National Desk, tajnews.in | Thursday, April 23, 2026, 06:51:30 PM IST

टिहरी: देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर सड़क हादसों का खौफनाक सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को टिहरी गढ़वाल जिले में एक ऐसा हृदयविदारक और महाविनाशकारी सड़क हादसा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को गहरे मातम में डुबो दिया है। चंबा-कोटीकॉलोनी मोटर मार्ग पर नैल गांव के समीप एक तेज रफ्तार यात्री वाहन अनियंत्रित होकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस भयानक दुर्घटना में वाहन में सवार 10 लोगों में से 8 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सबसे अधिक रुला देने वाली बात यह है कि ये सभी लोग किसी यात्रा या भ्रमण पर नहीं गए थे, बल्कि हरिद्वार से अपने एक परिचित का अंतिम संस्कार करके भारी मन से अपने गांव लौट रहे थे। शोक से भरे इस सफर का अंत एक और महाशोक में बदल गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और राहत तथा बचाव कार्य शुरू कर दिया। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें गहरी खाई से निकालकर तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे घनसाली क्षेत्र के तीन गांवों में मातम की चादर बिछा दी है और पहाड़ों पर सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शोक का सफर: अंतिम संस्कार से लौटते समय हुआ महाविनाश
उत्तराखंड के पर्वतीय रास्तों पर सफर करना हमेशा से ही जोखिम भरा रहा है, लेकिन जब कोई सफर पहले से ही शोक से भरा हो, तो एक और हादसा किसी भी इंसान को भीतर तक तोड़ देता है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, घनसाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीन गांवों— चांजी, ठेला और चकरेडा के कुछ निवासी अपने किसी सगे-संबंधी या ग्रामीण के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार (Funeral) के लिए पवित्र नगरी हरिद्वार गए हुए थे। गंगा तट पर विधि-विधान से अंतिम संस्कार की सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद, यह पूरा समूह एक वाहन में सवार होकर वापस अपने पहाड़ों की ओर लौट रहा था। वाहन में कुल 10 लोग सवार थे, जो सभी एक-दूसरे के परिचित और ग्रामीण थे।
लगातार सफर करने और दुखद माहौल के कारण वाहन में सवार सभी लोग मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद थके हुए थे। जैसे ही उनका वाहन टिहरी जिले के चंबा-कोटीकॉलोनी मार्ग पर नैल गांव के समीप पहुंचा, अचानक चालक ने वाहन से अपना नियंत्रण खो दिया। पहाड़ी रास्ता संकरा और घुमावदार होने के कारण, वाहन सीधे कई सौ फीट गहरी और दुर्गम खाई में जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वाहन के खाई में गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के गांवों के लोग सहम गए। गाड़ी पहाड़ों और चट्टानों से टकराते हुए पूरी तरह से चकनाचूर हो गई, जिसके परिणामस्वरूप उसमें सवार 8 लोगों के शरीर बुरी तरह कुचल गए और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। यह हादसा इतना वीभत्स था कि देखने वालों की रूह कांप उठी।
सघन रेस्क्यू ऑपरेशन: घायलों को खाई से निकाला बाहर
दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने टिहरी जिला प्रशासन और पुलिस को घटना की सूचना दी। पहाड़ी ढलान और गहरी खाई होने के कारण स्थानीय लोगों के लिए खाई में उतरकर सीधे मदद करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो रहा था। कुछ ही देर में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्थानीय पुलिस और प्रशासन की रेस्क्यू टीमें भारी साजो-सामान के साथ घटनास्थल पर पहुंच गईं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने भी तुरंत घटना का संज्ञान लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से पल-पल की रिपोर्ट ली। बृजेश भट्ट ने मीडिया को आधिकारिक रूप से जानकारी देते हुए इस बात की पुष्टि की है कि इस भयावह हादसे में आठ लोगों की जान जा चुकी है।
रेस्क्यू टीमों ने रस्सियों और स्ट्रेचर के सहारे सैकड़ों फीट गहरी खाई में उतरकर बचाव अभियान (Rescue Operation) शुरू किया। गाड़ी के परखच्चे उड़ चुके थे और शव गाड़ी के अंदर और बाहर बुरी तरह से फंसे हुए थे। कड़ी मशक्कत और घंटों के संघर्ष के बाद, बचाव दल ने दो लोगों को जीवित अवस्था में ढूंढ निकाला। दोनों घायलों की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी, जिसके बाद उन्हें बिना कोई समय गंवाए एंबुलेंस के जरिए नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम उनके जीवन को बचाने के लिए हर संभव चिकित्सकीय प्रयास कर रही है। वहीं, आठों मृतकों के शवों को खाई से निकालकर पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है, ताकि आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें।
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घनसाली के तीन गांवों में पसरा मातम, चूल्हे तक नहीं जले
इस खौफनाक हादसे की खबर जैसे ही टिहरी के घनसाली स्थित चांजी, ठेला और चकरेडा गांवों में पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई। जिन घरों के लोग अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करके घर लौटने का इंतजार कर रहे थे, वहां अब हमेशा के लिए मातम पसर गया है। एक साथ आठ लोगों की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इन तीनों गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं। ग्रामीण एक-दूसरे को सांत्वना देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन एक साथ इतने लोगों को खोने का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
पहाड़ों में ग्रामीण समाज एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़ा होता है। ऐसे में एक ही वाहन में तीन अलग-अलग गांवों के लोगों की मौत ने पूरे इलाके के सामाजिक ताने-बाने को गहरा दुख पहुंचाया है। प्रशासन के अधिकारी अब इन गांवों में जाकर शोक संतप्त परिवारों से मिल रहे हैं और उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से भी मृतकों के परिजनों के लिए जल्द ही आर्थिक मुआवजे (Ex-gratia) की घोषणा की जा सकती है, लेकिन कोई भी आर्थिक मदद इन परिवारों के लिए उस कमी को पूरा नहीं कर सकती, जो एक झटके में उनके जीवन में आ गई है। शवों का पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद उन्हें उनके पैतृक गांवों में लाया जाएगा, जहां एक साथ कई चिताएं जलेंगी, जो किसी भी समाज के लिए सबसे दुखद दृश्य होता है।
रुद्रप्रयाग में भी कार खाई में गिरी, तीन की मौत
टिहरी गढ़वाल का यह हादसा कोई इकलौती घटना नहीं है। उत्तराखंड में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी दिन, रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) जिले में भी एक अन्य खौफनाक सड़क दुर्घटना घटी। जानकारी के अनुसार, भीरी-ककोला मोटर मार्ग पर भी एक कार अचानक अनियंत्रित होकर लगभग 250 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस भयानक हादसे में भी तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। एक ही दिन में गढ़वाल मंडल में हुए इन दो बड़े हादसों ने परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहाड़ों पर लगातार हो रहे इन हादसों के पीछे कई कारण सामने आते हैं। तीव्र और अंधे मोड़ (Blind Curves), सड़कों के किनारे क्रैश बैरियर (Crash Barriers) का अभाव, वाहन चालकों की लापरवाही और थकावट इन दुर्घटनाओं के मुख्य कारण माने जाते हैं। विशेष रूप से जब लोग हरिद्वार या किसी लंबी यात्रा से लौटते हैं, तो चालकों में थकावट और नींद का प्रभाव बहुत अधिक होता है, जो पल भर में एक बड़ी दुर्घटना का रूप ले लेता है। जनता अब सरकार से यह मांग कर रही है कि इन पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) को चिन्हित कर वहां सेफ्टी वॉल्स बनाई जाएं और चालकों को पहाड़ी रास्तों पर सतर्कता से गाड़ी चलाने के लिए जागरूक किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं को रोका जा सके और देवभूमि की सड़कों पर बहते खून के इस सिलसिले को थामने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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