कूनो से 192 किलोमीटर का सफर तय कर भरतपुर पहुंचा चीता: राजस्थान के जंगलों में देखा गया वन्यजीव, वन विभाग हाई अलर्ट पर

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National Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Sunday, 31 May 2026, 11:35:12 AM IST

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भरतपुर: मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीवों के पलायन और उनके नए आशियाने की तलाश का एक बेहद हैरान कर देने वाला और ऐतिहासिक मामला सामने आया है। कूनो नेशनल पार्क की सीमाओं को लांघकर निकला एक अांतरिक इच्छाशक्ति से भरपूर साहसी चीता लगभग 192 किलोमीटर का लंबा और दुर्गम सफर तय करते हुए राजस्थान के भरतपुर जिले की भौगोलिक सीमा में दाखिल हो चुका है। भरतपुर के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में चीते की इस लाइव मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद से ही पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। कूनो से इतनी लंबी दूरी तय कर चीते का ब्रज भूमि के इस मुहाने तक पहुँचना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी शोध और कौतूहल का विषय बन गया है। चीते की सुरक्षा और स्थानीय आबादी को किसी भी संभावित खतरे से बचाने के लिए वन्यजीव विंग और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत हरकत में आते हुए पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।

HIGHLIGHTS
  1. ऐतिहासिक पलायन: कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता लगभग 192 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर भरतपुर की सीमा में पहुंचा।
  2. वन विभाग सतर्क: भरतपुर और धौलपुर-करौली के सीमावर्ती जंगलों में ट्रैकिंग टीमों ने बढ़ाई निगरानी, पगचिह्नों से लोकेशन ट्रेस।
  3. विशेषज्ञों की निगरानी: कॉलर आईडी और जीपीएस सैटेलाइट डेटा के माध्यम से कूनो और राजस्थान वन विभाग की संयुक्त टीमें रख रही हैं पल-पल की नजर।
  4. ग्रामीणों को हिदायत: सीमावर्ती गांवों में मुनादी कराकर रात के समय खेतों में अकेले न जाने और वन्यजीव दिखने पर तुरंत सूचित करने की अपील।

वन्यजीव विभाग से प्राप्त विस्तृत और विधिक जानकारी के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के तहत छोड़े गए इन विदेशी चीतों द्वारा अपनी टेरिटरी (नया इलाका) बनाने के लिए लगातार कूनो से बाहर निकलने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में इस नर चीते ने कूनो के घने जंगलों से निकलकर चंबल नदी की बीहड़ घाटियों को पार किया और मध्य प्रदेश की सीमा को लांघते हुए राजस्थान के धौलपुर और करौली के जंगलों के रास्ते सीधे भरतपुर जिले की दक्षिण-पूर्वी सीमा में प्रवेश कर लिया। वन्यजीव अधिकारियों का कहना है कि कूनो से भरतपुर की हवाई दूरी और धरातलीय रास्तों का बारीकी से अध्ययन किया जाए, तो इस वन्यजीव ने खेतों, झाड़ियों और छोटे नदी-नालों को पार करते हुए लगभग 192 किलोमीटर का लंबा गलियारा पार किया है। चीते की इस अद्भुत जीपीएस लोकेशन ने यह साबित कर दिया है कि इन वन्यजीवों में पुराने प्राकृतिक रास्तों को तलाशने की गजब की विधिक और जैविक क्षमता होती है।

भरतपुर रेंज के मुख्य वन संरक्षक ने मीडिया को बताया कि चीते के गले में लगे हाई-टेक सैटेलाइट रेडियो कॉलर आईडी से मिल रहे सिग्नलों के आधार पर इसकी सटीक लोकेशन का पता चला है। जैसे ही कूनो वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग टीम को इसके भरतपुर जिले की सीमा में होने का संकेत मिला, तुरंत राजस्थान वन विभाग के उच्चाधिकारियों को आपातकालीन संदेश भेजकर अलर्ट किया गया। कूनो से भी वन्यजीव विशेषज्ञों और डॉक्टरों की एक विशेष रेस्क्यू टीम आवश्यक ट्रेंकुलाइजर गन और पिंजरों के साथ भरतपुर के लिए रवाना हो चुकी है। स्थानीय रेंजर्स और वनपालों की कुल आठ विशेष टीमों का गठन कर चीते के संभावित रास्तों पर मुस्तैदी से तैनात कर दिया गया है। वन कर्मियों की टीमें जंगलों और रेतीले रास्तों पर चीते के पगचिह्नों (पगमार्क) को कड़ाई से ट्रेस कर रही हैं ताकि उसकी वर्तमान शारीरिक स्थिति और दिशा का सटीक आकलन किया जा सके।

चीते के आगमन की खबर जैसे ही भरतपुर के सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों और ढाणियों में फैली, स्थानीय ग्रामीणों में कौतूहल के साथ-साथ एक अज्ञात भय और भारी दहशत का माहौल बन गया है। खेतों के आस-बाहर चीते को देखने की चर्चाओं के बीच वन विभाग ने ऐहतियातन पग कड़े करते हुए प्रभावित गांवों में मुनादी करानी शुरू कर दी है। ग्रामीणों को विशेष हिदायत दी गई है कि वे रात के समय अपने मवेशियों (पशुओं) को खुले बाड़े में न बांधें और खेतों की सिंचाई करने या कृषि कार्य के लिए अकेले सूने इलाकों में जाने से पूरी तरह बचें। यदि किसी भी ग्रामीण को कहीं भी चीता या उसकी हलचल दिखाई देती है, तो वे स्वयं विधिक रूप से कानून हाथ में न लें और न ही शोर मचाकर वन्यजीव को उकसाने का प्रयास करें, बल्कि तुरंत इसकी सूचना स्थानीय वन चौकी या पुलिस कंट्रोल रूम को प्रदान करें।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी विहार) और उसके आस-पास का झाड़ीदार वन क्षेत्र चीतों के प्राकृतिक आवास के लिए काफी अनुकूल हो सकता है क्योंकि यहाँ छोटे शिकार जैसे चीतल, हिरण और खरगोश प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। हालांकि, चीता मैदानी इलाकों और खुले घास के मैदानों में शिकार करना पसंद करता है, इसलिए वह आबादी वाले क्षेत्रों से बचते हुए जंगलों के रास्ते आगे बढ़ रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि फिलहाल चीता पूरी तरह से स्वस्थ है और उसकी मूवमेंट पर 24 घंटे सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए कड़ाई से नजर रखी जा रही है। यदि वह केवलादेव के सुरक्षित वन क्षेत्र की ओर बढ़ता है तो उसे प्राकृतिक रूप से वहां रहने दिया जा सकता है, अन्यथा आबादी की सुरक्षा को देखते हुए उच्च विधिक अनुमति मिलने के बाद उसे सुरक्षित ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर वापस कूनो नेशनल पार्क भेजने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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