Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Friday, May 1, 2026, 03:05:20 AM IST

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीखे तीर चलने शुरू हो गए हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए एक नया विवाद छेड़ दिया है। 29 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री को ‘छोटा फैंटा’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जो दूसरों के नाम बदलने के लिए मशहूर थे, पश्चिम बंगाल पहुंचते ही खुद उनका नाम बदल गया। अखिलेश यादव का यह बयान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संदर्भ में आया है, जहाँ उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की जनता ने मुख्यमंत्री को नया नाम दे दिया है। उन्होंने मजाकिया लहजे में इस बात की ‘सीबीआई जांच’ कराने की भी मांग कर डाली कि आखिर यह ‘निजी’ नाम बाहर कैसे आया। इस बयान के बाद प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
‘छोटा फैंटा’ और बंगाल की सियासत – अखिलेश का कटाक्ष
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव का अंदाज काफी हमलावर और व्यंग्यात्मक नजर आया। उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव के अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “नाम बदलने वालों के बंगाल में जाकर नाम बदल गए। जो दूसरों का नाम बदलते थे, बंगाल जाकर उनका भी नाम बदल गया।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें नहीं पता कि ‘छोटा फैंटा’ किसका नाम है और यह निजी जानकारी सार्वजनिक कैसे हो गई। इस दौरान उन्होंने तंज कसते हुए मांग की कि इस मामले में न केवल सीबीआई, बल्कि ईडी, इनकम टैक्स विभाग, सेंट्रल फोर्स और यहां तक कि आर्मी इंटेलिजेंस को भी लगा देना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस ‘ब्रांड’ पर चोट था, जिसमें वे शहरों और स्थानों के नाम बदलने के लिए चर्चा में रहते हैं। समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने इस बयान को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव अब मुख्यमंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत और सीधे हमलों की रणनीति अपना रहे हैं, ताकि आने वाले चुनावों से पहले एक आक्रामक छवि पेश की जा सके।
आपके लिए और…
गाजीपुर और हाथरस: कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा
तंज और कटाक्ष के बीच अखिलेश यादव ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और विशेष रूप से महिला सुरक्षा के मुद्दे पर योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने गाजीपुर में एक नाबालिग लड़की का शव मिलने की घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार कई घटनाओं को छिपा रही है। अखिलेश ने कहा, “यह दुखद है। कई घटनाएं सरकार छिपा रही है। कई घटनाओं के बारे में हमें बाद में जानकारी मिलती है।” उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का डेलिगेशन जब सच्चाई जानने गया, तो वहां की पुलिस और दबंग लोग नहीं चाहते थे कि तथ्य बाहर आएं।
अखिलेश यादव ने गाजीपुर की घटना की तुलना हाथरस कांड से करते हुए कहा कि वहां भी बेबस पिता की मर्जी के बिना और मेडिकल प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सैंपल्स के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रहती है ताकि दोषियों को बचाया जा सके। 15 अप्रैल को नदी में मिले नाबालिग के शव के मामले में पुलिस का कहना है कि मौत डूबने से हुई है और रेप की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि परिवार दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगा रहा है। अखिलेश यादव ने इन घटनाओं को सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बताया।
सियासी भविष्य और बयानों का असर
समाजवादी पार्टी के मुखिया के इन बयानों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति और अधिक तीखी होने वाली है। मुख्यमंत्री को ‘छोटा फैंटा’ कहना और उनकी निजी बातों पर कटाक्ष करना बीजेपी को नागवार गुजरा है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि अखिलेश यादव अपनी हार की हताशा में भाषाई मर्यादा खो रहे हैं। हालांकि, सपा खेमा इसे जनता की आवाज और सरकार की विफलताओं पर एक ‘क्रिएटिव’ प्रहार मान रहा है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि वे चुप बैठने वाले नहीं हैं और हर मंच पर सरकार की ‘दमनकारी’ नीतियों का विरोध करेंगे। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इन बयानों के पीछे छिपी सच्चाई को समझें और कानून व्यवस्था की स्थिति पर सरकार से सवाल पूछें। इस जुबानी जंग के बीच प्रदेश की जनता अब यह देख रही है कि विकास और सुरक्षा के असली मुद्दों पर चर्चा कब शुरू होगी। फिलहाल, ‘छोटा फैंटा’ वाला यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में शीर्ष पर बना हुआ है।
Trending Tags

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
7579990777



