Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Friday, May 1, 2026, 01:10:20 AM IST

सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद से एक ऐसी चौंकाने वाली और विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने ध्वनि प्रदूषण के जानलेवा खतरों को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है। शादी-समारोहों में अक्सर बजने वाला ‘कानफाडू’ डीजे अब न केवल इंसानों के लिए सिरदर्द बन रहा है, बल्कि बेजुबान पक्षियों के लिए काल साबित हो रहा है। सुल्तानपुर के बल्दीराय क्षेत्र में एक बारात के दौरान बज रहे बेहद तेज आवाज वाले डीजे के शोर ने एक झटके में 140 मुर्गियों की जान ले ली। तेज धमक और कान फोड़ देने वाले संगीत के कारण पोल्ट्री फार्म के भीतर ऐसी दहशत फैली कि मुर्गियों में भगदड़ मच गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। इस अजीबो-गरीब लेकिन दुखद घटना के बाद पोल्ट्री फार्म मालिक के घर में मातम पसर गया है और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजे ऑपरेटर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह मामला इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे निर्धारित मानकों से अधिक शोर बेजुबानों के लिए साक्षात मौत बन सकता है।
शादी की खुशियों के बीच मची चीख-पुकार – क्या है पूरा मामला?
यह पूरी घटना सुल्तानपुर जिले के बल्दीराय थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दरियापुर गांव की है। 25 अप्रैल की रात गांव के निवासी बब्बन विश्वकर्मा की बेटी की शादी का समारोह चल रहा था, जिसमें राम भद्र पुरवा गांव से बारात आई हुई थी। बारात के स्वागत के लिए डीजे की व्यवस्था की गई थी, जो अपनी पूरी क्षमता और कान फोड़ने वाली आवाज के साथ संगीत बिखेर रहा था। जैसे ही बारात गांव की गलियों से गुजरते हुए साबिर अली के पोल्ट्री फार्म के करीब पहुंची, डीजे की गूंज और उसके बेस (Base) का कंपन असहनीय स्तर तक पहुंच गया।
पोल्ट्री फार्म के मालिक साबिर अली के अनुसार, संगीत की धमक इतनी तेज थी कि फार्म के भीतर मौजूद मुर्गियों में अचानक अफरा-तफरी मच गई। तेज ध्वनि तरंगों के प्रहार से डरी मुर्गियां जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं। देखते ही देखते फार्म के भीतर भगदड़ की स्थिति बन गई और कुछ ही मिनटों के भीतर 140 मुर्गियों की तड़पकर मौत हो गई। जब साबिर अली ने फार्म के भीतर का दृश्य देखा, तो उनके होश उड़ गए। मृत मुर्गियों का ढेर देखकर उन्होंने तुरंत बारात रोककर शोर कम करने की मिन्नतें कीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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पुलिस की सख्त कार्रवाई: डीजे ऑपरेटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज
140 मुर्गियों की मौत से साबिर अली को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है。 उन्होंने इस मामले को लेकर बल्दीराय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया。 बल्दीराय पुलिस ने कुड़वार थाना क्षेत्र के निवासी और डीजे ऑपरेटर कवि यादव के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है。 उपनिरीक्षक भरत सिंह इस पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि वे सभी साक्ष्यों और बयानों के आधार पर डीजे संचालक की भूमिका की जांच करेंगे। यह देखा जाएगा कि क्या डीजे की आवाज निर्धारित डेसीबल (Decibel) की सीमा से अधिक थी और क्या रिहायशी इलाके में इस तरह के साउंड सिस्टम के उपयोग के लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं। पुलिस के इस कड़े रुख से डीजे संचालकों और शादी-ब्याह में शोर मचाने वालों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में ध्वनि प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पशु विशेषज्ञों की राय: बेजुबानों के लिए क्यों घातक है शोर?
ध्वनि प्रदूषण केवल इंसानों के कानों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित होता है। पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, मुर्गियां और अन्य पक्षी तेज आवाज और कंपन के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं। अत्यधिक शोर और धमक उनके शरीर में ‘स्ट्रेस हार्मोन’ को तेजी से बढ़ा देती है। जब कोई तेज आवाज अचानक किसी पोल्ट्री फार्म के पास बजती है, तो पक्षियों में ‘पैनिक’ (घबराहट) पैदा हो जाता है।
पैनिक की स्थिति में पक्षी एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने लगते हैं या फार्म की जाली से टकराने लगते हैं, जिससे वे चोटिल हो जाते हैं। इसके अलावा, अत्यधिक डर उनके दिल की धड़कन को अनियंत्रित स्तर तक बढ़ा सकता है, जिससे उनका हृदय काम करना बंद कर देता है और उनकी तत्काल मृत्यु हो जाती है। सुल्तानपुर की यह घटना इसी वैज्ञानिक तथ्य की पुष्टि करती है। विशेषज्ञों ने अपील की है कि पोल्ट्री फार्म या पशुपालन केंद्रों के पास किसी भी तरह के तेज शोर-शराबे वाले आयोजनों से बचना चाहिए ताकि बेजुबानों की जान सुरक्षित रहे।
ध्वनि प्रदूषण पर प्रशासन की अपील और सामाजिक चेतना
बल्दीराय पुलिस ने इस दुखद घटना के बाद आम जनता से एक विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि शादी-समारोहों और अन्य कार्यक्रमों के दौरान लोग अपनी खुशियां जरूर मनाएं, लेकिन डीजे की आवाज को निर्धारित सरकारी मानकों के भीतर ही रखें। ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिना किसी नियंत्रण के बजने वाले ये साउंड सिस्टम न केवल इंसानों के लिए बहरापन, अनिद्रा और तनाव जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहे हैं, बल्कि अब ये बेजुबान जानवरों की मौत का कारण भी बन रहे हैं।
सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि डीजे के उपयोग को लेकर प्रशासन को और अधिक सख्त कदम उठाने चाहिए। रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध का पालन कड़ाई से हो और ध्वनि सीमा (Sound Limit) का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए। सुल्तानपुर की 140 मुर्गियों की मौत केवल एक आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह इंसानी लापरवाही के कारण बेजुबान पक्षियों के साथ हुई क्रूरता का प्रतीक है। प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले के जरिए समाज में एक कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि किसी की खुशियां दूसरों (चाहे वे जानवर ही क्यों न हों) के लिए मौत का सबब नहीं बननी चाहिए।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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