UP News: CM योगी का बड़ा फैसला, अधिकारियों के काफिले होंगे आधे; वर्क फ्रॉम होम पर जोर

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Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Wednesday, May 13, 2026, 01:10:23 AM IST

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Uttar Pradesh Desk | State Policy & Governance

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों को बचाने के लिए कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं। लखनऊ में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और नेताओं के काफिलों में वाहनों की संख्या को 50 फीसदी तक कम करने का सख्त निर्देश दिया है। इसके अलावा, उन्होंने प्रदेश में वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) की संस्कृति को तेजी से बढ़ावा देने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा और ईंधन की खपत कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे सोने की अनावश्यक खरीद से बचें और स्वदेशी उत्पादों को अपनाएं। साथ ही, उन्होंने बिजली और खाद्य तेल के सीमित उपयोग के लिए भी एक जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।

Chief Minister Yogi Adityanath chairing a high level meeting in Lucknow
सीएम योगी के बड़े निर्देश
  • काफिले होंगे आधे: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों के काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने का आदेश दिया।
  • वर्क फ्रॉम होम: बड़े कार्यालयों और औद्योगिक संस्थानों में कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम देने की सलाह दी गई है।
  • नो व्हीकल डे: प्रदेश में सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘नो व्हीकल डे’ मनाया जाएगा।
  • वर्चुअल बैठकें: शिक्षा विभाग और सचिवालय की 50 फीसदी से अधिक आंतरिक बैठकों को अब ऑनलाइन ही आयोजित किया जाएगा।

वैश्विक उथल-पुथल के बीच पीएम मोदी के आह्वान का समर्थन

पूरी दुनिया इस समय गंभीर आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। वैश्विक संकटों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा संरक्षण की अहम अपील की थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आह्वान का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने अपनी पूरी मशीनरी को प्रधानमंत्री के विजन के साथ जुड़ने का स्पष्ट निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस कठिन समय में सभी को सावधानी और जिम्मेदारी से काम करना होगा। राज्य सरकार ने ईंधन और ऊर्जा बचाने के लिए बहुत ही कड़े और प्रभावी कदम उठाने की शुरुआत कर दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि संसाधन असीमित नहीं हैं और हमें भविष्य के लिए इन्हें सहेजना होगा। उन्होंने आम नागरिकों से लेकर सरकारी अधिकारियों तक सभी को अपनी आदतें बदलने की सलाह दी है। ईंधन की खपत को कम करना इस समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। सरकार की कोशिश है कि वह अपने स्तर पर ऊर्जा की बचत करके समाज के सामने एक मजबूत उदाहरण पेश करे। इसी क्रम में उन्होंने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए कई बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा की है। इन फैसलों से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

अधिकारियों के काफिले में 50 फीसदी की कटौती

बैठक के दौरान सबसे बड़ा और साहसिक फैसला वीआईपी संस्कृति (VIP Culture) पर चोट करने वाला रहा। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिया है कि अब मंत्रियों और अधिकारियों के काफिले में वाहनों की भीड़ नहीं चलेगी। उन्होंने ऐसे सभी काफिलों में गाड़ियों की संख्या को सीधे तौर पर 50 फीसदी तक कम करने का कड़ा आदेश दिया है। अनावश्यक वाहनों का उपयोग न केवल सरकारी खजाने पर भारी पड़ता है, बल्कि इससे बहुमूल्य ईंधन की भी भारी बर्बादी होती है। सरकार का यह कदम जनता के बीच एक बहुत ही सकारात्मक संदेश भेजेगा कि शासन भी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से ले रहा है।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने एक और अभिनव योजना का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जन-प्रतिनिधि सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग जरूर करें। प्रदेश में जल्द ही सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ (No Vehicle Day) का आयोजन शुरू किया जाएगा। इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, छात्रों और समाज के हर वर्ग को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। लोग साइकिल का उपयोग कर सकते हैं या कार पूलिंग कर सकते हैं। मुख्यमंत्री का उद्देश्य है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर लोगों की मानसिकता बदले और इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए।

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हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की जोरदार वकालत

ट्रैफिक जाम और ईंधन की खपत को कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक और आधुनिक कदम उठाया है। उन्होंने प्रदेश में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work From Home) संस्कृति को तेजी से लागू करने पर अपना पूरा जोर दिया है। औद्योगिक विकास विभाग (IIDC) को निर्देश दिया गया है कि वे बड़े औद्योगिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को इसके लिए प्रेरित करें। सरकार की योजना है कि जिन कार्यालयों में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें सप्ताह में कम से कम दो दिन घर से काम करने की छूट दी जाए। इसके लिए राज्य स्तर पर जल्द ही एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की जाएगी। यह कदम न केवल कर्मचारियों का तनाव कम करेगा बल्कि शहर की सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव भी घटाएगा।

इसके अलावा, सरकारी कामकाज के तरीके में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि शिक्षा विभाग की सेमिनारें, वर्कशॉप और अन्य सरकारी बैठकें अब ज्यादातर वर्चुअल (ऑनलाइन) माध्यम से ही आयोजित की जाएं। राज्य सचिवालय और निदेशालय की 50 प्रतिशत आंतरिक बैठकों को भी अब वर्चुअली ही किया जाएगा। इससे अधिकारियों को बेवजह सफर नहीं करना पड़ेगा। स्कूलों और कॉलेजों में भी निजी वाहनों की जगह स्कूल बस के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों को भी स्कूलों से जोड़ा जाएगा। पीक आवर्स में ट्रैफिक कम करने के लिए कार्यालयों के समय को अलग-अलग बैचों में बांटने पर भी विचार किया जा रहा है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट और प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे पीएनजी (PNG), मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिकतम उपयोग करें। जिन प्रमुख शहरों में मेट्रो सेवा चल रही है, वहां लोग निजी वाहनों को छोड़कर मेट्रो से सफर करें। इसके लिए सरकार अधिक मांग वाले मार्गों पर बसों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवाओं की संख्या में भी इजाफा करेगी। सार्वजनिक साइकिलिंग शेयरिंग योजनाओं को फिर से नई ऊर्जा के साथ प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने लोगों से यह भी आग्रह किया है कि वे अगले छह माह तक अनावश्यक विदेशी यात्राएं करने से पूरी तरह बचें। इससे देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचेगी।

बिजली बचाने के मोर्चे पर भी सरकार पूरी तरह से गंभीर है। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी भवनों, घरों और निजी प्रतिष्ठानों में बिजली का कोई भी अनावश्यक प्रयोग न हो। व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और निजी संस्थानों में रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का बहुत ही न्यूनतम प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार प्रदेश में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश की गोशालाओं में मौजूद 15 लाख से अधिक गोवंश के गोबर का उचित उपयोग करके प्राकृतिक खाद तैयार की जाएगी। सरकार ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत रूफटॉप सोलर (Rooftop Solar) को अपनाने के लिए भी नागरिकों को बड़े पैमाने पर जागरूक कर रही है।

स्वदेशी उत्पादों और घरेलू पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने विदेशी उत्पादों की जगह स्वदेशी को अपनाने पर जोर दिया है। उन्होंने नागरिकों और वेडिंग प्लानर्स से अपील की है कि वे विदेशों में जाने के बजाय देश में ही आयोजन करें। उत्तर प्रदेश में कई शानदार हेरिटेज, ईको साइट्स और ऐतिहासिक किले मौजूद हैं, जिन्हें डेस्टिनेशन वेडिंग (Destination Wedding) के लिए विकसित किया जा सकता है। सरकार जल्द ही ‘विजिट माई स्टेट’ (Visit My State) अभियान शुरू करेगी। इससे वेलनेस, ग्रामीण पर्यटन, वन्यजीव और खानपान पर्यटन को बहुत अधिक बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ समय के लिए स्मारकों और संग्रहालयों में प्रवेश निःशुल्क करने का भी अहम निर्देश दिया है।

त्योहारों और शादियों में अब विदेशी गिफ्ट्स की जगह भारत में बने उत्पादों और हस्तशिल्प सामग्रियों को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य सरकार भी अब किसी को उपहार देते समय ओडीओपी (ODOP) और जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त स्थानीय उत्पादों का ही उपयोग करेगी। मुख्यमंत्री ने विदेश में रहने वाले उत्तर प्रदेश के प्रवासियों से भी अपील की है कि वे अपने गृह राज्य में पर्यटन के लिए आएं। इसके लिए सरकार शॉपिंग फेस्टिवल और हेरिटेज टूर जैसे विशेष आयोजन करेगी। इन सबसे स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को एक बहुत बड़ा बाजार मिलेगा।

सोने की खरीद और खाद्य तेल की खपत पर नियंत्रण की अपील

मुख्यमंत्री ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दो बहुत ही चौंकाने वाली, लेकिन अहम अपीलें की हैं। उन्होंने प्रदेश की जनता से आग्रह किया है कि वे सोने (Gold) की अनावश्यक खरीद से पूरी तरह बचें। भारत बड़े पैमाने पर सोने का आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर काफी भारी दबाव पड़ता है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे स्थानीय ज्वेलर्स एसोसिएशन और व्यापारियों के साथ बैठक कर उनकी चिंताओं का उचित समाधान निकालें। यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों को ध्यान में रखते हुए खाद्य तेल के उपयोग में कमी लाने की भी जोरदार अपील की है। खाद्य तेल के आयात पर देश की भारी निर्भरता को कम करने के लिए यह बहुत ही जरूरी कदम है। इसके लिए प्रदेश के स्कूलों, जिला अस्पतालों, पुलिस मेस और सरकारी कैंटीन में मिड-डे मील और अन्य खानपान में तेल का उपयोग घटाने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी अब हलवाई, रेस्तरां और ढाबा यूनियनों के साथ संवाद स्थापित करके लोगों को कम तेल वाला खाना खाने के प्रति जागरूक करेंगे। सरकार इस अभियान को नाट्य श्रृंखलाओं और पोषण शिविरों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाएगी।

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