Agra Census 2026: आगरा में जनगणना शुरू, डीएम मनीष बंसल ने की ‘स्व-गणना’ पोर्टल पर ऑनलाइन जानकारी देने की अपील

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Agra Desk, tajnews.in | Thursday, May 7, 2026, 11:27:00 PM IST

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ताजनगरी आगरा में जनगणना (Census) की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया का औपचारिक रूप से शंखनाद हो गया है। आगरा के जिलाधिकारी मनीष बंसल ने गुरुवार को एक वीडियो संदेश जारी करते हुए जिले के सभी नागरिकों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। 7 मई से 21 मई तक चलने वाले पहले चरण में ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) की सुविधा दी गई है, जिसके तहत नागरिक घर बैठे अपने मोबाइल के माध्यम से सरकारी पोर्टल पर परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और सुविधाजनक है। स्व-गणना का उपयोग करके न केवल समय की बचत होगी, बल्कि 22 मई से शुरू होने वाले दूसरे चरण में जब सरकारी प्रगणक (Enumerators) घर-घर पहुंचेंगे, तो उन्हें भी सिर्फ जानकारी को सत्यापित (Verify) करना होगा।

जनगणना अभियान: मुख्य बिंदु
  • स्व-गणना की सुविधा: 7 मई से 21 मई तक नागरिक भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
  • व्यापक प्रशासनिक तैयारी: पूरे आगरा जनपद को 23 जोन में बांटा गया है; काम के लिए लगभग 11,800 कर्मचारियों की फौज उतारी गई है।
  • एक मोबाइल, एक लॉगिन: सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक मोबाइल फोन से केवल एक ही परिवार का फॉर्म भरा जा सकेगा।
  • घर-घर वेरिफिकेशन: जो लोग ऑनलाइन फॉर्म भरेंगे, उनके घर 22 मई से प्रगणक केवल जानकारी को वेरिफाई करने और लॉक करने पहुंचेंगे।

आगरा में जनगणना का शंखनाद: डिजिटल इंडिया की ओर एक और कदम

किसी भी देश के समग्र विकास और भविष्य की योजनाओं का खाका तैयार करने के लिए सटीक आंकड़े होना अत्यंत आवश्यक है। इसी दिशा में भारत सरकार द्वारा पूरे देश में जनगणना का विशाल अभियान शुरू किया गया है। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में भी इस महा-अभियान की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। ताज न्यूज़ की ग्राउंड रपट के अनुसार, प्रशासन ने इस बार की जनगणना को पूरी तरह से तकनीकी और डिजिटल स्वरूप देने का फैसला किया है। पिछले दशकों में होने वाली कागजी कार्रवाइयों और लंबी-लंबी प्रश्नावलियों के स्थान पर अब एक सुगम ऑनलाइन प्रणाली विकसित की गई है। इस नई प्रणाली का सीधा उद्देश्य यह है कि आम जनता को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े और आंकड़े शत-प्रतिशत सटीक और पारदर्शी रूप से सरकार तक पहुंच सकें।

आगरा के जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस डिजिटल प्रक्रिया को ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) का नाम दिया है। यह एक ऐसा मंच है जहां कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति बिना किसी सरकारी कर्मचारी के अपने घर आए, अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपने परिवार की सभी आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकता है। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल सरकारी कर्मचारियों पर काम का भारी बोझ कम होगा, बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने खाली समय और सुविधा के अनुसार यह राष्ट्रीय कर्तव्य निभा सकेंगे।

▶️ ताज न्यूज़ पर देखें: डीएम मनीष बंसल का एक्सक्लूसिव संदेश

(वीडियो प्ले करने के लिए ऊपर क्लिक करें)

23 जोन और हजारों कर्मचारियों की फौज: आगरा प्रशासन की बड़ी तैयारी

इतने बड़े जनपद में हर एक घर और नागरिक की गिनती करना कोई आसान काम नहीं है। आगरा जैसे घनी आबादी वाले शहर में इसके लिए बेहद सूक्ष्म और सटीक योजना बनाई गई है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि इस संपूर्ण प्रक्रिया को निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए पूरे आगरा जनपद को 23 अलग-अलग जोन्स (Zones) में विभाजित किया गया है। हर जोन की निगरानी के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कर्मचारियों की तैनाती के आंकड़ों पर गौर करें तो इस विशाल कार्य के लिए 8630 प्रगणक (Enumerators) और उनके ऊपर निगरानी रखने के लिए 1439 पर्यवेक्षकों (Supervisors) को नियुक्त किया गया है।

प्रशासन ने इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है कि किसी भी कर्मचारी के बीमार पड़ने या अनुपस्थित होने की स्थिति में काम की गति धीमी न हो। इसलिए कुल टीम के साथ 10 प्रतिशत आरक्षित (Reserve) कर्मचारियों की भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इस प्रकार, पूरे आगरा जिले में लगभग 11,800 सरकारी कर्मचारी और अधिकारी जनगणना के इस महायज्ञ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी कर्मचारी विशेष रूप से प्रशिक्षित किए गए हैं ताकि वे घर-घर जाकर नागरिकों से संवेदनशीलता और विनम्रता के साथ जानकारी एकत्र कर सकें।

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समय की बचत और पारदर्शिता: स्व-गणना (Self Enumeration) के बड़े फायदे

जनगणना की पारंपरिक प्रक्रिया में प्रगणक एक रजिस्टर या टेबलेट लेकर घर आते हैं और परिवार के मुखिया से कई सारे सवाल पूछते हैं। इन सभी सवालों के जवाब देने और उन्हें फीड करने में काफी समय खर्च होता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, विशेषकर नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी कर्मचारी के आने का इंतजार करना और फिर उसे आधा घंटा देना थोड़ा मुश्किल प्रतीत होता है। इसी असुविधा को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने ‘स्व-गणना’ का विकल्प प्रस्तुत किया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल के अनुसार, जो नागरिक ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी भर देंगे, उन्हें प्रगणक के आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

नागरिक अपनी सुविधानुसार सुबह, शाम या रात में किसी भी वक्त इस पोर्टल को खोलकर जानकारी अपडेट कर सकते हैं। जब 22 मई के बाद सरकारी कर्मचारी ऐसे परिवारों के घर जाएंगे, तो उन्हें सिर्फ एक ‘रेफरेंस नंबर’ (Reference Number) दिखाना होगा। प्रगणक अपनी मशीन या मोबाइल ऐप में उस नंबर को डालकर जानकारी को वेरिफाई करेगा और पलक झपकते ही डेटा लॉक हो जाएगा। इससे न केवल परिवार के मुखिया का समय बचेगा, बल्कि डाटा एंट्री में होने वाली मानवीय त्रुटियों (Human Errors) की संभावना भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

कैसे करें स्व-गणना? डीएम मनीष बंसल ने बताई पूरी प्रक्रिया

आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह स्व-गणना की कैसे जाएगी? इसके जवाब में डीएम मनीष बंसल ने प्रक्रिया को बेहद आसान शब्दों में समझाया है। भारत सरकार द्वारा इस अभियान के लिए एक विशेष वेबसाइट और यूआरएल (URL) जारी किया गया है। जिला प्रशासन ने इस लिंक को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों, अखबारों और सरकारी वेबसाइटों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित और प्रसारित किया है। परिवार का मुखिया या घर का कोई भी अन्य पढ़ा-लिखा सदस्य अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप या कंप्यूटर के जरिए इस लिंक पर क्लिक कर सकता है।

पोर्टल पर जाने के बाद नागरिक को अपना मोबाइल नंबर डालकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिससे लॉगिन की प्रक्रिया पूरी होगी। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डेटा सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही परिवार का डेटा भरा जा सकेगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति या असामाजिक तत्व किसी दूसरे के परिवार की फर्जी जानकारी न भर सके। फॉर्म में परिवार के सदस्यों की संख्या, व्यवसाय, उम्र, शिक्षा आदि से जुड़े सामान्य प्रश्न पूछे गए हैं, जिन्हें कोई भी आम नागरिक आसानी से पढ़कर भर सकता है।

22 मई से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक: राष्ट्र निर्माण में दें अपना योगदान

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि 7 मई से शुरू होने वाली यह स्व-गणना 21 मई तक चालू रहेगी। इसके बाद 22 मई से जनगणना का पहला मैदानी चरण शुरू বাতাসে होगा, जिसमें सभी 8630 प्रगणक घर-घर जाकर अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। जो नागरिक किसी कारणवश 21 मई तक ऑनलाइन स्व-गणना नहीं कर पाएंगे, उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे घरों में प्रगणक खुद पहुंचेंगे और परिवार के मुखिया से मिलकर ऐप के माध्यम से सारी सूचनाएं दर्ज करेंगे। हालांकि, प्रशासन का बार-बार यही अनुरोध है कि अधिक से अधिक लोग ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ का हिस्सा बनें ताकि डिजिटल इंडिया का सपना साकार हो सके।

जनगणना केवल एक सरकारी खानापूर्ति नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के भविष्य की नींव है। इसी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर अगले एक दशक के लिए पानी, बिजली, स्कूल, अस्पताल, सड़क और रोजगार की योजनाएं बनाई जाएंगी। यदि हम अपनी जानकारी छिपाएंगे या गलत जानकारी देंगे, तो इसका सीधा असर हमारे इलाके के विकास पर पड़ेगा। ‘ताज न्यूज़’ आगरा के सभी जागरूक नागरिकों से यह अपील करता है कि वे डीएम मनीष बंसल के इस संदेश को गंभीरता से लें। किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रांतियों पर ध्यान न दें। 21 मई से पहले स्व-गणना पोर्टल का उपयोग करें और भारत के विकास में एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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