National Desk, 🌐 tajnews.in | Tuesday, 21 July, 2026, 12:05:00 PM IST.

tajnews.in | नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के बहुचर्चित पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब तक का सबसे कड़ा और कड़ा संदेश दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल की उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पेपर लीक को ‘घोर पाप’ और गंभीर अपराध करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के लाखों होनहार युवाओं और अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी भी सूरत में नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए सभी राज्य सरकारों से सहयोग की अपील की।
13 मुख्य आरोपी गिरफ्तार, री-एग्जाम कराकर घोषित किए गए परिणाम
एनडीए संसदीय दल की बैठक के उपरांत केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की ओर से की गई त्वरित और सख्त कार्रवाइयों का ब्योरा प्रस्तुत किया। किरण रिजिजू ने बताया कि जैसे ही NEET परीक्षा में धांधली और पेपर लीक की शिकायतें उजागर हुईं, केंद्र सरकार ने बिना किसी देरी के उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए। जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया और मामले में संलिप्त 13 मुख्य साजिशकर्ताओं व आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया।
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि अभ्यर्थियों के भरोसे और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने विवादित परीक्षा को रद्द कर दोबारा नीट परीक्षा (Re-NEET) कराने का ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया था। पुनरीक्षा को अत्यंत पारदर्शी और फुलप्रूफ सुरक्षा घेरे में सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया तथा समय सीमा के भीतर परिणाम भी घोषित कर दिए गए। किरण रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्पष्ट निर्देश हैं कि इस मामले में ऐसी नजीर पेश की जाए ताकि भविष्य में कोई भी माफिया सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके।
राजस्थान से जुड़े थे तार, सुप्रीम कोर्ट में NTA को भंग करने की याचिका
NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद की जड़ें मई महीने की शुरुआत से जुड़ी हैं। 6 मई को जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने प्रोविजनल आंसर-की जारी की, तो कई अभ्यर्थियों और प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों ने सवाल उठाए थे। जांच में सामने आया कि परीक्षा से ठीक पहले एक हाथ से लिखा हुआ ‘गेस पेपर’ चुनिंदा लोगों के बीच बांटा गया था, जिसके कई प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खा रहे थे। जांच एजेंसियों के खुलासे के अनुसार, इस फर्जीवाड़े का मुख्य केंद्र मुख्य रूप से राजस्थान राज्य में फैला हुआ था, जहां से यह कथित पर्चा वायरल किया गया था। गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद 12 मई को पूर्व में आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख भी बेहद सख्त नजर आ रहा है। शीर्ष अदालत में दर्जनों याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन करने अथवा इसे पूरी तरह भंग करने और संपूर्ण मामले की स्वतंत्र सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग उठाई गई है। संसद के चालू सत्र में भी विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा खुद मोर्चा संभालने और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार के लिए राज्यों से समन्वय स्थापित करने के आह्वान के बाद मामले में निर्णायक मोड आ गया है।
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




