National Desk, tajnews.in | Thursday, May 21, 2026, 02:15:00 PM IST

देश के डिजिटल मीडिया, सोशल नेटवर्क और राष्ट्रीय विधिक गलियारों से इस समय की एक बहुत ही अनोखी, सनसनीखेज और भारी कौतूहल पैदा करने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के कथित विवादित कॉकरोच वाले बयान के विरोध में देश के युवाओं द्वारा बनाई गई आभासी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) पर डिजिटल सेंसरशिप का कड़ा हथौड़ा चला है। गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X/ट्विटर) ने कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। बैन होने से ठीक पहले तक महज चंद दिनों के भीतर इस अकाउंट पर करीब 1 lakh 93 हजार फॉलोअर्स जुड़ चुके थे। हालांकि, एक्स पर लगी इस रोक के बावजूद इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी का जलवा अभूतपूर्व तरीके से बरकरार है, जहां महज 6 दिनों के भीतर इस पार्टी के आधिकारिक पेज पर 1.26 करोड़ (1.26 Crore) से अधिक फॉलोअर्स की भारी बाढ़ आ गई है। यह संख्या देश के सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुल इंस्टाग्राम फॉलोअर्स से भी करीब डेढ़ गुना अधिक है, जिसने देश के बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों और खुफिया विंग को पूरी तरह हैरान कर दिया है।


शहरी और ग्रामीण युवाओं के गुस्से का नया केंद्र बनी CJP, ‘अभिजीत’ को पहले से था अंदेशा
सोशल मीडिया पर एक मजाक और व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अब देश के युवाओं की गहरी आर्थिक और सामाजिक भड़ास का एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय जरिया बनता जा रहा है। अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन की मास्टर डिग्री कर रहे और पूर्व में आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में वॉलंटियर रह चुके अभिजीत दीपके ने इस पार्टी का गठन किया है। उन्होंने अपनी पार्टी का कड़ा और व्यंग्यात्मक नारा ‘सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी’ रखा है। एक्स अकाउंट पर बैन लगने के तुरंत बाद संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स से इस स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए तंज कसा कि जैसा उन्होंने पहले ही सोचा था, बिल्कुल वैसा ही हुआ। तंत्र कभी भी युवाओं की सामूहिक भड़ास को लोकतांत्रिक रूप से स्वीकार नहीं कर पाता।

इस पार्टी की लोकप्रियता के आंकड़ों की तुलना यदि भारत के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों से की जाए, तो परिणाम बेहद खलबली मचाने वाले हैं। गुरुवार दोपहर एक बजे तक जहां इंस्टाग्राम पर भाजपा के कुल 87 लाख और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के 1.33 करोड़ फॉलोअर्स हैं, वहीं महज छह दिन पुरानी इस कॉकरोच जनता पार्टी ने सवा करोड़ से अधिक का आंकड़ा छू लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में इस समय बेकाबू हो रही बेरोजगारी, पेपर लीक के बड़े घोटालों, सरकारी भर्तियों में होने वाले कड़े विलंब और सीमित नौकरी के अवसरों के कारण छात्रों के भीतर अंदरूनी तौर पर जो भीषण लावा सुलग रहा था, यह डिजिटल पेज उसी गुस्से का सबसे आधुनिक और बड़ा प्रतीक बन गया है।

घोषणापत्र में यूएपीए और मीडिया लाइसेंस रद्द करने जैसे 5 बड़े कड़े वादे
कॉकरोच जनता पार्टी ने केवल फॉलोअर्स ही नहीं बटोरे, बल्कि अपना एक अत्यंत कड़ा और क्रांतिकारी घोषणापत्र (मैनिफेस्टो) भी जारी कर दिया है, जो इंटरनेट पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। घोषणापत्र में साफ कहा गया है कि यदि उनकी पार्टी कभी भी सरकार में आती है, तो सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद किसी भी सीजेआई को राज्यसभा जाने का कोई इनाम या रिवॉर्ड बिल्कुल नहीं मिलेगा। इसके अलावा, यदि देश में किसी भी नागरिक का वैध वोट मतदाता सूची से डिलीट किया जाता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को सीधे यूएपीए (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि किसी से उसका वोटिंग अधिकार छीनना किसी बड़े आतंकवाद से कम नहीं माना जा सकता।
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, महिलाओं को संसद और कैबिनेट में 33 प्रतिशत के बजाय पूरे 50 प्रतिशत का कड़ा और वास्तविक आरक्षण देने की पैरवी की गई है। साथ ही देश के बड़े उद्योगपतियों जैसे अंबानी और अडाणी के सभी मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द करने की बात कही गई है ताकि स्वतंत्र और वास्तविक मीडिया को जगह मिल सके और पक्षपाती एंकरों के बैंक खातों की कड़े स्तर पर जांच कराई जा सके। दल-बदल करने वाले सांसदों और विधायकों पर अगले 20 साल तक किसी भी पब्लिक ऑफिस में बैठने पर पूर्ण पाबंदी लगाने का वादा किया गया है। वर्तमान में दिल्ली के भीतर इस आंदोलन के समर्थक बकायदा कॉकरोच की पोशाकें पहनकर यमुना किनारे सफाई अभियान चला रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य चुनाव लड़ने से ज्यादा युवाओं के बीच एक नई राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता फैलाना है।

सीजेआई सूर्यकांत ने पैरासाइट और कॉकरोच वाली टिप्पणी पर दी कड़ी वैधानिक सफाई
इस पूरे व्यापक विवाद की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो 15 मई को कुछ मुख्यधारा की मीडिया रिपोर्ट्स में यह मचे बवाल का दावा किया गया था कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने एक अदालती मामले की सुनवाई के दौरान देश के कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। इस खबर के फैलते ही न्यायिक शुचिता पर कड़े सवाल उठने लगे थे। बढ़ते विवाद को देखते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्वयं अपनी इस ‘पैरासाइट और कॉकरोच’ वाली गंभीर टिप्पणी पर बहुत ही स्पष्ट और कड़ी वैधानिक सफाई पेश की है।
सीजेआई ने बहुत ही साफ शब्दों में स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी देश के आम या बेरोजगार युवाओं के खिलाफ बिल्कुल नहीं थी, बल्कि उनका सीधा संकेत उन धोखेबाज लोगों की तरफ था जो फर्जी और जाली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे बेहद पवित्र और सम्मानित पेशे में घुस आए हैं। इसके साथ ही मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य कई गरिमापूर्ण पेशों में भी ऐसे परजीवी (पैरासाइट) तत्व घुसपैठ कर चुके हैं जो पूरे सिस्टम को अंदर से खोखला कर रहे हैं। हालांकि, कोर्ट रूम की इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर पूरी तरह से अलग संदर्भ में तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिसने देखते ही देखते इस डिजिटल आंदोलन का रूप ले लिया। आगरा सहित पूरे उत्तर प्रदेश और देश के प्रशासनिक हलकों में इस बड़े सोशल मीडिया सस्पेंशन और युवाओं के इस डिजिटल उभार को लेकर कलेक्ट्रेट परिसरों में भी चर्चाओं का बाजार पूरी तरह से गर्म हो गया है। ताज न्यूज़ इस पूरी बड़ी डिजिटल सेंसरशिप, युवाओं की नई भड़ास और न्यायिक गलियारों की हर एक कड़क अपडेट पर अपनी पैनी नजर लगातार बनाए हुए है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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