UP Politics Desk, tajnews.in | Tuesday, May 19, 2026, 03:05:00 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सड़कों पर नमाज पढ़ने के मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बहुत बड़ा और तीखा वाकयुद्ध छिड़ गया है। राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026’ के मंच से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नमाज वाले बयान पर बहुत ही कड़ा पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि अगर किसी धार्मिक स्थल पर जगह कम है और कोई व्यक्ति मजबूरी में कुछ समय के लिए सड़क पर नमाज पढ़ भी रहा है, तो इसमें किसी को क्या दिक्कत होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर असली मुद्दों जैसे बेरोजगारी, पेपर लीक और आरक्षण से जनता का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर ‘पॉलिटिकल स्कोरिंग’ करने का गंभीर आरोप लगाया। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुले मंच से चेतावनी दी थी कि यूपी की सड़कों पर किसी भी हाल में अराजकता या यातायात बाधित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
अमर उजाला संवाद के मंच पर यूपी के दो दिग्गजों में वैचारिक टकराव
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित होटल द सेंट्रम में आयोजित दो दिवसीय विशेष वैचारिक महामंथन के दौरान राज्य की सियासत का तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इस भव्य कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। मंच पर आते ही उन्होंने सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। विशेष रूप से उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा पहले दिन दिए गए उस बयान को आड़े हाथों लिया जो सड़कों पर धार्मिक गतिविधियों को रोकने से संबंधित था। अखिलेश यादव ने इसे पूरी तरह से एक राजनीतिक हथकंडा करार दिया।
सपा प्रमुख ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता आज अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। युवा रोजगार मांग रहे हैं और छात्र परीक्षाओं की शुचिता को लेकर परेशान हैं। लेकिन सरकार इन ज्वलंत विषयों पर बात करने के बजाय यह तय करने में जुटी है कि कौन कहां प्रार्थना कर रहा है। उन्होंने कहा कि सड़कों के उपयोग को लेकर नियम कानून पहले से ही किताबों में दर्ज हैं। इसके नाम पर किसी भी राजनीतिक दल को समाज में नफरत फैलाने या ‘पॉलिटिकल स्कोरिंग’ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती। उन्होंने भाजपा को विकास के मोर्चे पर पूरी तरह विफल बताया।
अखिलेश यादव ने पूछा- ‘अगर जगह कम है तो नमाज पढ़ने में क्या परेशानी है?’
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तर्कों को पूरी तरह से खारिज करते हुए एक बहुत ही सीधा और तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां सदियों से सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते आए हैं। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की रही है, जहां हर किसी को अपनाने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि जहां तक सड़कों की बात है, तो हमारी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सड़कों को और ज्यादा चौड़ा किया जाए ताकि ट्रैफिक की समस्या ही न रहे। लेकिन सरकार जानबूझकर नमाज का मुद्दा उछाल रही है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी मस्जिद या तय स्थल पर जगह की कमी है और कोई आस्थावान व्यक्ति कुछ मिनटों के लिए सड़क के किनारे इबादत कर लेता है, तो इससे किसी नागरिक को क्या परेशानी हो सकती है? भाजपा केवल इसलिए इस विषय को बार-बार उठा रही है ताकि मुख्य बहस को दूसरी तरफ मोड़ा जा सके। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, अखिलेश यादव ने साफ किया कि विपक्ष अब सत्तारूढ़ दल की इस चाल में बिल्कुल नहीं फंसेगा। वे सरकार से लगातार नीट (NEET) परीक्षा के विवादों और 69 हजार शिक्षक भर्ती में पिछड़ों व दलितों के लूटे गए आरक्षण पर कड़े सवाल पूछते रहेंगे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दो टूक- ‘सड़क पर तमाशा बिल्कुल नहीं चलेगा’
इस बड़े विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई थी जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी मंच से उत्तर प्रदेश की वर्तमान कानून व्यवस्था और अपनी प्रशासनिक उपलब्धियों का बहुत ही मजबूती से ब्यौरा दिया था। मुख्यमंत्री ने बिना किसी लाग-लपेट के साफ कहा था कि आज उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज पूरी तरह से बंद हो चुकी है। कोई भी व्यक्ति इस वास्तविकता की पुष्टि करने के लिए राज्य के किसी भी शहर में जाकर देख सकता है। उन्होंने कड़े लहजे में पूछा था कि क्या किसी को भी यह अधिकार है कि वह सार्वजनिक चौराहे पर आकर अपनी इबादत के नाम पर तमाशा खड़ा करे और आम जनता का रास्ता पूरी तरह रोक दे?
मुख्यमंत्री ने कानून के शासन को सर्वोपरि बताते हुए कहा था कि सड़कें आम नागरिकों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, बीमार मरीजों और व्यापारियों के सुचारू आवागमन के लिए बनाई गई हैं। यदि किसी समुदाय की संख्या ज्यादा है और धार्मिक स्थल छोटा पड़ रहा है, तो वे अपनी नमाज को अलग-अलग समय पर शिफ्ट के अनुसार पढ़ सकते हैं। इसके लिए प्रशासन उन्हें पूरी सुरक्षा देगा, लेकिन सड़क बाधित करने की अनुमति किसी भी कीमत पर नहीं मिलेगी। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की तरफ इशारा करते हुए यह भी कहा था कि अगर रहने की जगह नहीं है, तो अपनी संख्या को नियंत्रित करना सीखें। सामर्थ्य न होने पर आबादी बढ़ाना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।
‘प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो सरकार के पास दूसरा तरीका भी तैयार है’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख इस जनहित से जुड़े मामले पर अत्यंत आक्रामक और स्पष्ट रहा। उन्होंने अपने संबोधन में नियम तोड़ने वाले असामाजिक तत्वों को बहुत ही खुली और सीधी चेतावनी दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का पहला और एकमात्र काम संवाद स्थापित करना है। वे हर मसले को बातचीत और आपसी सहमति से हल करना पसंद करते हैं। लेकिन अगर कुछ लोग जानबूझकर प्यार की भाषा नहीं समझना चाहते हैं और व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश करते हैं, तो सरकार उनके खिलाफ दूसरा और बहुत ही कठोर कानूनी तरीका अपनाने में जरा सा भी संकोच नहीं करेगी।
योगी आदित्यनाथ ने पूर्व की कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बरेली और अन्य क्षेत्रों में कुछ लोगों ने पूर्व में कानून को अपने हाथ में लेने और सरकार की ताकत को आजमाने का प्रयास किया था। लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें उनकी सही जगह दिखाकर यह स्पष्ट कर दिया कि अराजकता फैलाने वालों का हश्र क्या होता है। सरकार का नियम पूरी तरह सार्वभौम है और यह प्रदेश के हर नागरिक पर बिना किसी धार्मिक भेदभाव के एक समान रूप से लागू होता है। इस सख्त संदेश के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले ने धर्मस्थलों के बाहर सुरक्षा और चेकिंग को और भी ज्यादा कड़ा कर दिया है।
अधिवक्ता संघ पर लाठीचार्ज और स्मार्ट सिटी के मुद्दों पर सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने नमाज के मुद्दे के साथ-साथ राज्य की वर्तमान कानून व्यवस्था और विकास योजनाओं को लेकर भी सरकार पर कई गंभीर और तीखे आरोप लगाए। उन्होंने सोमवार को लखनऊ में हुए अधिवक्ता संघ के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि खुद को सनातनी कहने वाली भाजपा सरकार के राज में न्याय की मांग कर रहे वकीलों पर बेरहमी से लाठियां बरसाई गईं। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारी वकीलों के हाथों में पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामचरितमानस मौजूद थी, फिर भी पुलिस ने उनका कोई सम्मान नहीं किया। इस घटना ने भाजपा के धार्मिक दावों के खोखलेपन को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
सपा अध्यक्ष ने सरकार के ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ पर भी तंज कसते हुए कहा कि जमीन पर कोई भी काम दिखाई नहीं दे रहा है। शहरों की हालत जस की तस बनी हुई है और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। उन्होंने बिजली विभाग के ‘स्मार्ट मीटर’ प्रोजेक्ट की विफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों के कारण सरकार को खुद ही उन मीटरों को हटाने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सबसे अधर्मी पार्टी है जो केवल धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल करना जानती है, लेकिन जनता की भलाई और विकास से उसका कोई सरोकार बिल्कुल नहीं है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इन दोनों बड़े नेताओं का यह वैचारिक टकराव उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा को तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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