आगरा के मलपुरा में बड़ा हादसा, चलते-चलते बम की तरह फटी ट्रैक्टर वाली आटा चक्की, बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, कई घायल

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Agra Desk, tajnews.in | Tuesday, May 19, 2026, 06:10:00 PM IST

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Agra Desk | Rural Accidental & Safety Alerts

ताजनगरी आगरा के ग्रामीण क्षेत्र मलपुरा में मंगलवार सुबह एक अत्यंत दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। थाना मलपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाई खेड़ा में ट्रैक्टर से संचालित होने वाली एक चलित (मोबाइल) आटा चक्की चलते-चलते अचानक किसी भीषण बम धमाके की तरह फट गई। इस भयानक विस्फोट के कारण पूरे गांव में अचानक कोहराम और भारी चीख-पुकार मच गई। चक्की फटने से उसके भारी पत्थरों के टुकड़े कई फीट दूर तक गोलियों की रफ्तार से जा गिरे। इस अप्रत्याशित हादसे में गेहूं पिसवाने के लिए वहां खड़े साठ वर्षीय बुजुर्ग बेताल सिंह उर्फ सूखा की दर्दनाक मौत हो गई। इसके अतिरिक्त पांच से अधिक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। धमाका इतना ज्यादा भीषण था कि पास के एक मकान का मुख्य दरवाजा पूरी तरह टूट गया। वहीं चपेट में आने से एक मवेशी की भी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

हादसे के मुख्य बिंदु
  • भीषण धमाके के साथ फटा पत्थर: मलपुरा के बाई खेड़ा गांव में ट्रैक्टर पर लगी आटा चक्की अचानक तेज आवाज के साथ ब्लास्ट हो गई।
  • बुजुर्ग बेताल सिंह की मौत: गेहूं पिसवाने पहुंचे साठ वर्षीय बुजुर्ग चक्की के उड़ते हुए पत्थरों की सीधी चपेट में आ गए और दम तोड़ दिया।
  • पांच ग्रामीण गंभीर रूप से घायल: हादसे में बुरी तरह घायल हुए पांच लोगों को इलाज के लिए आगरा के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
  • मवेशी की मौत और मकान को क्षति: पत्थरों की तेज रफ्तार टक्कर से अजय पाल के मकान का दरवाजा टूट गया और एक बेजुबान जानवर की भी जान चली गई।

ग्राम बाई खेड़ा में मंगलवार की सुबह अचानक गूंजा मौत का सन्नाटा

आगरा के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों कटाई के बाद गेहूं पिसाई का काम बहुत तेजी से चल रहा है। इसी सिलसिले में मलपुरा थाना क्षेत्र के बाई खेड़ा गांव में मंगलवार सुबह सामान्य दिनों की तरह लोग अपने कार्यों में व्यस्त थे। सुबह करीब दस बजे गांव की गलियों में ट्रैक्टर पर लगी एक चलित (मोबाइल) आटा चक्की पहुंची। ग्रामीण अपने-अपने घरों से गेहूं और दलिया पिसवाने के लिए चक्की के आसपास एकत्र होने लगे। चक्की को गांव के ही निवासी अजय पाल के घर के ठीक सामने मुख्य रास्ते पर खड़ा किया गया था। ट्रैक्टर के इंजन की तेज आवाज के साथ चक्की लगातार घूम रही थी और पिसाई का काम चल रहा था।

पड़ोस के लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे और आपस में बातचीत कर रहे थे। तभी अचानक बिना किसी चेतावनी के एक बहुत ही भयंकर और कान फोड़ देने वाला धमाका हुआ। यह आवाज इतनी तेज थी कि पूरा गांव दहल उठा। धमाके के साथ ही चक्की के अंदर लगा भारी पत्थर (पाट) कई टुकड़ों में टूटकर बिखर गया। चक्की की तेज घूर्णन गति (Rpm) के कारण पत्थर के ये भारी और नुकीले टुकड़े गोलियों की रफ्तार से चारों तरफ हवा में उड़ने लगे। वहां मौजूद लोगों को संभलने या भागने का जरा सा भी मौका बिल्कुल नहीं मिल सका। पत्थर के टुकड़े सीधे वहां खड़े ग्रामीणों के शरीरों से जाकर टकराए।

साठ वर्षीय बेताल सिंह की मौके पर ही मौत, पांच ग्रामीणों के शरीर लहूलुहान

इस अप्रत्याशित और भीषण खूनी हादसे की चपेट में आने से सबसे पहला शिकार साठ वर्षीय बुजुर्ग बेताल सिंह उर्फ सूखा पुत्र नेकराम बने। वह चक्की के बिल्कुल पास में खड़े होकर अपना गेहूं पिसवा रहे थे। पत्थर का एक बहुत ही भारी टुकड़ा सीधे उनके सिर और छाती से जाकर टकराया। पत्थर की भीषण मार लगते ही बेताल सिंह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। ग्रामीण उन्हें तुरंत आपातकालीन स्थिति में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल लेकर भागे, लेकिन डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बेताल सिंह की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, उनके परिवार में कोहराम मच गया। इसके अलावा चक्की के पास खड़े अन्य ग्रामीण पवन, प्रमोद, भूदेवी, भूपेंद्र सिंह और गोपाल सिंह भी उड़ते हुए पत्थरों की सीधी चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए। कई घायलों के हाथ-पैर और सिर में गंभीर फ्रैक्चर आए हैं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने अपनी गाड़ियों की मदद से सभी घायलों को आगरा के विभिन्न निजी अस्पतालों में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार घायलों में से दो लोगों की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। वे गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में जिंदगी और मौत के बीच लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

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धमाके का भयावह असर, मकान का दरवाजा टूटा, मवेशी ने तोड़ा दम

इस हादसे का असर इतना ज्यादा भयानक और विनाशकारी था कि इसकी कल्पना करके ही ग्रामीणों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं। चक्की के फटने के बाद जो पत्थर उड़ा, उसने न केवल इंसानों को निशाना बनाया बल्कि आसपास की संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया। अजय पाल के मकान का मजबूत मुख्य लकड़ी का दरवाजा पत्थर की सीधी और तेज टक्कर के कारण पूरी तरह से टूटकर दो हिस्सों में बिखर गया। घर के अंदर मौजूद महिलाएं और बच्चे इस अचानक हुए धमाके और तबाही को देखकर बुरी तरह सहम गए और चीखने लगे।

इसके अतिरिक्त, रास्ते के किनारे बंधा एक बेजुबान मवेशी (जानवर) भी इस जानलेवा पत्थर की चपेट में आ गया। पत्थर का एक नुकीला हिस्सा सीधे मवेशी के पेट में जाकर लगा, जिससे अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव होने के कारण उस बेजुबान जानवर ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। धमाके की गूंज इतनी दूर तक गई कि आसपास के खेतों में काम कर रहे किसान भी अपने हल और ट्रैक्टर छोड़कर तुरंत गांव की तरफ दौड़ पड़े। कुछ ही समय में घटनास्थल पर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। पूरे बाई खेड़ा गांव में इस समय केवल रोने-बिलखने की आवाजें आ रही हैं और हर तरफ भारी दहशत का माहौल बना हुआ है।

मलपुरा थाना पुलिस ने संभाली कमान, शव को भेजा पोस्टमार्टम हाउस

ग्रामीणों द्वारा इस भयावह हादसे की लिखित और मौखिक सूचना तुरंत स्थानीय मलपुरा थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही मलपुरा थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल पर जमा हो रही आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और आपातकालीन एम्बुलेंस की मदद से घायलों को सही इलाज दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की। पुलिस ने घटनास्थल का बहुत ही बारीकी से निरीक्षण किया है और फटी हुई चक्की के अवशेषों को अपने कब्जे में ले लिया है।

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, पुलिस ने मृत बुजुर्ग बेताल सिंह के शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए आगरा के मुख्य मर्च्युरी हाउस भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। पुलिस प्रशासन ने हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी जांच में शामिल करने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक तकनीकी आशंका जताई जा रही है कि चक्की के पत्थर में पहले से ही कोई बारीक अदृश्य दरार (क्रैक) रही होगी। अत्यधिक आरपीएम और ट्रैक्टर के इंजन के भारी दबाव के चलते वह दरार अचानक बड़े विस्फोट में बदल गई।

बिना किसी रजिस्ट्रेशन और जांच के गांवों में दौड़ रहीं मौत की गाड़ियां

इस बड़े और दर्दनाक हादसे ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से संचालित हो रही चलित आटा चक्कियों की सुरक्षा पर एक बहुत बड़ा गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। बाई खेड़ा के ग्रामीणों ने अत्यंत रोष व्यक्त करते हुए कहा कि आज पूरे जिले के गांवों में ऐसे सैकड़ों जुगाड़ वाले ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। इन ट्रैक्टरों के पीछे अवैध रूप से बड़ी-बड़ी आटा चक्कियां और थ्रेशर मशीनें जोड़ी गई हैं। इन मशीनों का न तो कोई सरकारी रजिस्ट्रेशन होता है और न ही परिवहन या उद्योग विभाग द्वारा इनकी सुरक्षा मानकों की कोई नियमित जांच की जाती है।

अधिक पैसे कमाने के लालच में चक्की के मालिक कई बार बेहद घटिया और एक्सपायर हो चुके पत्थरों का उपयोग करते हैं। ट्रैक्टर के तेज इंजन के साथ जुड़ने के बाद जब ये मशीनें अत्यधिक दबाव में काम करती हैं, तो ये किसी चलते-फिरते बम की तरह खतरनाक हो जाती हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आगरा जिले में बिना लाइसेंस और बिना सुरक्षा मानकों के चल रही ऐसी सभी चलित चक्कियों पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। यदि समय रहते इन पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो भविष्य में ऐसे और भी कई निर्दोष ग्रामीण अपनी जान गंवा सकते हैं। पुलिस ने चक्की के मालिक के खिलाफ लापरवाही से मौत का मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश जारी है।

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