International Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Wednesday, 27 May 2026, 10:42:31 AM IST

UNESCO Culture Arts Education Week Agra: वैश्विक पटल पर ताजनगरी की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिलने जा रही है। यूनेस्को रीजनल ऑफिस फॉर साउथ एशिया द्वारा आयोजित इस विशेष शैक्षणिक सप्ताह के अंतर्गत आगरा में 30 और 31 मई 2026 को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस आयोजन के दौरान बच्चों के लिए विशेष हेरिटेज किट लॉन्च की जाएगी, जिसका शीर्षक “From Taj Mahal to Taj Ganj: A Pigeon’s Journey through Living Heritage” (ताजमहल से ताजगंज तक: जीवित विरासत की कहानी एक कबूतर की जुबानी) रखा गया है। यह पहल ताजमहल और ताजगंज की जीवंत सांस्कृतिक धरोहरों को नई पीढ़ी तक रचनात्मक तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है, ताकि बच्चे अपनी ऐतिहासिक जड़ों से सहजता से जुड़ सकें।
प्रोफेसर्स कॉलोनी स्थित संस्कृति भवन में होगा मुख्य आयोजन, स्थानीय कारीगरों और बच्चों के बीच सजेगा संवाद
यूनेस्को द्वारा जारी किए गए आधिकारिक निमंत्रण पत्र और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 30 मई 2026 को सुबह 11 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आगरा के प्रोफेसर्स कॉलोनी, पुष्प विहार कॉलोनी स्थित संस्कृति भवन (30/28) में उद्घाटन समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस सत्र में आगरा नगर निगम की महापौर हेमलता दिवाकर और नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। दोनों अधिकारी संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की शुरुआत करेंगे।
उद्घाटन सत्र के तुरंत बाद इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यानी बच्चों के लिए तैयार की गई “DIY सांस्कृतिक विरासत किट” को आम जनता के सामने लाया जाएगा। इस किट को विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चे खेल-खेल में ताजमहल और उसके आसपास के ताजगंज क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें। कार्यक्रम में उपस्थित यूनेस्को के अधिकारियों ने बताया कि इस किट में चित्रकला, स्थानीय हस्तशिल्प की बारीक जानकारियां और पारंपरिक कहानियों को शामिल किया गया है, जिससे बच्चों का जुड़ाव अपनी मिट्टी से और गहरा हो सके।
कबूतर की जुबानी सुनी जाएगी ताजमहल से ताजगंज की कहानी, बच्चों के लिए रचनात्मक शिक्षण सत्र
इस आयोजन का एक और मुख्य आकर्षण “ए पिजन्स जर्नी” यानी एक कबूतर की यात्रा पर आधारित स्टोरीटेलिंग सेगमेंट होगा। इसमें एक प्रतीकात्मक कबूतर के माध्यम से बच्चों को ताजमहल के निर्माण से लेकर आज के ताजगंज की जीवंत कला संस्कृति और वहां रहने वाले कारीगरों के जीवन की ऐतिहासिक गाथा सुनाई जाएगी। यूनेस्को का मानना है कि पारंपरिक किताबी ज्ञान से हटकर कहानियों और दृश्यों के माध्यम से किया गया यह अनुभवात्मक शिक्षण बच्चों के मानसिक विकास में अधिक प्रभावी साबित होता है।
कहानियों के इस दौर के बाद मंच पर स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों और बच्चों के बीच एक खुला संवाद सत्र भी आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चे पुराने शहर की कला विधाओं के बारे में सीधे कारीगरों से सवाल पूछ सकेंगे। दोपहर 1:30 बजे से 3:30 बजे तक संस्कृति भवन के क्लासरूम में पंजीकृत बच्चों और शिक्षकों के लिए एक क्रिएटिव लर्निंग सेशन का संचालन किया जाएगा, जिसमें कला और सांस्कृतिक मॉडल निर्माण से जुड़ी व्यावहारिक गतिविधियां कराई जाएंगी।
दूसरे दिन दयालबाग के ‘एक पहल एनजीओ’ में जुटेगा शिक्षकों का जमावड़ा, क्षमता विकास पर होगी विशेष कार्यशाला
कार्यक्रम के दूसरे दिन यानी 31 मई 2026 को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक दयालबाग स्थित खेलगांव स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास, 9 जीवराम आश्रम परिसर में संचालित ‘एक पहल एनजीओ’ में विशेष सत्र का आयोजन किया जाएगा। इस सत्र में भाग लेने वाले शिक्षकों और मार्गदर्शकों (फैसिलिटेटर्स) के लिए एक ओरिएंटेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप रखी गई है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को यह सिखाना है कि वे स्कूलों में बच्चों को बोरियत के बिना, रचनात्मक तरीकों से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति कैसे जागरूक कर सकते हैं।
यूनेस्को के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, आगरा जैसे ऐतिहासिक और वैश्विक महत्व वाले शहर में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन होना ताजगंज के स्थानीय समुदाय और वहां की जीवंत विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया आयाम देगा। आयोजन समिति ने प्रबुद्ध नागरिकों और शिक्षाविदों से इस आयोजन से जुड़ने की अपील की है। कार्यक्रम से जुड़ी किसी भी प्रकार की विस्तृत तकनीकी जानकारी या भागीदारी के लिए यूनेस्को की आधिकारिक ईमेल आईडी पर संपर्क किया जा सकता है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, [tajnews.in](https://tajnews.in)
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