंद्र मोदी केवल एक आम व्यक्ति बिल्कुल नहीं हैं, वे करोड़ों भारतीयों द्वारा लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए शक्तिशाली प्रधानमंत्री हैं। इसलिए, उनका इस तरह अपमान पूरे देश की संप्रभुता का सीधा अपमान है। पारस्परिक सम्मान और कूटनीति हमेशा एक साथ चलते हैं, और नॉर्वे की सरकार को इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप कर उचित कदम उठाना चाहिए, अन्यथा इसके दूरगामी आर्थिक और सांस्कृतिक परिणाम हो सकते हैं।

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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