Agra Desk, tajnews.in | Sunday, April 12, 2026, 06:55:30 AM IST

आगरा: आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में किसी भी बीमारी या सर्जरी के बाद मरीज को होने वाले असहनीय दर्द से राहत दिलाना सबसे बड़ी और पहली चुनौती होती है। ‘तीव्र दर्द’ (Acute Pain) न केवल मरीज की शारीरिक रिकवरी को धीमा करता है, बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसी गंभीर और महत्वपूर्ण विषय पर मंथन करने के लिए ताजनगरी आगरा के प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) में एक विशाल और ज्ञानवर्धक कार्यशाला (Workshop) का आयोजन किया गया। एसएनएमसी के एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर एवं पेन मैनेजमेंट विभाग की ओर से आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का मुख्य विषय ‘तीव्र दर्द प्रबंधन में नवीनतम प्रगति’ (Recent Advances in Acute Pain Management) था। इस खास कार्यक्रम में देश के कई जाने-माने अस्पतालों के दिग्गज दर्द विशेषज्ञ (Pain Specialists) और वरिष्ठ चिकित्सकों ने शिरकत की। विशेषज्ञों ने जूनियर और रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ दर्द को नियंत्रित करने की अत्याधुनिक तकनीकों, नई दवाओं और अपने दशकों के क्लिनिकल अनुभवों को साझा किया, ताकि भविष्य में मरीजों को सर्जरी या ट्रॉमा के बाद होने वाले भयंकर दर्द से त्वरित और सुरक्षित तरीके से निजात दिलाई जा सके।
दीप प्रज्वलन से हुआ ज्ञान के इस महाकुंभ का शुभारंभ
चिकित्सा जगत की इस अहम और शैक्षिक कार्यशाला की शुरुआत शनिवार, 11 अप्रैल को बेहद ही गरिमामय और पारंपरिक तरीके से हुई। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ एसएनएमसी के प्राचार्य (Principal) डॉ. प्रशांत गुप्ता, डॉ. उमा श्रीवास्तव, डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. अपूर्व अभिनंदन मित्तल और एसआईसी डॉ. बृजेश शर्मा ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। दीप प्रज्वलन के बाद अतिथियों और मुख्य वक्ताओं का पुष्पगुच्छ भेंट कर औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान कॉलेज के सभागार में एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विभाग के तमाम वरिष्ठ प्रोफेसर, चिकित्सक और चिकित्सा के छात्र भारी संख्या में मौजूद थे।
कार्यशाला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह था कि एसएनएमसी जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में आने वाले ट्रॉमा (हादसे) के शिकार मरीजों और सर्जरी के बाद वॉर्ड में भर्ती मरीजों को दर्द से तुरंत कैसे राहत पहुंचाई जाए। मेडिकल साइंस यह मानता है कि अगर किसी मरीज का ‘एक्यूट पेन’ (तीव्र दर्द) सही समय पर और सही तरीके से मैनेज नहीं किया गया, तो वह आगे चलकर ‘क्रोनिक पेन’ (पुराने और स्थायी दर्द) में तब्दील हो सकता है, जो जिंदगी भर का नासूर बन जाता है। इसी जटिल समस्या के आधुनिक और वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए इस कार्यशाला की रूपरेखा तैयार की गई थी।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा- ‘मरीज की रिकवरी के लिए दर्द प्रबंधन है संजीवनी’
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसएनएमसी के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने दर्द प्रबंधन (Pain Management) को आधुनिक चिकित्सा का एक अनिवार्य और सबसे संवेदनशील हिस्सा बताया। उन्होंने सभागार में उपस्थित युवा चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा, “आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में दर्द प्रबंधन अब केवल एक विकल्प नहीं रहा, बल्कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्वतंत्र क्षेत्र बन चुका है। जब कोई मरीज भयानक दर्द में हमारे पास आता है, तो उसकी पहली उम्मीद डॉक्टर से यही होती है कि उसे जल्द से जल्द इस पीड़ा से मुक्ति मिले।”
डॉ. गुप्ता ने आगे जोर देते हुए कहा, “तीव्र दर्द के प्रभावी, सटीक और समयबद्ध उपचार से न केवल मरीज को शारीरिक आराम मिलता है, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति भी मजबूत होती है। दर्द कम होने से मरीजों की रिकवरी (स्वस्थ होने की दर) में आश्चर्यजनक रूप से तेजी आती है और उनके जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में भी भारी सुधार होता है। मेडिकल साइंस हर दिन नई तरक्की कर रहा है। ऐसी कार्यशालाएं (Workshops) हमारे चिकित्सकों और रेजिडेंट डॉक्टरों को नवीनतम तकनीकों, अल्ट्रासाउंड-गाइडेड नर्व ब्लॉक्स (Ultrasound-guided Nerve Blocks) और नई उपचार पद्धतियों से अवगत कराने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हमें किताबी ज्ञान के साथ-साथ इन व्यावहारिक और आधुनिक तकनीकों को भी सीखना होगा ताकि हम अपने मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज दे सकें।”
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दिग्गज विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक ‘पेन मैनेजमेंट’ के गुर
इस एक दिवसीय कार्यशाला का सबसे मुख्य आकर्षण ‘गेस्ट लेक्चर्स’ (Guest Lectures) का सत्र था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित अस्पतालों से आए मुख्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार सर गंगाराम अस्पताल (Sir Ganga Ram Hospital) नई दिल्ली के प्रसिद्ध दर्द विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप जैन और डॉ. आदित्य मेहरोत्रा उपस्थित हुए। उनके साथ ही यथार्थ अस्पताल के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने भी इस मंच को साझा किया।
इन दिग्गज विशेषज्ञों ने मल्टीमॉडल एनाल्जेसिया (Multimodal Analgesia), मरीज-नियंत्रित एनाल्जेसिया (PCA Pumps), और सर्जरी के बाद शरीर के विशिष्ट हिस्सों को सुन्न करने वाली अत्याधुनिक ‘नर्व ब्लॉक’ (Nerve Block) तकनीकों पर बहुत ही गहराई और विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे अब दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) पर निर्भरता कम करके, लक्षित (Targeted) उपचार के माध्यम से मरीजों को नशे या दवाओं के साइड-इफेक्ट्स से बचाया जा सकता है। वक्ताओं ने पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन और केस स्टडीज के माध्यम से कई जटिल मामलों के क्लिनिकल अनुभवों को साझा किया, जिसे देखकर वहां मौजूद सभी चिकित्सक दंग रह गए। युवा डॉक्टरों ने विशेषज्ञों से कई तीखे और तकनीकी सवाल भी पूछे, जिनका उन्होंने बहुत ही सरलता और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ संतोषजनक उत्तर दिया।
रेजिडेंट डॉक्टरों के भारी उत्साह के साथ हुआ समापन
एसएन मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में सीखने और सिखाने का एक अद्भुत माहौल देखने को मिला। इस ज्ञानवर्धक अवसर पर कॉलेज की डॉ. अर्पिता सक्सेना, डॉ. राजीव पुरी, डॉ. राजेश गुप्ता और डॉ. ब्रजेश शर्मा सहित विभाग के अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। सबसे ज्यादा उत्साह उन युवा और रेजिडेंट डॉक्टरों (Resident Doctors) में देखा गया, जो दिन-रात एसएनएमसी की ओपीडी, इमरजेंसी और ऑपरेशन थियेटर में मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। उन्होंने इस कार्यशाला से न केवल सैद्धांतिक जानकारी (Theoretical Knowledge) प्राप्त की, बल्कि दर्द प्रबंधन की व्यावहारिक (Practical) बारीकियों को भी समझा जो उनके दैनिक चिकित्सा अभ्यास में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होंगी।
पूरे दिन चले इस गहन और इंटरैक्टिव (Interactive) सत्र के बाद, कार्यशाला का समापन एक भव्य धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks) के साथ किया गया। आयोजकों ने बाहर से आए सभी अतिथि वक्ताओं, प्राचार्य और कार्यक्रम को सफल बनाने वाली पूरी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। एसएनएमसी के मीडिया प्रभारी अधिकारी ने बताया कि भविष्य में भी कॉलेज प्रशासन चिकित्सा विज्ञान के विभिन्न और नए विषयों पर इस तरह की शैक्षिक कार्यशालाओं का आयोजन करता रहेगा, ताकि आगरा और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले लाखों मरीजों को विश्वस्तरीय और सबसे आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। यह कार्यशाला आगरा के चिकित्सा जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है, जो यह संदेश देती है कि दर्द अब कोई मजबूरी नहीं, बल्कि विज्ञान के बल पर जीता जा सकने वाला एक मोर्चा है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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