Agra Desk, tajnews.in | Tuesday, May 12, 2026, 08:02:07 PM IST

नीट 2026 (NEET 2026) परीक्षा रद्द होने से पूरे देश के छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के इस फैसले ने लाखों मेडिकल छात्रों की नींद पूरी तरह उड़ा दी है। छात्रों ने डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा करने के लिए कई वर्षों तक दिन-रात कड़ी मेहनत की थी। अब उन्हें दोबारा से किताबों के उसी जंजाल और भारी मानसिक तनाव में जाना होगा। उत्तर प्रदेश के आगरा में भी छात्रों और अभिभावकों के बीच गहरी निराशा छाई हुई है। प्रमुख कोचिंग संस्थान मोशन एकेडमी के विशेषज्ञों ने इस फैसले के दूरगामी और गंभीर नुकसान गिनाए हैं। डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दोबारा परीक्षा की बात से छात्रों का आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका है। इसके साथ ही, दूसरे शहरों में रहकर तैयारी करने वाले छात्रों के अभिभावकों पर अब भारी आर्थिक बोझ भी पड़ेगा।
नीट 2026 परीक्षा रद्द: लाखों छात्रों के सपनों पर फिरा पानी
देश भर के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का सपना देखने वाले लाखों छात्रों को एक बहुत बड़ा और करारा झटका लगा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अचानक नीट 2026 परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का कड़ा ऐलान कर दिया। सरकार ने यह बड़ा फैसला बहुत ही जल्दबाजी में लिया है। इसके चलते, देश भर के युवा छात्रों में भारी बेचैनी और गुस्सा पनप गया है। मेडिकल की इस कठिन प्रवेश परीक्षा को पास करने के लिए छात्र कई वर्षों तक अपना खून-पसीना एक करते हैं। वे अपनी नींद, आराम और परिवार के साथ बिताए जाने वाले अमूल्य समय का पूरा बलिदान कर देते हैं। परीक्षा रद्द होने की यह दुखद खबर सुनते ही वे पूरी तरह अंदर से टूट गए हैं। ताज न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के आगरा में भी सभी प्रमुख कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलों में भारी सन्नाटा पसरा हुआ है।
छात्रों ने अपनी पूरी मानसिक और शारीरिक ताकत लगाकर इस अहम परीक्षा की तैयारी की थी। उन्होंने परीक्षा हॉल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया था। हालांकि, अब उन्हें दोबारा उसी मुश्किल और तनावपूर्ण दौर से गुजरना पड़ेगा। उन्हें फिर से वही मोटी किताबें पढ़नी पढ़ेंगी और उन्हीं तनावपूर्ण रातों का डटकर सामना करना पड़ेगा। इन सब वजहों से उनका मनोबल बहुत ज्यादा गिर गया है। कई छात्र अपने हॉस्टल के कमरों से बाहर निकलना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। वे गहरे मानसिक अवसाद (Depression) की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। सिस्टम के एक छोटे से फैसले ने उनके सुनहरे भविष्य के सामने अनिश्चितता की एक बहुत बड़ी दीवार खड़ी कर दी है।
डॉ. अरुण शर्मा ने गिनाईं छात्रों की 6 बड़ी परेशानियों

इस गंभीर और ज्वलंत विषय पर शिक्षा जगत के कई बड़े विशेषज्ञों ने अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित मोशन एकेडमी के डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा ने इस मुद्दे पर बहुत ही बेबाक और स्पष्ट राय रखी। उन्होंने बताया कि इस एक फैसले ने मासूम छात्रों को कई मोर्चों पर एक साथ गहरी चोट पहुंचाई है। डॉ. अरुण शर्मा ने प्रमुख रूप से छह बड़ी परेशानियों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने सबसे पहले छात्रों के लगातार बढ़ते मानसिक तनाव और डिप्रेशन की बात कही। उन्होंने बताया कि छात्र अचानक आए इस फैसले के सदमे को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने जो कड़ी मेहनत की थी, वह अब पूरी तरह से मिट्टी में मिल चुकी है।
डॉ. अरुण शर्मा ने छात्रों के टूटते आत्मविश्वास पर भी अपना विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोबारा उसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना किसी भी सामान्य छात्र के लिए बहुत मुश्किल काम होता है। इससे उनके भीतर असफलता का एक अनजाना डर पैदा हो गया है। वे हर पल यही सोचने लगे हैं कि क्या वे दोबारा वैसा ही शानदार प्रदर्शन कर पाएंगे। इसके साथ ही, डॉ. शर्मा ने काउंसलिंग प्रक्रिया और पूरे मेडिकल सेशन में होने वाली भारी देरी पर भी अपनी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा दोबारा होने से एडमिशन प्रक्रिया कई महीने पीछे खिसक जाएगी। छात्रों का एक पूरा कीमती साल अब बर्बाद होने की कगार पर आ खड़ा हुआ है।
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अभिभावकों पर बढ़ा भारी आर्थिक और मानसिक बोझ
नीट परीक्षा रद्द होने का बुरा असर केवल छात्रों तक ही सीमित नहीं रहा है। इस फैसले ने छात्रों के माता-पिता की भी रातों की नींद पूरी तरह से छीन ली है। डॉ. अरुण शर्मा ने आर्थिक बोझ का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और कड़वा बिंदु उठाया है। हमारे देश में लाखों छात्र अपने छोटे गांवों और कस्बों से निकलकर बड़े शहरों में तैयारी करते हैं। वे आगरा, कोटा या दिल्ली जैसे शहरों में महंगे हॉस्टल और पेइंग गेस्ट (PG) में भारी किराया देकर रहते हैं। उनके माता-पिता बड़ी मुश्किल से अपनी खून-पसीने की कमाई से उनके रहने और खाने का खर्च उठाते हैं। कुछ गरीब अभिभावक तो बैंक से महंगा लोन लेकर अपने बच्चों को कोचिंग पढ़ाते हैं।
परीक्षा रद्द होने के कारण अब छात्रों को कई और महीनों तक उन महंगे शहरों में ही रुकना पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप, अभिभावकों को हॉस्टल का किराया और कोचिंग की एक्स्ट्रा फीस दोबारा से भरनी पड़ेगी। मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह एक बहुत बड़ा और असहनीय आर्थिक झटका है। कई परिवारों ने पहले ही अपनी जीवन भर की जमापूंजी इस पढ़ाई पर खर्च कर दी थी। अब उनके सामने एक बहुत बड़ा आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। इसके अलावा, वे अपने बच्चों की बिगड़ती मानसिक स्थिति को लेकर भी दिन-रात गहरे तनाव में जी रहे हैं।
ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ घोर अन्याय
डॉ. अरुण शर्मा ने एक और बेहद कड़वी सच्चाई की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में लाखों छात्रों ने पूरी ईमानदारी से अपनी मेहनत का शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने किसी भी तरह की कोई नकल या अनुचित साधन का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया। हालांकि, अब कुछ मुट्ठी भर बेईमान लोगों की गलती की सजा सभी ईमानदार छात्रों को भी बराबर भुगतनी पड़ रही है। यह उन मेहनती छात्रों के साथ एक बहुत बड़ा और क्रूर अन्याय है। वे सभी छात्र आज खुद को बिल्कुल ठगा हुआ और हारा हुआ महसूस कर रहे हैं।
इस फैसले ने देश की पूरी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर अत्यंत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता अब छात्रों की नजरों में पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। छात्र और उनके अभिभावक अब NTA के किसी भी दावे पर बिल्कुल भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। उनका मानना है कि एक इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की संस्था परीक्षा को सुरक्षित रूप से आयोजित कराने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। सिस्टम की इन बड़ी खामियों का खामियाजा उन निर्दोष छात्रों को क्यों भुगतना पड़े, जिन्होंने सिर्फ अपनी किताबों से ही दोस्ती की थी।
सोशल मीडिया पर फूटा छात्रों का भारी गुस्सा
परीक्षा रद्द होने की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर एक बहुत बड़ा तूफान आ गया। छात्र समुदाय में सरकार और NTA को लेकर भारी नाराजगी और गुस्सा साफ देखा जा रही है। हजारों छात्रों ने ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपना दर्द और आक्रोश खुलेआम बयां किया है। वे हैशटैग चलाकर सरकार से तीखे और चुभने वाले सवाल पूछ रहे हैं। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर बहुत ही भावुक संदेश लिखे हैं। उन्होंने कहा कि “हर साल दिन-रात खून-पसीना एक करके मेहनत छात्र करें और गलती हमेशा भ्रष्ट सिस्टम की हो, यह सरासर अन्याय है।”
छात्रों का यह भारी गुस्सा पूरी तरह से जायज है। वे इंटरनेट पर अपने लंबे संघर्ष की दर्दनाक कहानियां साझा कर रहे हैं। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने परीक्षा वाले दिन कितनी भयंकर गर्मी और परेशानी का सामना किया था। अब उन्हें वह सब कुछ दोबारा से सहना पड़ेगा। कुछ उग्र छात्र संगठनों ने तो सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन करने की भी खुली चेतावनी दे दी है। वे मांग कर रहे हैं कि सिस्टम के उन भ्रष्ट अधिकारियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, जिनकी लापरवाही की वजह से यह अहम परीक्षा रद्द करनी पड़ी है।
विशाल शर्मा की सलाह: खुद पर रखें नियंत्रण, शुरू करें तैयारी
इस बेहद मुश्किल और तनावपूर्ण घड़ी में छात्रों को सही और सकारात्मक मार्गदर्शन की बहुत ज्यादा जरूरत है। मोशन एकेडमी के जॉइंट डायरेक्टर विशाल शर्मा ने छात्रों को एक बहुत ही अहम सलाह दी है। उन्होंने छात्रों से भावुक अपील की है कि वे इस दुखद स्थिति में खुद पर पूरा नियंत्रण रखें। उन्होंने कहा कि गुस्सा और हताशा किसी भी बड़ी समस्या का स्थायी समाधान बिल्कुल नहीं हैं। विशाल शर्मा ने छात्रों को समझाया कि वर्तमान हालात उनके पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन उन्हें हार नहीं माननी चाहिए।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपना धैर्य बिल्कुल न खोएं। इसके बजाय, वे तुरंत अपनी नीट की तैयारी पूरे जोश के साथ दोबारा से शुरू कर दें। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इसे खुद को साबित करने के एक और बड़े मौके के रूप में देखें। जिन विषयों में उन्हें थोड़ी बहुत कमी महसूस हुई थी, वे अब उन्हें और भी ज्यादा मजबूत कर सकते हैं। मोशन एकेडमी भी इस कठिन समय में छात्रों की पूरी मदद करेगा। वे छात्रों के लिए विशेष डाउट सेशन (Doubt Session) और तनाव दूर करने के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था कर रहे हैं।
डॉ. सुजाता शर्मा की अपील: सरकार और NTA पर रखें भरोसा
मोशन एकेडमी की जनरल मैनेजर डॉ. सुजाता शर्मा ने भी इस गंभीर मुद्दे पर अपना अहम बयान जारी किया है। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा मंडल के हजारों छात्र-छात्राओं से एक भावुक अपील की। डॉ. सुजाता शर्मा ने कहा कि यह समय बहुत ही कठिन है और यह छात्रों की परीक्षा की असली घड़ी है। छात्रों को सिस्टम पर अपना भरोसा बिल्कुल नहीं खोना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे सरकार और NTA की कार्यप्रणाली पर अपना विश्वास बनाए रखें।
दूसरी तरफ, सरकार और NTA भी इस पूरे मामले में अपना बचाव कर रहे हैं। सरकारी अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने यह कड़ा निर्णय बहुत ही भारी मन से लिया है। वे परीक्षा की पूर्ण पारदर्शिता और पवित्रता को हर हाल में बनाए रखना चाहते हैं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के सभी छात्रों के साथ पूरा और समान न्याय हो। किसी भी बेईमान छात्र को गलत तरीके से डॉक्टर बनने का मौका बिल्कुल नहीं दिया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी पक्का भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही री-एग्जाम (Re-Exam) की नई तारीख की आधिकारिक घोषणा करेंगे। तब तक छात्रों को केवल अपनी पढ़ाई पर ही पूरा फोकस करना चाहिए।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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