Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Saturday, April 11, 2026, 06:15:30 PM IST

मेरठ: एक घर जिसे इंसान अपनी सबसे सुरक्षित पनाहगाह मानता है, जब वही घर एक खौफनाक और सड़ी हुई कब्रगाह में तब्दील हो जाए, तो समाज की आत्मा भी कांप उठती है। उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला और इंसानियत को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। सदर बाजार थाना क्षेत्र के तेली मोहल्ले में एक रिटायर्ड लिपिक (Clerk) अपनी 33 वर्षीय सगी अविवाहित बेटी की लाश के साथ कई महीनों तक उसी घर में चुपचाप रहता रहा। बेटी की मौत किसी रहस्यमय बीमारी या हत्या से नहीं, बल्कि पिता के गहरे अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में तड़प-तड़प कर हुई थी। जब लाश गलने लगी और उसमें से भयंकर बदबू उठने लगी, तो यह मानसिक रूप से विक्षिप्त पिता घर में दर्जनों परफ्यूम और इत्र छिड़ककर उस दुर्गंध को दबाता रहा। फिर एक दिन वह घर के बाहर भारी ताला जड़कर रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। पूरे चार महीने बाद जब वह वापस लौटा और एक चाय की दुकान पर अपने ही भतीजे के सवालों में घिर गया, तब जाकर इस भयानक और सड़े हुए राज से पर्दा उठा। जब पुलिस ने घर का ताला तोड़ा और अंदर दाखिल हुई, तो बिस्तर पर पड़े बेटी के कंकाल को देखकर खाकी वर्दी वालों के भी होश उड़ गए।

बीमारी, अंधविश्वास और एक होनहार शिक्षिका की दर्दनाक मौत
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, इस पूरे खौफनाक घटनाक्रम की शुरुआत पिछले साल अगस्त 2025 में हुई थी। बेसिक शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त लिपिक उदय भानु विश्वास की 33 वर्षीय बेटी प्रियंका विश्वास वेस्ट एंड रोड स्थित एक नामी निजी स्कूल में बतौर शिक्षिका (Teacher) काम करती थी। प्रियंका एक होनहार और अपने पैरों पर खड़ी लड़की थी, लेकिन अगस्त के महीने में उसे ‘काला पीलिया’ (Black Jaundice) जैसी गंभीर बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया। पीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसका अगर सही समय पर मेडिकल इलाज न किया जाए, तो यह इंसान के लिवर को पूरी तरह से डैमेज कर देती है और जानलेवा साबित होती है।

यहीं से इस परिवार की त्रासदी का सबसे दर्दनाक अध्याय शुरू हुआ। आधुनिक युग में रहने और एक पढ़ी-लिखी बेटी का पिता होने के बावजूद, उदय भानु ने डॉक्टरों और बड़े अस्पतालों का रुख करने के बजाय अंधविश्वास का काला और अमानवीय रास्ता चुना। वह अपनी गंभीर रूप से बीमार बेटी को इलाज के लिए मेहताब सिनेमा हॉल के पास रहने वाले एक कथित मौलाना के पास ले जाने लगा। मौलाना के झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के भ्रामक चक्कर में प्रियंका की हालत दिन-ब-दिन तेजी से बिगड़ती चली गई। बीमारी ने उसे शारीरिक रूप से इतना तोड़ दिया कि सितंबर 2025 में उसे मजबूरी में अपनी स्कूल की नौकरी छोड़नी पड़ी। अपनी पोल खुलने और रिश्तेदारों के तानों से बचने के लिए, सनकी पिता उदय भानु ने प्रियंका को घर के एक अंधेरे कमरे में कैद कर दिया और परिवार के अन्य सदस्यों व रिश्तेदारों के घर आने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी। बिना सही इलाज के तड़पते हुए, एक दिन प्रियंका ने उसी बंद कमरे में हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं।
लाश के साथ जीवन: सड़ांध को इत्र और परफ्यूम से दबाने की खौफनाक कोशिश
प्रियंका की मौत के बाद कोई भी सामान्य पिता रोता, बिलखता और अपनी जवान बेटी का हिंदू रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार करता। लेकिन गहरे डिप्रेशन, अकेलेपन और तंत्र-मंत्र के मायाजाल में फंस चुके उदय भानु ने जो किया, वह किसी हॉलीवुड की हॉरर फिल्म की डरावनी स्क्रिप्ट से भी ज्यादा वीभत्स है। उसने अपनी बेटी की मौत की खबर किसी को नहीं दी और शव को उसी बेड पर पड़े रहने दिया। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, प्रियंका का शव सड़ने लगा और उसमें से भयंकर दुर्गंध उठने लगी। लेकिन यह विक्षिप्त पिता उस लाश के साथ उसी घर में खाता, पीता और सोता रहा।

जब शव की सड़ांध बर्दाश्त से बाहर होने लगी और उसे यह डर सताने लगा कि बदबू पड़ोसियों तक पहुंच जाएगी जिससे उसका राज खुल जाएगा, तो उसने एक और घिनौना तरीका अपनाया। वह बाजार से भारी मात्रा में रूम फ्रेशनर, परफ्यूम, डियोड्रेंट और तेज महक वाले इत्र खरीद कर लाने लगा। वह दिन-रात उस सड़ती हुई लाश और कमरे के चारों तरफ परफ्यूम का छिड़काव करता था ताकि सड़ांध को किसी भी तरह से दबाया जा सके। पुलिस को जांच के दौरान उस डरावने कमरे से परफ्यूम की दर्जनों खाली बोतलें बरामद हुई हैं। हद तो तब हो गई जब उसने शव पर पानी बहाना शुरू कर दिया और उसके ऊपर घर का कूड़ा और गंदगी का ढेर लगा दिया ताकि कंकाल को पूरी तरह से छिपाया जा सके। जब यह खौफनाक मंजर भी उसके लिए असहनीय हो गया और मोहल्ले वालों को शक होने लगा, तो वह घर के मुख्य दरवाजे पर एक भारी ताला जड़कर वहां से अनिश्चितकाल के लिए फरार हो गया।
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4 महीने बाद चाय की दुकान पर ऐसे खुला भयानक राज
करीब चार महीनों तक तेली मोहल्ले का वह दो मंजिला मकान एक खौफनाक रहस्य को अपने सीने में दफन किए हुए बंद पड़ा रहा। पड़ोसियों ने भी घर के बाहर लटकता हुआ ताला देखकर यही सोचा कि शायद बाप-बेटी इलाज के लिए किसी दूसरे बड़े शहर या अस्पताल गए होंगे। मोहल्ले वालों को उस सड़ांध की भनक इसलिए नहीं लग पाई क्योंकि घर बंद था और परफ्यूम की तेज महक ने बदबू को बाहर आने से रोक रखा था। लेकिन इस पूरे खूनी तिलिस्म का पर्दाफाश शुक्रवार को तब हुआ, जब आरोपी पिता उदय भानु अचानक बेगमबाग इलाके की एक चाय की दुकान पर चाय पीता हुआ नजर आया। संयोग से वहां से गुजर रहे उसके सगे भतीजे विश्वजीत विश्वास की नजर अपने चाचा पर पड़ गई। विश्वजीत तुरंत उनके पास पहुंचा और अपनी चचेरी बहन (बुआ की बेटी) प्रियंका के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ करने लगा।

उदय भानु के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। उसने अपने भतीजे को गुमराह करने की कोशिश की और पसीना पोछते हुए कहा कि प्रियंका की तबीयत खराब है और वह उसे कभी देहरादून तो कभी गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती कराकर आया है। लेकिन उसके लड़खड़ाते शब्दों और कांपती आवाज ने विश्वजीत के मन में गहरे शक के बीज बो दिए। विश्वजीत ने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों को फोन करके वहां बुला लिया। जब सभी ने मिलकर उदय भानु को घेरा और कड़ाई से पूछताछ की, तो वह मानसिक दबाव नहीं झेल पाया और टूट गया। उसने रोते हुए कबूल किया कि प्रियंका अब इस दुनिया में नहीं है और उसका शव पिछले कई महीनों से तेली मोहल्ले वाले बंद घर के भीतर ही पड़ा है। यह सुनते ही रिश्तेदारों के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्होंने फौरन डायल 112 के जरिए पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी।

बेड पर कंकाल और बाल देख पुलिस के भी उड़े होश
सूचना मिलते ही सीओ सदर कैंट नवीना शुक्ला और सदर बाजार पुलिस की भारी फोर्स तेली मोहल्ला स्थित उस मकान पर पहुंच गई। मोहल्ले में भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने जब हथौड़े से घर का ताला तोड़ा और अंदर दाखिल हुई, तो वहां का दृश्य इतना भयावह और डरावना था कि सख्त दिल वाले और रोज लाशें देखने वाले पुलिसकर्मियों की भी रूह कांप गई। पूरे घर में एक अजीब सी भयंकर सड़ांध और केमिकल (परफ्यूम) की मिली-जुली बदबू आ रही थी। एक कमरे में जब पुलिस ने टॉर्च की रोशनी डाली, तो बेड के ऊपर कूड़े और फटे कपड़ों के ढेर के नीचे प्रियंका का केवल हड्डियों का ढांचा (कंकाल) और सिर के कुछ बिखरे हुए बाल बचे थे। शव का मांस पूरी तरह से गल चुका था और कीड़ों ने उसे अपना निवाला बना लिया था।

तत्काल फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने बड़ी सावधानी से साक्ष्य जुटाए, फोटोग्राफी की और कंकाल को एक बोरे में सील करके पोस्टमार्टम और डीएनए (DNA) जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस ने आरोपी पिता उदय भानु को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान उदय भानु के बयानों में भारी विरोधाभास नजर आ रहा है। कभी वह तंत्र-मंत्र और भूत-प्रेत की बात करता है, तो कभी डिप्रेशन और अकेलेपन की। पुलिस के मुताबिक, इस परिवार का अतीत भी भयंकर त्रासदियों और काले सायों से भरा रहा है। आज से ठीक 13 साल पहले उदय भानु की पत्नी शर्मिष्ठा ने भी इसी घर में रहस्यमय परिस्थितियों में फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी थी। पत्नी की मौत के बाद से ही उदय भानु गहरे मानसिक अवसाद (Depression) और अकेलेपन से जूझ रहा था।

शास्त्रीनगर की खौफनाक यादें ताजा, मनोवैज्ञानिक जांच करेगी पुलिस
मेरठ शहर के लिए यह कोई पहली ऐसी दिल दहलाने वाली घटना नहीं है। कुछ साल पहले मेरठ के ही पॉश इलाके शास्त्रीनगर में भी एक ऐसा ही खौफनाक मामला सामने आया था, जहां एक भाई अपने सगे भाई की मौत के बाद कई दिनों तक उसके शव से लिपटकर सोता रहा था। तेली मोहल्ले की इस घटना ने एक बार फिर शहरवासियों की उस पुरानी डरावनी याद को ताजा कर दिया है। इस घटना ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के प्रति भारी लापरवाही और अंधविश्वास की गहरी जड़ों को बेनकाब कर दिया है। पड़ोसी भी हैरान हैं कि उन्हें भनक तक क्यों नहीं लगी।

पुलिस अब आरोपी पिता की कड़ी मनोवैज्ञानिक जांच (Psychiatric Evaluation) कराने की तैयारी कर रही है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि वह सच में विक्षिप्त हो चुका है या फिर यह सब एक सोची-समझी हत्या की साजिश थी, जिसे बीमारी और तंत्र-मंत्र का जामा पहनाया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वह मौलाना कौन था जिसने काला पीलिया जैसी घातक बीमारी का इलाज करने का झूठा दावा किया था। अगर मौलाना दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल, इस वीभत्स कंकाल कांड ने पूरे मेरठ शहर और प्रदेश को एक गहरे सदमे में धकेल दिया है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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