International Desk, tajnews.in | Friday, May 1, 2026, 12:15:10 AM IST

काठमांडू: पड़ोसी देश नेपाल के दुर्गम और पथरीले रास्तों पर एक बार फिर मौत का तांडव देखने को मिला है। बृहस्पतिवार को नेपाल के रोल्पा जिले में एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। थवांग ग्रामीण नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले जलजला इलाके में एक निजी जीप पहाड़ी सड़क से अनियंत्रित होकर लगभग 700 मीटर गहरी खाई में गिर गई। इस रूह कंपा देने वाले हादसे में कम से कम 17 लोगों की मौके पर ही मौत की पुष्टि हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना एक बेहद दूरदराज के इलाके में हुई, जिससे शुरुआती राहत और बचाव कार्यों में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गिरने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और अधिकांश यात्रियों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। यह हादसा न केवल एक भौगोलिक त्रासदी है, बल्कि इसने नेपाल की पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बैसाख पूर्णिमा उत्सव: खुशियों के सफर का दर्दनाक अंत
हादसे का शिकार हुए लोग नेपाल के स्थानीय ग्रामीण थे, जो बेहद उत्साह के साथ शुक्रवार को जलजला में आयोजित होने वाले ‘बैसाख पूर्णिमा उत्सव’ में शिरकत करने के लिए निकले थे। रोल्पा जिला पुलिस कार्यालय के सूचना अधिकारी और पुलिस इंस्पेक्टर सुनील थापा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस निजी जीप को स्थानीय निवासियों ने सामूहिक रूप से किराए पर लिया था। पहाड़ी समुदायों के लिए यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक मिलन का भी बड़ा अवसर होता है। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि आस्था का यह सफर बीच रास्ते में ही काल के ग्रास में बदल जाएगा।
बृहस्पतिवार को इलाके में अचानक मौसम ने करवट ली और भारी बारिश शुरू हो गई। नेपाल के इन पहाड़ी इलाकों में बारिश के बाद सड़कें अक्सर कीचड़ और मलबे से भर जाती हैं, जिससे ड्राइविंग करना लगभग असंभव हो जाता है। जब जीप जलजला के पास एक खतरनाक पहाड़ी मोड़ से गुजर रही थी, तभी कीचड़ में गाड़ी के टायर फिसल गए। ड्राइवर ने वाहन को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन ढलान इतनी तीव्र थी कि जीप सड़क छोड़कर सीधे 700 मीटर नीचे खाई में जा गिरी। दुर्घटना के समय गाड़ी के अंदर यात्रियों की सही संख्या अभी भी स्पष्ट नहीं है, जिससे स्थानीय अधिकारियों को डर है कि आने वाले समय में मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
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बचाव कार्य में प्रकृति की बाधा और प्रशासन की तैयारी
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए सबसे पहले खाई में उतरने की कोशिश की, लेकिन पहाड़ी भूगोल और अंधेरे के कारण वे असहाय नजर आए। रोल्पा जिला पुलिस और आपातकालीन बचाव दल की टीमें सूचना मिलते ही रवाना हो गईं, लेकिन लगातार हो रही भारी बारिश ने उनके लिए बड़ी बाधा खड़ी कर दी। पुलिस इंस्पेक्टर सुनील थापा ने बताया कि गहरी खाई और कीचड़ भरी ढलान के कारण शवों को बाहर निकालना और मलबे की तलाशी लेना एक जानलेवा चुनौती बन गया है।
लुम्बिनी प्रांत की पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर अतिरिक्त सशस्त्र कर्मियों और पैरामेडिकल टीमों को भेजा है। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा अंतिम बचाव कार्यों में समन्वय बनाने के लिए एक विशेष कमांड सेंटर भी स्थापित किया गया है। वर्तमान में प्राथमिकता मलबे में दबे हो सकने वाले जीवित बचे लोगों की तलाश और शवों की शिनाख्त करना है। बारिश के कारण फिसलन भरी ढलान पर बचाव दल रस्सियों और आधुनिक उपकरणों की मदद से खाई में उतरने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन ने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा है ताकि यदि कोई जीवित मिलता है तो उसे तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके।
सड़क सुरक्षा और ओवरलोडिंग: एक पुरानी और जानलेवा समस्या
नेपाल के पहाड़ी जिलों में इस तरह के हादसे पहली बार नहीं हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्घटना के पीछे सड़क की खराब स्थिति के साथ-साथ ओवरलोडिंग भी एक बहुत बड़ा कारण हो सकती है। निजी वाहनों को किराए पर लेकर अक्सर ग्रामीण क्षमता से दोगुने यात्री उनमें भर लेते हैं, जिससे पहाड़ी मोड़ों पर वाहन का संतुलन बिगड़ना आम बात है। इसके अतिरिक्त, नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के समय भूस्खलन और सड़कों का कटाव ड्राइविंग को मौत के खेल जैसा बना देता है।
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि जिस रास्ते पर यह हादसा हुआ, वह मानक के अनुसार सुरक्षित नहीं था। अधिकारियों को आशंका है कि किसी यांत्रिक खराबी, जैसे कि ब्रेक फेल होना, ने भी इस त्रासदी में भूमिका निभाई हो सकती है। नेपाल सरकार ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश भी देखा जा रहा है, क्योंकि उनका आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद इस मार्ग की मरम्मत और सुरक्षा बैरियर नहीं लगाए गए थे। फिलहाल, पूरा रोल्पा जिला इस समय शोक की लहर में डूबा हुआ है और बैसाख पूर्णिमा का उत्सव मातम में बदल गया है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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