हरियाणा: भांजी की शादी में पहुंचे अखिलेश यादव ने मंच से भरी सियासी हुंकार, ‘अहीरवाल सीएम’ और ‘पीडीए’ पर दिया बड़ा बयान

National Desk, tajnews.in | Monday, April 20, 2026, 01:45:30 AM IST

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रेवाड़ी: राजनीति में कोई भी पारिवारिक या सामाजिक मंच कब एक बड़े सियासी अखाड़े में तब्दील हो जाए, यह कहना बेहद मुश्किल है। रविवार को हरियाणा के रेवाड़ी जिले में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी भांजी की शादी में ‘भात’ भरने की रस्म अदा करने के लिए रेवाड़ी पहुंचे थे। लेकिन, जैसे ही उनके सामने मीडिया के कैमरे और स्थानीय नेताओं का जमावड़ा लगा, यह विशुद्ध पारिवारिक कार्यक्रम एक धधकते हुए राजनीतिक मंच (Political Stage) में बदल गया। अखिलेश यादव ने इस अवसर का पूरा राजनीतिक लाभ उठाते हुए केंद्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार पर तीखे और धारदार हमले किए। उन्होंने अहीरवाल की राजनीति, हरियाणा के आगामी चुनावों, जातीय जनगणना, महिला आरक्षण और राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एकजुटता जैसे तमाम ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने रेवाड़ी की धरती से अहीरवाल क्षेत्र से मुख्यमंत्री (Ahirwal CM) बनाने की वकालत की है और उत्तर प्रदेश के अपने सफल ‘पीडीए’ (PDA) फॉर्मूले को हरियाणा की राजनीति में भी लागू करने का बड़ा ऐलान किया है। अखिलेश के इन बयानों ने हरियाणा के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी एक नई बहस छेड़ दी है।

HIGHLIGHTS
  1. पारिवारिक कार्यक्रम बना सियासी मंच: भांजी की शादी में रेवाड़ी पहुंचे अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार और उसकी नीतियों पर जमकर निशाना साधा।
  2. अहीरवाल सीएम और अहीर रेजिमेंट की मांग: सपा प्रमुख ने कहा कि जो क्षेत्र सरकार बनाता है, मुख्यमंत्री भी वहीं का होना चाहिए।
  3. हरियाणा में भी चलेगा ‘पीडीए’ का जादू: अखिलेश ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों (PDA) को सत्ता में भागीदारी दिलाने का स्पष्ट फॉर्मूला पेश किया।
  4. जातीय जनगणना पर सरकार को घेरा: उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की वास्तविक तस्वीर सामने आने के डर से केंद्र सरकार जातीय जनगणना से बच रही है।

जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय की मुखर वकालत

अखिलेश यादव ने अपने राजनीतिक संबोधन की शुरुआत समाजवादी पार्टी के सबसे मुख्य और ज्वलंत एजेंडे यानी ‘जातीय जनगणना’ (Caste Census) से की। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा और तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार जानबूझकर देश में जातीय जनगणना कराने से भाग रही है। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि जब तक देश में जातीय जनगणना नहीं होगी, तब तक समाज की वास्तविक तस्वीर और हकीकत कभी सामने नहीं आ पाएगी।

सपा प्रमुख ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. BR Ambedkar) द्वारा रचित संविधान के तहत देश के हर शोषित, वंचित और पिछड़े वर्ग को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। सत्ताधारी दल को यह डर सता रहा है कि अगर जातीय आंकड़े सार्वजनिक हो गए, तो वंचित वर्ग अपने असली हक और सत्ता में अपनी उचित भागीदारी (Share in Power) की जोरदार मांग करेगा, जिसे नकारना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं होगा। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि आज विपक्ष की जो मजबूत एकजुटता पूरे देश में दिखाई दे रही है, उसी के भारी दबाव के कारण मोदी सरकार को हाल ही में कई बड़े और विवादास्पद मुद्दों पर पीछे हटने और झुकने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

अहीरवाल की धरती से ‘अहीर सीएम’ और ‘अहीर रेजिमेंट’ का समर्थन

हरियाणा का रेवाड़ी जिला ‘अहीरवाल’ (Ahirwal Region) राजनीति का सबसे बड़ा और प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस क्षेत्र का पूरे राज्य की राजनीति और सरकार बनाने में सीधा दखल होता है। अखिलेश यादव, जो खुद यादव (अहीर) समुदाय के सबसे बड़े राष्ट्रीय नेताओं में गिने जाते हैं, उन्होंने रेवाड़ी की इस भौगोलिक और जातीय नब्ज को बहुत ही सटीकता से पकड़ा। उन्होंने मंच से एक बहुत बड़ा और भावनात्मक राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि जब हरियाणा में अहीरवाल क्षेत्र का मतदाता सरकार बनाता है, तो राज्य का मुख्यमंत्री (Chief Minister) भी इसी क्षेत्र से होना चाहिए।

अखिलेश का यह बयान इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हरियाणा भाजपा के भीतर भी राव नरवीर सिंह और आरती राव जैसे दिग्गज नेता समय-समय पर अहीरवाल से मुख्यमंत्री बनाने का मजबूत दावा ठोकते रहे हैं। इसके साथ ही, अखिलेश यादव ने भारतीय सेना में ‘अहीर रेजिमेंट’ (Ahir Regiment) के गठन की दशकों पुरानी मांग का भी पुरजोर समर्थन किया। अहीरवाल क्षेत्र का सेना में एक गौरवशाली इतिहास रहा है, और इस मांग का समर्थन करके अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर हरियाणा के पूर्व सैनिकों, युवाओं और यादव बहुल मतदाताओं के दिलों में अपनी पार्टी के लिए एक मजबूत जगह बनाने की कोशिश की है।

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हरियाणा में चलेगा ‘पीडीए’ फॉर्मूला, भाजपा पर तीखे प्रहार

उत्तर प्रदेश के पिछले चुनावों में समाजवादी पार्टी को ऐतिहासिक सफलता दिलाने वाले ‘पीडीए’ (PDA – पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने हरियाणा की राजनीति के लिए एक नया विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि पीडीए फॉर्मूला कोई राजनीतिक जुमला नहीं है, बल्कि यह सच्चे सामाजिक न्याय (Social Justice) का सबसे बड़ा आधार है। इसका एकमात्र मकसद समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सत्ता के गलियारों में सीधी भागीदारी दिलाना है। अखिलेश ने पूरी मजबूती के साथ वकालत की कि उत्तर प्रदेश और बिहार की तर्ज पर अब हरियाणा के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी इसी ‘पीडीए’ फॉर्मूले को लागू किया जाएगा ताकि भाजपा को सत्ता से बेदखल किया जा सके।

इसके अलावा, महिला आरक्षण (Women Reservation) और परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के पूरी तरह से पक्ष में है, लेकिन भाजपा की नीयत में खोट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस भाजपा का इतिहास ही महिलाओं को नेतृत्व देने में कमजोर रहा है और जिसने आज तक अपने संगठन में किसी महिला को ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ नहीं बनाया, वह आज महिलाओं के हितैषी होने का नाटक कर रही है। परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने सरकार पर मनमाने तरीके से सीमाएं थोपने और राजनीतिक साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया, जिसे विपक्ष ने मिलकर बेनकाब किया है।

‘मित्र’ वाले बयान पर प्रधानमंत्री मोदी को कड़ा जवाब

राष्ट्रीय राजनीति और आगामी विधानसभा चुनावों पर बात करते हुए सपा प्रमुख ने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ यह दावा किया कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु समेत देश के कई अन्य राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को करारी और ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा इतनी ज्यादा डरी हुई है कि उसने अपने उम्मीदवारों की जमानत बचाने के लिए ही संसद का विशेष सत्र बुलाया था, ताकि ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA Bloc) के सांसद अपने क्षेत्रों में चुनाव प्रचार न कर सकें।

गठबंधन के भविष्य को लेकर फैल रही सभी अफवाहों पर पूर्ण विराम लगाते हुए अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन पूरी तरह से एकजुट है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस (Congress) के बीच यह मजबूत तालमेल भविष्य के सभी चुनावों में भी इसी तरह जारी रहेगा। जब पत्रकारों ने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) द्वारा हाल ही में उन्हें ‘मित्र’ (Friend) कहे जाने वाले बयान पर सवाल पूछा, तो अखिलेश यादव ने बेहद ही सधा हुआ और तीखा जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि, “मैंने हाथ जोड़कर उनसे स्पष्ट कह दिया था कि हमें ऐसे मित्र की कोई जरूरत नहीं है।” अखिलेश का यह जवाब दर्शाता है कि वह भाजपा के खिलाफ किसी भी तरह की राजनीतिक नरमी बरतने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।

मुलायम सिंह यादव का हरियाणा कनेक्शन और पारिवारिक रिश्ते

सियासी बयानबाजी से अलग, यह कार्यक्रम मूल रूप से एक बहुत ही खास और आत्मीय पारिवारिक समारोह था। अखिलेश यादव रेवाड़ी में डॉक्टर विराट वीर की बहन डॉ. श्वेता की शादी में ‘भात’ (Bhaat Ceremony) की रस्म निभाने पहुंचे थे। यह पारिवारिक रिश्ता समाजवादी पार्टी के संस्थापक और अखिलेश के पिता, दिवंगत मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) से गहराई से जुड़ा हुआ है। दरअसल, मुलायम सिंह यादव की चचेरी बहन कुसुमलता की शादी रेवाड़ी में हुई थी और डॉ. श्वेता उन्हीं कुसुमलता की सगी नातिन हैं।

डॉ. श्वेता वर्तमान में रेवाड़ी के ही प्रसिद्ध विराट अस्पताल में एक कुशल डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनके मंगेतर डॉ. ऋषभ भी रेवाड़ी के ही प्रतिष्ठित निवासी हैं। डॉ. ऋषभ ने बरेली से अपना एमबीबीएस (MBBS) पूरा किया है और वर्तमान में मास्टर ऑफ चिरुर्गिया (MCh) की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। डॉ. ऋषभ के पिता राजबीर यादव शिक्षा के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं और ‘कृष्णा एजुकेशन सोसाइटी’ के बैनर तले कई स्कूल और कॉलेज सफलतापूर्वक संचालित करते हैं। डॉ. श्वेता के भाई, डॉ. विराट एक जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) हैं, जो 2017 से रेवाड़ी में अपना अस्पताल चला रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल शादी समारोह में हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन दिग्गज राजनेताओं की उपस्थिति ने इस पारिवारिक कार्यक्रम को हरियाणा के सबसे चर्चित और यादगार आयोजनों में से एक बना दिया।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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