Agra Desk, tajnews.in | Friday, April 17, 2026, 12:45:30 PM IST

आगरा: ग्रामीण अंचलों में जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से अपनी खून-पसीने की फसल को बचाने के लिए किसान अक्सर खेतों के चारों ओर ‘झटका तार’ (Electric Fencing) लगाते हैं। यह तार जानवरों को भगाने के लिए एक हल्का करंट देने के लिए डिजाइन किया जाता है। लेकिन, जब यही सुरक्षा उपाय एक जानलेवा लापरवाही में बदल जाए, तो इसके परिणाम बेहद खौफनाक होते हैं। आगरा जिले के थाना मंसुखपुरा क्षेत्र से सटे आगरा-राजस्थान बॉर्डर पर एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और दुखद हादसा सामने आया है। यहां एक 26 वर्षीय नौजवान शिव कुमार की खेत में लगे इसी ‘झटका तार’ के भयानक करंट की चपेट में आने से तड़पकर दर्दनाक मौत हो गई। जिस उम्र में इस युवक को अपने परिवार का सहारा बनना था, उसी उम्र में एक जानलेवा लापरवाही ने उसकी जिंदगी का सफर हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। युवक की मौत की मनहूस खबर जैसे ही उसके पैतृक गांव पहुंची, वहां भयंकर कोहराम मच गया और हर किसी की आंखें नम हो गईं। यह हादसा खेतों में बिना मानक के लगाए जा रहे नंगे और जानलेवा तारों के बढ़ते खतरे पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
आगरा-राजस्थान सीमा और वह खौफनाक सुबह
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, आगरा जिले का मंसुखपुरा थाना क्षेत्र और राजस्थान का राजाखेड़ा थाना क्षेत्र भौगोलिक रूप से बिल्कुल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दोनों राज्यों की सीमाएं खेतों की पगडंडियों से होकर गुजरती हैं। आगरा के अनिरुद्धपुरा गांव के रहने वाले 26 वर्षीय नौजवान शिव कुमार का खेत भी इसी सीमा पर राजस्थान के राजाखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव गढ़ी जोनाबाद में स्थित है। आमतौर पर सीमावर्ती गांवों के किसान सुबह-सुबह अपने खेतों की रखवाली और कृषि कार्यों के लिए वहां जाते हैं।
गुरुवार की सुबह भी शिव कुमार रोजाना की तरह अपने घर से यह कहकर निकला था कि वह खेत की रखवाली और मुआयना करने जा रहा है। उसे इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होने वाला है। खेत के आस-पास जंगली जानवरों (जैसे नीलगाय और जंगली सूअर) को फसल बर्बाद करने से रोकने के लिए कंटीले तारों की फेंसिंग की गई थी, जिसमें एक बैटरी या सीधे बिजली के खंभे से ‘झटका करंट’ दौड़ाया गया था। सुबह के समय जब शिव कुमार खेत की मेड़ से गुजर रहा था, तभी अचानक उसका शरीर इस नंगे करंट युक्त तार की चपेट में आ गया।
भयंकर करंट का झटका और अस्पताल में टूटी आखिरी सांस
तार में दौड़ रहा करंट इतना ज्यादा भयानक और शक्तिशाली था कि शिव कुमार को खुद को छुड़ाने का जरा भी मौका नहीं मिला। वह मौके पर ही बहुत बुरी तरह से झुलस गया और अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा। आस-पास के खेतों में काम कर रहे अन्य किसानों और ग्रामीणों ने जब उसे वहां तड़पते और गिरे हुए देखा, तो वे तुरंत भागकर मौके पर पहुंचे। किसी तरह तार की बिजली को काटकर उसे करंट से अलग किया गया, लेकिन तब तक शिव कुमार की हालत बेहद गंभीर और नाजुक हो चुकी थी।
बदहवास ग्रामीण और आनन-फानन में पहुंचे परिजन उसे तुरंत इलाज के लिए सीमा पार राजस्थान के राजाखेड़ा स्थित एक अस्पताल लेकर भागे। रास्ते भर परिवार के लोग उसकी सलामती की दुआएं मांग रहे थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। राजाखेड़ा अस्पताल के आपातकालीन कक्ष (Emergency Ward) में पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसकी जांच की। डॉक्टरों ने उसे तुरंत मृत (Brought Dead) घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि शरीर में अत्यधिक हाई-वोल्टेज करंट दौड़ जाने के कारण उसके हृदय ने काम करना बंद कर दिया था और अस्पताल पहुंचने से काफी पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
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अनिरुद्धपुरा गांव में कोहराम और उठते कई बड़े सवाल
अस्पताल से जैसे ही शिव कुमार की मौत की यह मनहूस खबर आगरा के अनिरुद्धपुरा गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम का भयानक सन्नाटा पसर गया। मृतक के घर में चीख-पुकार और रुदन शुरू हो गया। 26 साल के जवान और हट्टे-कट्टे बेटे की लाश देखकर माता-पिता पूरी तरह से टूट गए। गांव के लोग भारी संख्या में शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने के लिए इकट्ठा हो गए, लेकिन इस भयंकर दुख की घड़ी में किसी के भी पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे। एक ही झटके में एक हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह से तबाह हो गया।
यह हृदयविदारक घटना ग्रामीण इलाकों में खेतों की सुरक्षा के नाम पर चल रहे ‘मौत के खेल’ पर कई बहुत गंभीर सवाल खड़े करती है। कृषि विशेषज्ञों और प्रशासन के सख्त नियमों के अनुसार, खेतों में ‘सोलर झटका मशीन’ (Solar Fencing) का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जो केवल इतना ही करंट पैदा करती है जिससे जानवर डरकर भाग जाएं और उनकी या किसी इंसान की जान को कोई भी खतरा न हो। लेकिन, जानकारी के अभाव और चंद रुपये बचाने के लालच में कई किसान खेतों के तारों में सीधे 220 वोल्ट की मेन लाइन (Direct Electric Current) का हाई-वोल्टेज करंट दौड़वा देते हैं। यही जानलेवा लापरवाही ऐसे खौफनाक हादसों का सबसे बड़ा कारण बनती है।
प्रशासन की अनदेखी और सख्त कार्रवाई की दरकार
मंसुखपुरा और राजाखेड़ा सीमा पर हुई इस मौत ने स्थानीय प्रशासन की घोर अनदेखी की पोल भी खोलकर रख दी है। पुलिस और बिजली विभाग को भलीभांति मालूम होता है कि ग्रामीण इलाकों में खेतों के आसपास ऐसे अवैध और नंगे तार बिछाए गए हैं, लेकिन किसी बड़े हादसे के होने तक कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाता। रात के अंधेरे में या धुंध के समय ऐसे तार बिल्कुल दिखाई नहीं देते और वे किसी भी राहगीर, किसान या मासूम बच्चे के लिए ‘मौत का फंदा’ साबित हो सकते हैं।
अब समय आ गया है कि पुलिस, बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में बेहद सख्त कदम उठाए। खेतों में इस तरह के जानलेवा और अवैध करंट छोड़ने वाले लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का कड़ा मामला दर्ज किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, ग्राम पंचायतों के माध्यम से किसानों को सुरक्षित सोलर फेंसिंग और फसल बचाने के अन्य वैज्ञानिक तरीकों के प्रति जागरूक करना भी बहुत जरूरी है। जब तक प्रशासन इस अवैध ‘झटका तार’ की प्रथा पर पूरी तरह से नकेल नहीं कसेगा, तब तक शिव कुमार जैसे न जाने कितने और बेगुनाह नौजवानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। फिलहाल, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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