National Desk, tajnews.in | Monday, April 20, 2026, 05:15:30 PM IST

उधमपुर/जम्मू: धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के खूबसूरत और घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर सोमवार की सुबह एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली त्रासदी लेकर आई। उधमपुर जिले के रामनगर इलाके में यात्रियों से खचाखच भरी एक बस अचानक अनियंत्रित होकर करीब 150 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण सड़क हादसे में अब तक 20 से अधिक बेगुनाह यात्रियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह विनाशकारी दुर्घटना रामनगर-उधमपुर मार्ग पर स्थित कागोट गांव (Kagot Village) के पास हुई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों, पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने मिलकर एक बड़े स्तर का राहत और बचाव अभियान शुरू किया। गहरी खाई और कठिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मलबे और क्षत-विक्षत बस से शवों और घायलों को निकालने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों और घायलों के परिजनों के लिए तत्काल अनुग्रह राशि (Ex-Gratia) की घोषणा की है। वहीं, राज्य और केंद्र सरकार के मंत्रियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है और गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट (Airlift) कर बड़े अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है।
सोमवार सुबह 8:30 बजे का खौफनाक मंजर
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना सोमवार, 20 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग 8:30 बजे से 10:00 बजे के बीच घटित हुई। एक निजी यात्री बस रामनगर (Ramnagar) से यात्रियों को लेकर जिला मुख्यालय उधमपुर (Udhampur) की ओर जा रही थी। सुबह का समय होने के कारण बस में स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों की भारी भीड़ थी। बस अपनी क्षमता से कहीं अधिक भरी हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जब यह खचाखच भरी बस रामनगर-उधमपुर मार्ग पर कागोट गांव के समीप एक खतरनाक और तीखे मोड़ पर पहुंची, तो ड्राइवर ने अचानक बस से अपना नियंत्रण खो दिया।
ब्रेक फेल होने या ओवरस्पीडिंग (Over-speeding) के कारण बस सड़क के किनारे लगे सेफ्टी बैरियर को तोड़ते हुए सीधे 150 फीट गहरी चट्टानी खाई में जा गिरी। खाई में गिरते समय बस कई बार पलटी, जिससे उसके परखच्चे उड़ गए। बस के गिरते ही वहां चीख-पुकार मच गई। घाटी की शांति पल भर में दर्दनाक चीखों और रुदन में बदल गई। आसपास के गांवों के लोग जब धमाके की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बस का मलबा बिखरा पड़ा है और खून से लथपथ लोग जिंदगी की भीख मांग रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बिना पुलिस का इंतजार किए तुरंत अपनी जान पर खेलकर खाई में उतरना शुरू किया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।
युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन, अस्पतालों में मचा हाहाकार
हादसे की सूचना मिलते ही उधमपुर जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस (J&K Police), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और सेना की टुकड़ियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं। 150 फीट गहरी और खड़ी खाई होने के कारण राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) बेहद चुनौतीपूर्ण था। रेस्क्यू टीमों को रस्सियों और स्ट्रेचर के सहारे घायलों को ऊपर सड़क तक लाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई यात्रियों के शव बस के मुड़े हुए लोहे के ढांचे में बुरी तरह फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए गैस कटर (Gas Cutter) का इस्तेमाल करना पड़ा।
अब तक मलबे से 20 से अधिक शवों को निकाला जा चुका है और मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 60 से अधिक घायल यात्रियों को तुरंत उधमपुर के जिला अस्पताल (District Hospital Udhampur) और रामनगर के उप-जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अचानक एक साथ इतने सारे घायलों के पहुंचने से अस्पतालों में हाहाकार मच गया। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर उन्हें तुरंत ड्यूटी पर बुला लिया गया। वार्ड खून से सने हुए थे और बाहर खड़े परिजन अपने अपनों की सलामती के लिए भगवान से दुआएं मांग रहे थे। जिन घायलों की स्थिति बेहद नाजुक थी, उनके लिए तुरंत विशेष एंबुलेंस और हवाई मार्ग (Air Ambulance) की व्यवस्था की गई।
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पीएम मोदी और राष्ट्रीय नेताओं ने जताया गहरा शोक
इस भीषण बस दुर्घटना की खबर फैलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी संदेश में पीएम मोदी ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में हुआ बस हादसा अत्यंत दुखद है। मैं उन सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खो दिया है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीड़ितों की मदद के लिए ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष’ (PMNRF) से तत्काल आर्थिक सहायता की घोषणा की है। इस घोषणा के तहत, हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को 2-2 लाख रुपये (Rs. 2 Lakh Ex-Gratia) और गंभीर रूप से घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) और राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने भी इस भीषण हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उधमपुर जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि राहत और बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आनी चाहिए और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया एयरलिफ्ट का इंतजाम
उधमपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह (Dr. Jitendra Singh) ने दुर्घटना की सूचना मिलते ही अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और वे तुरंत घटनास्थल और अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने खुद वहां खड़े रहकर राहत और बचाव कार्यों की कमान संभाली और उधमपुर जिला अस्पताल में भर्ती घायलों का हालचाल जाना। डॉ. जितेंद्र सिंह ने डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्वरित कदम उठाया। उन्होंने प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर उन मरीजों को, जिनकी हालत बहुत ज्यादा नाजुक थी और जिन्हें सिर या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई थीं, उन्हें विशेष हेलीकॉप्टर (Airlift) के जरिए जम्मू के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC Hospital Jammu) में शिफ्ट करवाया। डॉ. सिंह ने आश्वस्त किया है कि केंद्र और राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों को इस हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक विस्तृत जांच (Detailed Investigation) के आदेश भी दिए हैं।
पहाड़ी रास्तों पर ‘ओवरलोडिंग’ और हादसों का खूनी इतिहास
उधमपुर का यह बस हादसा कोई पहली घटना नहीं है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में इस तरह के बस हादसे एक खौफनाक और जानलेवा रूटीन बन चुके हैं। इन हादसों के पीछे सबसे बड़ा और मुख्य कारण ‘ओवरलोडिंग’ (Overloading) और जर्जर बसें हैं। कागोट गांव में दुर्घटनाग्रस्त हुई यह बस भी यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी। 35-40 सीटर बस में 80 से ज्यादा यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। जब ऐसी ओवरलोडेड बसें खतरनाक पहाड़ी मोड़ों (Steep Curves) पर मुड़ती हैं, तो उनका गुरुत्वाकर्षण केंद्र (Center of Gravity) बिगड़ जाता है, जिससे वे आसानी से खाई में पलट जाती हैं।
इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों में सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) की भारी कमी है, जिसके कारण लोग मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर इन निजी ओवरलोडेड बसों की छतों पर और दरवाजों पर लटक कर यात्रा करते हैं। प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस अक्सर चंद रुपयों की रिश्वत के लालच में इन ओवरलोडेड बसों को बिना चेकिंग के पास कर देते हैं। इस भ्रष्ट व्यवस्था और जानलेवा लापरवाही का सीधा खामियाजा उन दर्जनों बेगुनाह परिवारों को भुगतना पड़ता है, जिनके अपने इन खूनी हादसों में हमेशा के लिए उनसे छिन जाते हैं। क्या 20 से अधिक चिताओं के एक साथ जलने के बाद जम्मू-कश्मीर का परिवहन विभाग जागेगा? क्या पहाड़ी रास्तों पर बसों में ओवरलोडिंग पर सख्त और स्थाई रोक लगाई जाएगी? ये वे ज्वलंत सवाल हैं, जिनका जवाब आज उधमपुर का हर नागरिक मांग रहा है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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