अशोक सिद्धार्थ के बाद आकाश आनंद का सियासी सफर खत्म? बसपा में अंदरूनी टकराव ने बदले समीकरण

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ससुर के राजनीति से संन्यास के बावजूद मायावती ने भतीजे आकाश को पार्टी से किया ‘पूरी तरह मुक्त’; ‘डबल माइंड’ और पारिवारिक मोह का आरोप, छोटे भतीजे ईशान आनंद की बढ़ी सक्रियता

लखनऊ डेस्क, 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 11 सितंबर 2026, 09:15:30 AM IST

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लखनऊ डेस्क

tajnews.in | लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य एक बार फिर चर्चा में है। आकाश आनंद के ससुर और बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद यह माना जा रहा था कि आकाश की पार्टी में वापसी का रास्ता साफ हो सकता है। लेकिन घटनाक्रम इसके उलट रहा। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से पूरी तरह अलग कर दिया।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले मायावती ने आकाश आनंद की सक्रिय राजनीतिक वापसी को अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से पूरी तरह अलग होने की शर्त से जोड़ा था। अशोक सिद्धार्थ ने यह शर्त पूरी करते हुए राजनीति से संन्यास की घोषणा भी कर दी, लेकिन इसके बावजूद आकाश को पार्टी में दोबारा जिम्मेदारी नहीं मिली।

HIGHLIGHTS
  • अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद भी आकाश आनंद बसपा से पूरी तरह बाहर।
  • मायावती ने लगाया ‘डबल माइंड’ और आंदोलन से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को तरजीह देने का आरोप।
  • अशोक सिद्धार्थ और अंटू मिश्रा के निष्कासन से बदले बसपा के आंतरिक समीकरण।
  • छोटे भाई ईशान आनंद की संगठन में एंट्री से अगली पीढ़ी के नेतृत्व पर चर्चा तेज।

पहले रखी शर्त, फिर अशोक सिद्धार्थ का संन्यास

मायावती ने आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका को लेकर कहा था कि उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी और बहुजन आंदोलन से अलग होकर पूरी तरह राजनीति से संन्यास लेना होगा। इसके बाद ही आकाश को दोबारा जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है।

इसके अगले ही दिन अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि उनका राजनीतिक और सामाजिक जीवन मायावती का ऋणी है और उनका आदेश उनके लिए सर्वोपरि है।

अशोक सिद्धार्थ ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को साजिश बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने आकाश आनंद को कभी गुमराह नहीं किया और पिछले कई महीनों से उनकी आकाश से मुलाकात तक नहीं हुई थी। उन्होंने मायावती से यह भी आग्रह किया कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की वापसी से जोड़कर न देखा जाए।

लेकिन आकाश आनंद की वापसी के बजाय हुई विदाई

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद राजनीतिक हलकों में यह उम्मीद थी कि अब आकाश आनंद को बसपा में फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। लेकिन मायावती के फैसले ने इस उम्मीद को खत्म कर दिया।

मायावती ने आकाश पर पार्टी और बहुजन आंदोलन के हितों को लेकर डबल माइंड से काम करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार आकाश का रवैया पार्टी के प्रति अपेक्षित प्रतिबद्धता के अनुरूप नहीं था। मायावती के इस फैसले से साफ संकेत मिला कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बावजूद आकाश आनंद के लिए बसपा में वापसी का रास्ता नहीं खुला।

अशोक सिद्धार्थ को लेकर लंबे समय से नाराजगी

अशोक सिद्धार्थ को लेकर बसपा के भीतर लंबे समय से नाराजगी की चर्चा रही है। उन्हें पार्टी से दो बार निष्कासित किया गया। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में गड़बड़ी और दिल्ली विधानसभा चुनाव में हस्तक्षेप जैसे आरोप भी उनके खिलाफ लगाए गए।

उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे। हालिया कार्रवाई में उन पर उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया। अशोक सिद्धार्थ और पार्टी के कुछ बड़े पदाधिकारियों के बीच लंबे समय से मतभेद की चर्चा भी होती रही है। माना जाता है कि इस अंदरूनी टकराव का असर आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ा।

दो बड़े नेताओं की भूमिका पर सवाल

अशोक सिद्धार्थ ने अपने खिलाफ साजिश में कुछ पार्टी पदाधिकारियों की भूमिका का संकेत दिया है। सूत्रों के हवाले से दो बड़े नेताओं के साथ उनकी लंबे समय से तनातनी की चर्चा भी सामने आई है।

हालांकि अशोक सिद्धार्थ ने सार्वजनिक रूप से किसी नेता का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया है। इसलिए इन नेताओं को सीधे तौर पर जयचंद कहना स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा माना जाएगा। बसपा की अंदरूनी राजनीति में अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर वे कौन से नेता थे, जिनकी भूमिका ने अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद के राजनीतिक समीकरण को प्रभावित किया।

अंटू मिश्रा के निष्कासन से भी बदले समीकरण

पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा का बसपा से निष्कासन भी इसी घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को 3 अगस्त को और अंटू मिश्रा को करीब दस दिन बाद पार्टी से बाहर किया था। दोनों के करीबी संबंधों को भी इस कार्रवाई के संदर्भ में देखा गया। इसके बाद बसपा में अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव और उनके साथ खड़े नेताओं को लेकर भी सवाल उठे।

कभी मायावती के उत्तराधिकारी माने जाते थे आकाश आनंद

आकाश आनंद का मौजूदा राजनीतिक हश्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ समय पहले तक उन्हें मायावती के बाद बसपा के युवा चेहरे और संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था।

मायावती ने उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया था। लेकिन पिछले दो वर्षों में उनका राजनीतिक सफर लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरता रहा। उन्हें जिम्मेदारियों से हटाया गया, फिर वापसी हुई और अब एक बार फिर उन्हें पार्टी से पूरी तरह अलग कर दिया गया है।

अब ईशान आनंद पर नजर

आकाश आनंद के बाहर होने के बाद बसपा में अगली पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मायावती के दूसरे भतीजे ईशान आनंद की सक्रियता को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालांकि इसे अभी सीधे तौर पर उत्तराधिकार परिवर्तन की घोषणा कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन आकाश आनंद के बाहर होने के बाद बसपा के युवा नेतृत्व का समीकरण जरूर बदल गया है।

2027 से पहले मायावती का बड़ा संदेश

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम बसपा के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी संगठन और नेतृत्व से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में मायावती का अपने परिवार और पार्टी संगठन के बीच स्पष्ट सीमा खींचना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश माना जा सकता है।

मायावती का फैसला यह संकेत देता है कि पार्टी में किसी नेता की भूमिका केवल पारिवारिक संबंधों के आधार पर तय नहीं होगी और संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन दूसरी ओर आकाश आनंद के लगातार उतार-चढ़ाव ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या बसपा अब युवा नेतृत्व के लिए कोई नया चेहरा तैयार करेगी।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बावजूद आकाश आनंद की बसपा में वापसी क्यों नहीं हुई और अब मायावती के बाद पार्टी की अगली पीढ़ी का चेहरा कौन होगा? फिलहाल इतना जरूर है कि आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य पर बसपा के भीतर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की अगली रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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