Agra Desk, tajnews.in | Friday, April 10, 2026, 03:30:15 PM IST

आगरा: ताजनगरी आगरा की सड़कें एक बार फिर खून से लाल हो गई हैं, लेकिन इस बार मामला किसी आम सड़क दुर्घटना का नहीं, बल्कि एक बेहद खौफनाक और सुनियोजित हत्या की साजिश का लग रहा है। आगरा के थाना शाहगंज इलाके के मल्ल का चबूतरा मार्ग पर एक जाने-माने ट्रांसपोर्टर असगर अली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पुलिस को शुरुआत में यह एक साधारण हिट-एंड-रन (Hit and Run) का मामला लगा था, लेकिन जब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, तो जो सच सामने आया उसने तेज-तर्रार पुलिस अधिकारियों के भी रोंगटे खड़े कर दिए। फुटेज में साफ दिख रहा है कि एक तेज रफ्तार कार ने असगर अली को सिर्फ टक्कर नहीं मारी, बल्कि उन्हें बहुत ही बेरहमी से रौंदते हुए निकल गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर जीएसटी (GST) और नगर निगम के अधिकारियों पर हत्या की खौफनाक साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तीन विशेष टीमों का गठन कर दिया है और कातिलाना कार की पहचान भी कर ली गई है।
सीसीटीवी फुटेज ने खोले खौफनाक राज: ब्रेक नहीं, एक्सीलेटर दबाया गया
थाना शाहगंज के मल्ल का चबूतरा मार्ग पर अमूमन भारी ट्रैफिक रहता है। असगर अली वहां सड़क के किनारे मौजूद थे, तभी पीछे से एक सफेद रंग की तेज रफ्तार कार आती है। अगर यह एक सामान्य सड़क दुर्घटना होती, तो ड्राइवर घबराहट में ब्रेक लगाने की कोशिश करता या गाड़ी को मोड़ने का प्रयास करता। लेकिन पुलिस के हाथ जो सीसीटीवी फुटेज लगा है, वह एक बिल्कुल अलग और भयानक कहानी बयां कर रहा है। फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कार के ड्राइवर ने असगर अली को देखने के बाद ब्रेक लगाने के बजाय गाड़ी की रफ्तार और तेज कर दी। कार सीधे असगर अली को जोरदार टक्कर मारती है और उन्हें कुचलते हुए बिना रुके वहां से तेजी से फरार हो जाती है।
इस सीसीटीवी फुटेज को देखने के बाद किसी के मन में भी यह संदेह नहीं रह जाता कि यह महज एक इत्तेफाक था। यह पूरी तरह से एक ‘टार्गेटेड हिट’ (Targeted Hit) यानी किसी को जानबूझकर मौत के घाट उतारने का क्रूर तरीका लग रहा है। घटना के तुरंत बाद सड़क पर खून ही खून फैल गया और आसपास मौजूद राहगीरों में चीख-पुकार मच गई। लहूलुहान और गंभीर रूप से घायल असगर अली को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके के लोगों में भारी गुस्सा और दहशत का माहौल है, क्योंकि जिस बेखौफ अंदाज में हत्यारे ने बीच सड़क पर इस वारदात को अंजाम दिया है, वह कानून व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा तमाचा है।
परिजनों का भयंकर आरोप: जीएसटी और नगर निगम के अधिकारियों पर उठी उंगली
असगर अली की मौत की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची, वहां कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजनों ने जब अस्पताल और बाद में पुलिस थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई, तो उनके बयानों ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। परिजनों ने साफ शब्दों में कहा है कि असगर अली की किसी आम सड़क दुर्घटना में मौत नहीं हुई है, बल्कि उन्हें एक बहुत बड़ी साजिश के तहत रास्ते से हटाया गया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि परिजनों ने इस कथित हत्या के पीछे जीएसटी (Goods and Services Tax) विभाग और नगर निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का हाथ होने का शक जताया है।
ट्रांसपोर्ट के व्यापार में अक्सर माल की आवाजाही, टैक्स, और टोल को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ टकराव की स्थितियां बनती रहती हैं। परिजनों का आरोप है कि असगर अली एक ईमानदार ट्रांसपोर्टर थे और वह विभाग में चल रहे किसी बड़े भ्रष्टाचार या अवैध वसूली के सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनका मानना है कि कुछ सफेदपोश अधिकारियों को असगर अली से खतरा महसूस होने लगा था और इसी कारण भाड़े के गुंडों के जरिए एक सड़क हादसे की आड़ में उन्हें हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया। यह आरोप इतना गंभीर है कि पुलिस अब इस पूरे मामले को केवल एक एक्सीडेंट के नजरिए से नहीं, बल्कि एक हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री के तौर पर देख रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या असगर अली ने हाल ही में किसी अधिकारी के खिलाफ कोई आरटीआई (RTI) लगाई थी या कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
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पुलिस का महा-एक्शन: कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाल रही 3 विशेष टीमें
परिजनों द्वारा लगाए गए इन बेहद गंभीर आरोपों और सीसीटीवी फुटेज की भयावहता को देखते हुए आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए मामले की जांच तेज कर दी है। शाहगंज थाने में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस के आला अधिकारियों ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए क्राइम ब्रांच और सर्विलांस सेल की तीन विशेष टीमों को मैदान में उतार दिया है। पुलिस के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि स्मार्ट सिटी के कैमरों की मदद से उस ‘किलर कार’ की पहचान कर ली गई है जिससे असगर अली को रौंदा गया था। अब पुलिस कार के नंबर के आधार पर उसके मालिक और उस दिन कार चला रहे ड्राइवर की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
इसके साथ ही, सर्विलांस टीम मृतक असगर अली के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है। पुलिस यह जानना चाहती है कि हत्या से ठीक पहले उनकी किससे बात हुई थी? क्या उन्हें किसी अनजान नंबर से धमकियां मिल रही थीं? या फिर उन्हें साजिश के तहत फोन करके मल्ल का चबूतरा मार्ग पर बुलाया गया था? इन सभी सवालों के जवाब उस ड्राइवर की गिरफ्तारी के बाद ही मिल पाएंगे। पुलिस उन विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी अंदरखाने जांच कर रही है जिनका नाम परिजनों ने अपनी शिकायत में लिया है। अगर पुलिस की जांच में यह साबित हो जाता है कि इस हत्या के पीछे सफेदपोश अधिकारियों का हाथ है, तो यह आगरा के प्रशासनिक ढांचे में एक बहुत बड़ा भूचाल ला देगा।
व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश: न्याय की गुहार और बढ़ते अपराधों पर सवाल
असगर अली की मौत केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि इस घटना ने आगरा के पूरे ट्रांसपोर्ट यूनियन और व्यापारी वर्ग को भीतर तक हिला कर रख दिया है। व्यापारियों का कहना है कि अगर दिनदहाड़े बीच सड़क पर किसी कारोबारी को इस तरह से कुचल कर मार दिया जाए और उसे हादसा साबित करने की कोशिश की जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपने व्यापार को निडर होकर कैसे चला पाएगा? स्थानीय ट्रांसपोर्ट यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस जल्द से जल्द असली हत्यारों और इस साजिश के पीछे छिपे ‘मास्टरमाइंड’ को गिरफ्तार नहीं करती है, तो वे सड़कों पर उतरकर विशाल धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
व्यापारियों का साफ कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की इस तरह से निर्मम हत्या कर देना गुंडाराज की पराकाष्ठा है। यह घटना कानून व्यवस्था की उस खोखली तस्वीर को उजागर करती है, जहां अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम देते हैं और पुलिस लकीर पीटती रह जाती है। अब पूरा शहर इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या आगरा पुलिस उस ‘किलर कार’ के ड्राइवर को पकड़कर इस खौफनाक साजिश से पर्दा उठा पाएगी, या फिर एक और मासूम व्यापारी की जान किसी फाइल में एक अनसुलझी पहेली बनकर हमेशा के लिए दफन हो जाएगी। पुलिस पर इस वक्त निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने का बहुत भारी दबाव है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली से भी जुड़ चुका है।

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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