National Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Tuesday, 26 May 2026, 09:18:44 AM IST

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने गाय काटने की अनुमति दे दी है लेकिन शर्त यह है की गाय 14 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। राजनीतिक हल्कों मे चर्चा गरम थी की नई भाजपा सरकार नियमों मे बदलाव करके गाय के काटने को प्रतिबंधित कर देगी लेकिन उसने पुराने चले या रहे नियम मे कोई बदलाव नहीं किया। आपको बताते चले की हिन्दू समाज इस बात पर चर्चा कर रहा है की हम तो गाय को माता मानते है चाहे उसकी उम्र कितनी भी हो। पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले पशु कटान और गाय कुर्बानी को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। राज्य सरकार द्वारा “West Bengal Animal Slaughter Control Act, 1950” के नियमों को सख्ती से लागू किए जाने के बाद कई पशु बाजारों और व्यापारियों में बेचैनी देखी जा रही है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नए निर्देशों के कारण पशुओं की खरीद-फरोख्त प्रभावित हुई है और व्यापारियों में आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है। इस पूरे विवाद के केंद्र में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है।
बकरीद से पहले बंगाल के कई पशु बाजारों में व्यापार सुस्त पड़ने की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर पशु व्यापारी सरकार के फैसलों को लेकर नाराजगी जताते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो में किए जा रहे सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब बिना सरकारी फिटनेस सर्टिफिकेट के किसी भी गाय या भैंस की कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर पशु कटान पर रोक लगाने और अवैध बूचड़खानों व अवैध पशु बाजारों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि ये नियम पहले से लागू थे, लेकिन अब इन्हें सख्ती से लागू किया जा रहा है।
नियमों के मुताबिक केवल ऐसे पशुओं को अनुमति के बाद काटा जा सकेगा, जिनकी उम्र 14 वर्ष से अधिक हो या जो काम करने में अक्षम हों। प्रशासनिक स्तर पर इस संबंध में जिला अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
पशु व्यापारियों का कहना है कि बकरीद का समय उनके कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण सीजन होता है। ऐसे समय अचानक सख्ती बढ़ने से व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है। कई व्यापारियों ने दावा किया कि बाजारों में खरीदारों की संख्या घटी है और पशुओं की बिक्री प्रभावित हुई है। कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और राज्य सरकार के समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध पशु कटान रोकने के लिए की जा रही है। भाजपा खेमे का दावा है कि सरकार केवल मौजूदा कानूनों को लागू कर रही है। वहीं विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने आरोप लगाया कि धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बकरीद से पहले पशु कटान का मुद्दा बंगाल की राजनीति में नया विवाद बनकर उभरा है। सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर लगातार बहस चल रही है। कई जगहों पर व्यापारियों की नाराजगी और प्रशासनिक सख्ती को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
पश्चिम बंगाल में पहले भी पशु व्यापार और सीमावर्ती इलाकों में अवैध पशु तस्करी को लेकर राजनीतिक विवाद होते रहे हैं। ऐसे में बकरीद से पहले आया यह मुद्दा राज्य की राजनीति और सामाजिक माहौल दोनों पर असर डाल सकता है। फिलहाल प्रशासन ने साफ किया है कि कानून के दायरे में रहकर ही सभी गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी।

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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