Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Friday, April 17, 2026, 04:53:37 PM IST

आगरा: ताजनगरी आगरा में अवैध निर्माणकर्ताओं और जमीनी नियमों को ताक पर रखकर इमारतें तानने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ अब प्रशासन का हंटर पूरी ताकत से चल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति (Zero Tolerance Policy) का कड़ाई से पालन करते हुए, आवास एवं विकास परिषद (Awas Evam Vikas Parishad) ने शहर की सबसे अहम और पॉश कॉलोनियों में शुमार ‘सिकंदरा योजना’ में एक बहुत ही विशाल और अचूक सीलिंग तथा ध्वस्तीकरण अभियान चलाया है। गुरुवार को सिकंदरा योजना की सड़कों पर जब प्रशासन का पीला पंजा (Bulldozer) गरजता हुआ उतरा, तो अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों और बिना नक्शे के निर्माण करने वालों में भयंकर हड़कंप मच गया। इस महा-कार्रवाई के दौरान कई बड़ी और व्यावसायिक संपत्तियों को न केवल सील किया गया, बल्कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उनके आंशिक हिस्सों को ध्वस्त भी कर दिया गया। इस पूरे अभियान को आवास विकास परिषद के आला अधिकारियों की सीधी निगरानी में अंजाम दिया गया है, जिसने पूरे आगरा शहर के रियल एस्टेट और व्यापारिक गलियारों में एक सख्त संदेश भेज दिया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी सील का घोर उल्लंघन और बिल्डरों की मनमानी
आगरा शहर में कई ऐसे व्यावसायिक और आवासीय परिसर हैं, जो आवास विकास परिषद द्वारा पास किए गए मूल नक्शे (Approved Map) के बिल्कुल विपरीत बनाए गए हैं। इसी मनमानी को जड़ से खत्म करने के लिए यह धावा बोला गया। इस पूरी कार्रवाई को आवास विकास परिषद के तेज-तर्रार अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) अतुल कुमार सिंह के सीधे और कड़े निर्देशों पर अमल में लाया गया। प्रवर्तन दल के अधिकारी कर्नल जी.एम. ख़ान ने मीडिया को इस अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि सिकंदरा योजना के कई सेक्टर्स में नियम-कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

कर्नल जी.एम. ख़ान ने बताया कि सबसे गंभीर और चौंकाने वाला मामला सेक्टर-4 की संपत्ति संख्या 721/1 का सामने आया। इस विशिष्ट संपत्ति को विभाग द्वारा इसके अवैध व्यावसायिक उपयोग के कारण पहले ही सील कर दिया गया था। यहां “हिटाची कैश मैनेजमेंट कंपनी” (Hitachi Cash Management Company) का संचालन हो रहा था। लेकिन, भवन स्वामी और संचालकों ने कानून का जरा भी खौफ न खाते हुए, एक बहुत बड़ा दुस्साहस किया। उन्होंने प्रशासन द्वारा लगाई गई सरकारी सील को गैर-कानूनी तरीके से तोड़ दिया और वहां दोबारा अपना व्यावसायिक संचालन धड़ल्ले से शुरू कर दिया। किसी भी सरकारी सील को तोड़ना एक बेहद संगीन कानूनी अपराध माना जाता है, जो सीधे तौर पर प्रशासन को खुली चुनौती देने के समान है।

पेस कोचिंग, लाइब्रेरी और ‘रोशन पैलेस’ पर कड़ा प्रहार
सेक्टर-4 की उसी विवादित संपत्ति (721/1) के परिसर में जब प्रवर्तन दल (Enforcement Squad) ने गहराई से मुआयना किया, तो वहां केवल कैश मैनेजमेंट कंपनी ही नहीं, बल्कि ‘पेस कोचिंग संस्थान’ (Pace Coaching Institute) और एक भारी-भरकम लाइब्रेरी भी अवैध रूप से संचालित होती हुई पाई गई। आवासीय भूखंडों पर इस तरह की भारी व्यावसायिक गतिविधियां चलाना न केवल आवास विकास के नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह वहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा (Fire and Structural Safety) के साथ भी एक बहुत बड़ा खिलवाड़ है।

स्थिति की गंभीरता और नियमों के खुले उल्लंघन को देखते हुए, परिषद के अधिकारियों ने मौके पर ही सख्त एक्शन लिया। प्रवर्तन दल ने तुरंत बुलडोजर मंगाकर उस परिसर के अवैध रूप से निर्मित आंशिक हिस्सों का ध्वस्तीकरण (Partial Demolition) कर दिया। इसके साथ ही, भूस्वामी को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट अल्टीमेटम (Ultimatum) दिया गया है। प्रशासन ने भूस्वामी को निर्देश दिया है कि वह अगले दो दिनों के भीतर खुद ही अपने खर्चे पर इस पूरे अवैध निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त कर दे। अगर दो दिन के भीतर ऐसा नहीं किया गया, तो परिषद खुद बुलडोजर चलाकर इसे जमींदोज कर देगी और ध्वस्तीकरण में आने वाला पूरा खर्च भी उसी भूस्वामी से पेनल्टी के रूप में वसूला जाएगा।

इस धुआंधार कार्रवाई का दायरा केवल सेक्टर-4 तक ही सीमित नहीं रहा। इसके बाद कर्नल जी.एम. ख़ान और अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) सूरजपाल सिंह के नेतृत्व में यह काफिला सिकंदरा योजना के सेक्टर-7 की ओर बढ़ गया। वहां संपत्ति संख्या 123, जो कि ‘रोशन पैलेस’ (Roshan Palace) के नाम से जानी जाती है, पर भी नक्शे के विपरीत भारी निर्माण पाया गया। टीम ने बिना किसी दबाव में आए इस संपत्ति पर भी कड़ी कार्रवाई की। इसके बाद, टीम ने सेक्टर-9 में चल रही एक बहुत बड़ी निर्माणाधीन संपत्ति (संपत्ति संख्या 94) पर भी छापा मारा। यहां भी आवास विकास के बायलॉज (By-laws) का पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके चलते इस निर्माणाधीन इमारत को भी तत्काल प्रभाव से रोककर उस पर सीलिंग की कार्रवाई सुनिश्चित की गई।
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सुप्रीम कोर्ट के ‘मेरठ आदेश’ का होगा अक्षरशः पालन

अक्सर देखा जाता है कि ऐसे ध्वस्तीकरण अभियानों के दौरान स्थानीय नेताओं या रसूखदार लोगों का भारी दबाव प्रशासन पर पड़ने लगता है। लोग भीड़ इकट्ठा करके सरकारी काम में बाधा डालने की भी भरपूर कोशिश करते हैं। लेकिन, इस बार आवास विकास परिषद पूरी तरह से ‘फुल-प्रूफ’ तैयारी के साथ मैदान में उतरा था। अधिशासी अभियंता सूरजपाल सिंह के नेतृत्व में परिषद के प्रवर्तन दल ने स्थानीय पुलिस बल (Local Police Force) और पीएसी (PAC) के जवानों का भरपूर सहयोग लिया। पुलिस की भारी और मुस्तैद मौजूदगी के कारण किसी भी उपद्रवी या अतिक्रमणकारी की एक न चली और यह पूरी बड़ी कार्रवाई बेहद शांतिपूर्ण (Peaceful Execution) तरीके से बिना किसी कानून व्यवस्था की समस्या के संपन्न हो गई।

इस महा-अभियान के पीछे का सबसे बड़ा कारण और कानूनी आधार बताते हुए अधीक्षण अभियंता अतुल कुमार सिंह ने मीडिया को एक बहुत ही स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि हाल ही में बहुचर्चित ‘मेरठ प्रकरण’ (Meerut Case) में माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने अवैध निर्माणों और जमीनी नियमों की अनदेखी को लेकर बेहद सख्त आदेश और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि शहरों के नियोजित विकास (Planned Development) से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। अतुल कुमार सिंह ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि आगरा में आवास विकास परिषद सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का पूर्णतः और अक्षरशः पालन सुनिश्चित कर रही है। अब किसी भी रसूखदार बिल्डर या व्यक्ति को नियमों को ताक पर रखने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं दी जाएगी।

नागरिकों से खास अपील: ‘नियमों का करें पालन, अभियान रहेगा जारी’
इस धुआंधार अभियान ने पूरे आगरा शहर के बिल्डरों, कोचिंग संचालकों और व्यावसायिक भू-माफियाओं के मन में एक गहरा खौफ पैदा कर दिया है। परिषद के अधिकारियों ने इस कार्रवाई के जरिए यह साफ कर दिया है कि उनका यह बुलडोजर अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है। अधीक्षण अभियंता अतुल कुमार सिंह ने शहर के सभी सम्मानित नागरिकों और संपत्ति मालिकों से एक बहुत ही खास और कड़क अपील की है। उन्होंने कहा है कि जिन लोगों ने भी अपनी संपत्तियों में स्वीकृत नक्शे (Approved Layout) के विपरीत कोई भी फेरबदल किया है या अवैध निर्माण किया है, वे खुद ही उसे समय रहते नियमों के अनुरूप (As per Rules) कर लें या हटा लें।

अधिकारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि परिषद का यह प्रवर्तन और सीलिंग अभियान अब लगातार और बिना किसी भेदभाव के पूरे शहर की विभिन्न योजनाओं में जारी रहेगा। अगर टीम को खुद आकर बुलडोजर चलाना पड़ा, तो नुकसान और जुर्माना दोनों का ही भारी बोझ भवन स्वामी को खुद उठाना पड़ेगा। सिकंदरा योजना की इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में मुख्य रूप से अधिशासी अभियंता सूरजपाल सिंह, प्रवर्तन दल अधिकारी कर्नल जी.एम. ख़ान, सहायक अभियंता (Assistant Engineer) सुनील कुमार, भारी स्थानीय पुलिस बल और परिषद के अन्य मुस्तैद अधिकारी एवं कर्मचारी पूरे समय पूरी सतर्कता के साथ उपस्थित रहे। प्रशासन की इस सख्ती से अब उम्मीद जताई जा रही है कि आगरा में बेतरतीब और अवैध शहरीकरण पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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