UP Cabinet Expansion: योगी कैबिनेट का दूसरा विस्तार आज, दोपहर 3:30 बजे 6 नए मंत्री लेंगे शपथ

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Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Sunday, May 10, 2026, 04:20:05 AM IST

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बेहद अहम होने जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार पर लंबे समय से चल रही अटकलें अब पूरी तरह खत्म हो गई हैं। रविवार दोपहर ठीक 3:30 बजे जनभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल कुल छह नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को ही राज्यपाल से मिलकर पूरी रूपरेखा तय कर ली थी। पार्टी ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जातीय समीकरण साधने की पूरी कोशिश की है। इसी कड़ी में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सपा के बागी नेता मनोज पांडेय का मंत्री बनना लगभग तय है। इसके अलावा पूजा पाल और कृष्णा पासवान भी कैबिनेट का हिस्सा बन सकती हैं।

विस्तार के मुख्य बिंदु
  • आज होगा शपथ ग्रहण: योगी कैबिनेट का दूसरा विस्तार रविवार दोपहर 3:30 बजे जनभवन में संपन्न होगा।
  • छह नए मंत्री: संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार खाली पड़े सभी छह मंत्री पदों को पार्टी आज भर लेगी।
  • जातीय समीकरण पर जोर: 2027 के चुनावों के लिए ब्राम्हण, जाट, दलित और ओबीसी वोट बैंक को पार्टी साधेगी।
  • संभावित बड़े नाम: भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय, पूजा पाल, सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान और हंसराज विश्वकर्मा शपथ लेंगे।

योगी कैबिनेट का दूसरा विस्तार: खत्म हुआ इंतजार

उत्तर प्रदेश की सत्ता के गलियारों में पिछले कई महीनों से कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं चल रही थीं। राजनीतिक पंडित लगातार नए मंत्रियों के नामों पर अपनी अपनी अटकलें लगा रहे थे। आखिरकार पार्टी आलाकमान ने इन सभी अटकलों पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया है। रविवार को योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार करेगी। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, राजभवन ने इस शपथ ग्रहण समारोह के लिए पूरी तैयारियां कर ली हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए हैं। जनभवन में रविवार दोपहर ठीक 3:30 बजे यह भव्य समारोह आयोजित होगा। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल सभी नए मंत्रियों को उनके पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी।

इस बड़े राजनीतिक फेरबदल से ठीक एक दिन पहले बड़ी हलचल देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को जनभवन जाकर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से विशेष मुलाकात की। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। इसी मुलाकात के दौरान शपथ ग्रहण का समय और रूपरेखा आधिकारिक रूप से तय हुई। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को संभावित मंत्रियों की अंतिम सूची भी सौंप दी है। इसके बाद से ही लखनऊ का सियासी पारा अचानक बहुत अधिक चढ़ गया है।

छह पदों का पूरा गणित: कैसे तय हुए नाम?

उत्तर प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था के तहत मंत्रिमंडल का एक तय आकार होता है। नियम के अनुसार यूपी कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित कुल 60 विधायकों को ही मंत्री बनाया जा सकता है। मौजूदा समय की बात करें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कैबिनेट में कुल 54 मंत्री काम कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल छह मंत्री पद पूरी तरह खाली हैं। सरकार और संगठन ने मिलकर इन सभी छह खाली पदों को एक साथ भरने का बड़ा फैसला लिया है।

पार्टी नेतृत्व ने इन छह नामों का चयन बहुत ही सोच समझकर किया है। दरअसल, इसके पीछे आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की बड़ी रणनीति छिपी हुई है। भाजपा किसी भी कीमत पर अपना मजबूत जनाधार खिसकने नहीं देना चाहती है। इसलिए पार्टी ने हर क्षेत्र और हर जाति को उचित प्रतिनिधित्व देने का मास्टर प्लान बनाया है। इसी कड़ी में आलाकमान ने उन नेताओं को तरजीह दी है जो अपने समाज में गहरी पैठ रखते हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि चयनित नेताओं को फोन करके रविवार दोपहर तीन बजे तक हर हाल में जनभवन पहुंचने का कड़ा निर्देश दे दिया गया है।

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2027 का लक्ष्य: ब्राम्हण और जाट समीकरण पर फोकस

भारतीय जनता पार्टी हमेशा चुनावी समीकरणों को बहुत ही बारीकी से साधती है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी किसी भी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती है। पिछले कुछ समय से ब्राम्हण समाज की नाराजगी की खबरें लगातार आ रही थीं। पार्टी आलाकमान ने इस नाराजगी को दूर करने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। समाजवादी पार्टी के पूर्व कद्दावर ब्राम्हण चेहरा रहे मनोज पांडेय का मंत्री बनना अब बिल्कुल तय हो गया है। मनोज पांडेय ने पिछले चुनावों में भाजपा को अपना समर्थन दिया था। पार्टी अब उन्हें कैबिनेट में जगह देकर ब्राम्हण वोटरों को एक मजबूत और स्पष्ट सकारात्मक संदेश देना चाहती है।

इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना दबदबा बनाए रखना भी भाजपा के लिए बहुत जरूरी है। किसान आंदोलनों और अन्य वजहों से जाट समाज के बीच पार्टी की छवि को मजबूत करना आवश्यक था। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने एक बड़ा फैसला लिया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी जैसे बड़े और प्रभावशाली चेहरे को मंत्री बनाया जाना तय है। भूपेंद्र चौधरी पिछड़े समाज और पश्चिमी यूपी के समीकरण को एक साथ साधने का माद्दा रखते हैं। उनका संगठन में लंबा अनुभव रहा है। उनका कैबिनेट में आना सरकार के लिए एक बहुत बड़ा फायदेमंद कदम साबित होगा।

ओबीसी, दलित और महिला वोट बैंक पर पैनी नजर

विपक्ष लगातार महिला सुरक्षा और दलितों के मुद्दों पर सरकार को घेरता रहा है। भाजपा ने विपक्ष के इन हमलों की धार कुंद करने के लिए कैबिनेट विस्तार में महिलाओं और दलितों को प्रमुखता दी है। समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाली तेजतर्रार विधायक पूजा पाल का मंत्री बनना लगभग निश्चित है। पूजा पाल ओबीसी वर्ग से आती हैं और उनका अपने इलाके में बहुत मजबूत जनाधार है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी की अपनी वरिष्ठ और अनुभवी विधायक कृष्णा पासवान को भी मंत्री पद का तोहफा मिलेगा।

पार्टी इन दोनों महिला नेताओं को मंत्री बनाकर एक साथ तीन बड़े निशाने साध रही है। पहला, इससे महिला सशक्तिकरण का सीधा संदेश जाएगा। दूसरा, ओबीसी और दलित वोट बैंक पर भाजपा की पकड़ और ज्यादा मजबूत होगी। तीसरा, पार्टी अपने वफादार और पुराने कार्यकर्ताओं को भी सम्मान दे रही है। इसके अतिरिक्त, अलीगढ़ के खैर विधानसभा सीट से लोकप्रिय विधायक सुरेंद्र दिलेर का नाम भी मंत्रियों की सूची में शामिल है। सुरेंद्र दिलेर दलित समाज का एक बड़ा और उभरता हुआ चेहरा हैं।

पूर्वांचल का समीकरण: हंसराज विश्वकर्मा लेंगे शपथ

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल का अपना एक अलग और बहुत बड़ा महत्व है। जो पार्टी पूर्वांचल जीतती है, वही अक्सर लखनऊ की सत्ता पर काबिज होती है। भाजपा आलाकमान इस तथ्य को बहुत अच्छी तरह समझता है। इसलिए पार्टी ने वाराणसी से एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा को भी मंत्री बनाने का फैसला किया है। हंसराज विश्वकर्मा पूर्वांचल में ओबीसी वर्ग का एक बहुत ही जाना-माना और प्रभावशाली चेहरा हैं। उनका जमीनी जुड़ाव बहुत मजबूत है। उनके जरिए पार्टी वाराणसी और आसपास के जिलों के कुर्मी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करेगी।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर सरकार या संगठन ने अभी तक इन नामों की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। लेकिन ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, राजनीतिक गलियारों में यह सूची बिल्कुल फाइनल मानी जा रही है। सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद कई वर्तमान मंत्रियों के विभागों में बड़ा फेरबदल भी संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रियों के प्रदर्शन के आधार पर उनके विभागों की नई सिरे से जिम्मेदारी तय करेंगे। जो मंत्री अपने काम में सुस्त रहे हैं, उनके पर कतरे जा सकते हैं। वहीं बेहतर काम करने वालों को ईनाम मिलेगा।

मार्च 2024 में हुआ था पहला बड़ा विस्तार

आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल (Yogi 2.0) का पहला मंत्रिमंडल विस्तार काफी पहले हुआ था। पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले 5 मार्च को वह विस्तार किया था। उस पहले विस्तार में कुल चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। पार्टी ने तब भी क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का पूरा ध्यान रखा था। उस समय समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़कर वापस एनडीए (NDA) में लौटने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को मंत्री बनाया गया था।

उसी पहले विस्तार में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले ओबीसी नेता दारा सिंह चौहान ने भी शपथ ली थी। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के कोटे से विधायक अनिल कुमार को कैबिनेट में जगह मिली थी। साथ ही भाजपा के अपने वरिष्ठ नेता और साहिबाबाद से विधायक सुनील शर्मा को भी मंत्री पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब यह दूसरा विस्तार यूपी की राजनीति में एक नया और दिलचस्प अध्याय जोड़ेगा। पूरी जनता की नजरें अब राजभवन की ओर टिकी हुई हैं कि मुख्यमंत्री किसे कौन सा विभाग सौंपते हैं। ताज न्यूज़ की इस राजनीतिक हलचल पर पूरी और पैनी नजर बनी हुई है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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