PM मोदी और राहुल गांधी आमने-सामने: सियासी दुश्मनी के बीच संसद में दिखी मुस्कुराती तस्वीर

National Desk, tajnews.in | Saturday, April 11, 2026, 12:40:30 PM IST

Taj News Logo
Taj News
National Desk

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के अखाड़े में अक्सर तीखे आरोप-प्रत्यारोप और कड़वाहट ही सुर्खियां बटोरते हैं। लेकिन जब इसी अखाड़े के दो सबसे बड़े धुरंधर अपने वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर एक-दूसरे के सामने मुस्कुराते हुए खड़े नजर आएं, तो वह तस्वीर न केवल सुकून देती है, बल्कि लोकतंत्र की असली खूबसूरती को भी बयां करती है। शनिवार को संसद भवन परिसर में कुछ ऐसा ही दुर्लभ और दिल जीत लेने वाला नजारा देखने को मिला। अवसर था महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती का। इस पावन मौके पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आमने-सामने आए, तो दोनों के बीच कोई सियासी तल्खी नहीं, बल्कि एक गर्मजोशी भरा शिष्टाचार देखने को मिला। दोनों दिग्गजों ने हाथ जोड़कर एक-दूसरे का अभिवादन किया और उनके चेहरों पर एक सहज मुस्कान तैर गई। पांच राज्यों के भयंकर चुनावी घमासान के बीच आई इस ‘पॉजिटिव तस्वीर’ ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी है। देश भर के राजनीतिक विश्लेषक और आम जनता इस शिष्टाचार की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यह एक ऐसा क्षण था जिसने यह साबित कर दिया कि राजनीति में लड़ाई विचारधारा की होती है, व्यक्तिगत दुश्मनी की नहीं।

HIGHLIGHTS
  1. संसद में दुर्लभ तस्वीर: महात्मा फुले की 200वीं जयंती पर संसद परिसर में पीएम मोदी और राहुल गांधी आमने-सामने आए।
  2. गर्मजोशी से हुआ अभिवादन: दोनों शीर्ष नेताओं ने हाथ जोड़कर एक-दूसरे का अभिवादन किया और चेहरे पर मुस्कान के साथ संक्षिप्त बातचीत की।
  3. चुनावी माहौल में सुकून: पांच राज्यों के तीखे चुनावी घमासान के बीच इस सौहार्दपूर्ण मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में एक सकारात्मक संदेश दिया है।
  4. सोशल मीडिया पर वायरल: पीएम मोदी और राहुल गांधी की यह तस्वीर इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसकी आम जनता जमकर तारीफ कर रही है।
PM Modi and Rahul Gandhi meet at Parliament

प्रेरणा स्थल पर महात्मा फुले को नमन और वो ‘वायरल’ मुलाकात

शनिवार की सुबह राजधानी दिल्ली का मौसम हमेशा की तरह सामान्य था, लेकिन संसद परिसर के अंदर की आबोहवा में एक खास तरह की शांति और सम्मान का भाव था। संसद भवन के भीतर स्थित ‘प्रेरणा स्थल’ पर देश के महान विचारक, दार्शनिक और समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस गरिमामय कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश सहित कई अन्य गणमान्य नेता पहले से ही उपस्थित थे। इसी दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पहुंचे।

कुछ ही पलों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला भी प्रेरणा स्थल पर पहुंचा। जैसे ही प्रधानमंत्री अपनी गाड़ी से नीचे उतरे, वहां मौजूद सभी नेताओं ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया। इसी कतार में राहुल गांधी भी खड़े थे। जब प्रधानमंत्री मोदी राहुल गांधी के करीब से गुजरे, तो राहुल ने पूरे आदर और शिष्टाचार के साथ दोनों हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। प्रधानमंत्री ने भी बिना किसी झिझक के, पूरी गर्मजोशी और उसी सम्मान के साथ हाथ जोड़कर राहुल गांधी का अभिवादन स्वीकार किया। न्यूज़ एजेंसियों द्वारा जारी किए गए वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की आंखों में देखा, मुस्कुराए और कुछ पल के लिए एक संक्षिप्त बातचीत भी की। हालांकि यह बातचीत क्या थी, यह स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन उनके चेहरों की सहजता बता रही थी कि संसद के भीतर की तीखी बहसें उस पल के लिए पूरी तरह से भुला दी गई थीं।

चुनावी घमासान के बीच शिष्टाचार की ठंडी बयार

इस मुलाकात की टाइमिंग और इसका महत्व इसलिए भी बहुत बड़ा है क्योंकि वर्तमान में पूरे देश का राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है। केरल, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे पांच प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनावों का महासंग्राम चल रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही खेमे हर दिन चुनावी रैलियों में एक-दूसरे पर शब्दों के तीखे बाण छोड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी हर जनसभा में कांग्रेस के दशकों पुराने शासन और नीतियों को कठघरे में खड़ा करते हैं, तो वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी भी ‘संविधान खतरे में है’ और ‘पूंजीपतियों की सरकार’ जैसे नारों के साथ मोदी सरकार पर करारे प्रहार कर रहे हैं।

ऐसी भयंकर चुनावी गहमागहमी और राजनीतिक ध्रुवीकरण (Polarization) के बीच इन दोनों शीर्ष नेताओं का इतनी शालीनता से मिलना एक बेहद गहरा संदेश देता है। यह तस्वीर देश के उन करोड़ों युवा और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी सीख है, जो अक्सर वैचारिक विरोध को अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी और नफरत में बदल लेते हैं। सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को गालियां देने वाले या रैलियों में हिंसक होने वाले कार्यकर्ताओं को यह समझना चाहिए कि जब उनके सबसे बड़े नेता एक मंच पर आकर एक-दूसरे का सम्मान कर सकते हैं, तो सड़क पर लड़ने का क्या औचित्य है? यह स्वस्थ लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है कि विचारों की लड़ाई वैचारिक मंच पर लड़ी जाए, न कि व्यक्तिगत कटुता में।

यह भी पढ़ें

महात्मा फुले की 200वीं जयंती: समानता और शिक्षा का पर्व

संसद भवन परिसर में नेताओं के इस तरह एकजुट होने का मुख्य कारण महात्मा ज्योतिबा फुले का महान व्यक्तित्व और उनका वह योगदान था जिसने भारत की सामाजिक संरचना को बदलकर रख दिया। 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र में जन्मे महात्मा फुले ने अपना पूरा जीवन छुआछूत, जातिवाद और लैंगिक असमानता के खिलाफ लड़ने में खपा दिया। 1848 में उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल खोला था, जो उस दौर के समाज में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम था। इसके बाद उन्होंने ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की और ‘गुलामगिरी’ जैसी कालजयी पुस्तक लिखकर शोषित और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज को बुलंद किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक प्रेरणादायक पोस्ट भी किया। पीएम मोदी ने लिखा, “महान समाज सुधारक महात्मा फुले के 200वीं जयंती वर्ष के शानदार समारोहों का आज से आरंभ हो रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञान और जन कल्याण को पूरी तरह समर्पित कर दिया। उनका संपूर्ण जीवन समानता और न्याय के उच्च आदर्शों का एक जीता-जागता उदाहरण है।” पीएम मोदी का यह संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि आधुनिक और विकसित भारत के निर्माण में महात्मा फुले के विचार आज भी कितने प्रासंगिक और अहम हैं। संसद में सभी दलों के नेताओं का उनके सम्मान में एक साथ आना यह दिखाता है कि देश के महापुरुष किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा विरासत होते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर, जनता ने कहा- ‘यही है असली लोकतंत्र’

पीएम मोदी और राहुल गांधी की यह मुलाकात जैसे ही न्यूज़ एजेंसियों के कैमरों में कैद हुई, यह इंटरनेट पर ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ बन गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह वीडियो और तस्वीरें जंगल की आग की तरह फैल गईं। आम जनता, पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक इस तस्वीर को लेकर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि “चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन देश के नेताओं के बीच यह शिष्टाचार और मुस्कान हमेशा बनी रहनी चाहिए।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “लोकतंत्र में अपने सबसे बड़े विरोधी का सम्मान करना ही एक सच्चे नेता की सबसे बड़ी पहचान होती है।”

पिछले कुछ वर्षों में टीवी डिबेट्स और चुनावी रैलियों में जिस तरह से भाषा का स्तर गिरा है और कड़वाहट बढ़ी है, उसे देखते हुए यह तस्वीर एक ठंडी हवा के झोंके जैसी है। यह घटना साबित करती है कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी और परिपक्व हैं। हमारी संसद केवल शोर-शराबे और वॉकआउट का मंच नहीं है, बल्कि यह वह पवित्र मंदिर है जहां राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है। जब देश के दो सबसे बड़े नेता आपस में मुस्कराकर बात करते हैं, तो इसका सीधा असर जनता के मनोविज्ञान पर पड़ता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनका विश्वास और भी मजबूत होता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद के बाहर दिखा यह राजनीतिक सौहार्द, संसद के भीतर होने वाली आगामी बहसों में और पांच राज्यों के चुनावी मैदान में कितना बरकरार रह पाता है।

#PMModi #RahulGandhi #JyotibaPhule #IndianDemocracy #ParliamentOfIndia #PoliticalHarmony #TajNews #BreakingNewsHindi #TrendingNews #Elections2026

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Editor in Chief, Taj News

1 thought on “PM मोदी और राहुल गांधी आमने-सामने: सियासी दुश्मनी के बीच संसद में दिखी मुस्कुराती तस्वीर”

Leave a Comment