Spiritual Desk, tajnews.in | Saturday, April 18, 2026, 10:45:30 AM IST

आगरा: ब्रज मंडल की पावन धरती आगरा में सनातन धर्म के रक्षक, शस्त्र और शास्त्र के महान ज्ञाता, भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव इस वर्ष अभूतपूर्व और विराट स्वरूप में मनाया जाएगा। महर्षि परशुराम जन्मोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस भव्य महा-महोत्सव की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर शहर के विप्र समाज और युवाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। आयोजन समिति द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के अनुसार, इस वर्ष यह महोत्सव कई दिनों तक चलेगा, जिसकी शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को एक अत्यंत पवित्र ‘पांच कुंडीय महायज्ञ’ के साथ होगी। इसके पश्चात 22 अप्रैल को शहर भर में भव्य आमंत्रण यात्रा निकाली जाएगी और 23 अप्रैल को आगरा की सड़कों पर एक ऐसी अलौकिक और विशाल शोभायात्रा निकलेगी, जिसमें आस्था, संस्कृति और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इस शोभायात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से बुलाई गई दो दर्जन से अधिक मनमोहक झांकियां शामिल होंगी, जो पूरे नगरवासियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेंगी।

19 अप्रैल: ‘पांच कुंडीय हवन’ से होगा आध्यात्मिक शंखनाद
सनातन धर्म की महान और प्राचीन परंपरा में किसी भी बड़े और शुभ कार्य का आरंभ हमेशा देवी-देवताओं के आह्वान और यज्ञ (Havan Yagya) के माध्यम से किया जाता है। यज्ञ न केवल वातावरण को शुद्ध करता है, बल्कि यह मनुष्य की आत्मा और विचारों में भी पवित्रता का संचार करता है। महर्षि परशुराम जन्मोत्सव समिति के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि जन्मोत्सव का विधिवत और आध्यात्मिक शुभारंभ 19 अप्रैल 2026 को होगा। इस दिन प्रातः 8 बजे से जमुना किनारा स्थित ‘महर्षि परशुराम इंटर कॉलेज’ के प्रांगण में एक अत्यंत विशाल और पावन ‘पांच कुंडीय हवन’ का आयोजन किया जाएगा।
इस महायज्ञ में विद्वान आचार्यों और पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां दी जाएंगी। पांच कुंडीय यज्ञ का आयोजन पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के संतुलन और समाज में सुख-शांति की कामना के लिए किया जा रहा है। समिति का मानना है कि भगवान परशुराम, जो स्वयं एक महान तपस्वी और शिव भक्त थे, उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यज्ञ से श्रेष्ठ और कोई मार्ग नहीं हो सकता। इस हवन में शहर के गणमान्य नागरिक, विप्र समाज के लोग और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर पूर्णाहुति देंगे और आयोजन की निर्विघ्न सफलता की कामना करेंगे।

22 अप्रैल: युवाओं के जोश से लबरेज ‘आमंत्रण यात्रा’
किसी भी धार्मिक आयोजन की सफलता उसमें समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, मुख्य शोभायात्रा से ठीक एक दिन पहले पूरे आगरा शहर को इस महा-महोत्सव का निमंत्रण देने के लिए एक विशेष ‘आमंत्रण यात्रा’ निकाली जाएगी। समिति के युवा वर्ग के अध्यक्ष शशांक तिवारी ने बताया कि यह आमंत्रण यात्रा बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को सायं 4 बजे से जीवनी मंडी स्थित मातंगी टावर से पूरे गाजे-बाजे और हर्षोल्लास के साथ प्रारंभ होगी।
इस यात्रा में भारी संख्या में युवा दोपहिया वाहनों और पारंपरिक परिधानों में शामिल होंगे। उनके हाथों में धर्म ध्वजाएं होंगी और वे ‘जय श्री परशुराम’ के गगनभेदी उद्घोष के साथ पूरे शहर का भ्रमण करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य घर-घर जाकर लोगों को 23 अप्रैल की मुख्य शोभायात्रा में शामिल होने का न्यौता देना और समाज में एकजुटता का मजबूत संदेश फैलाना है। युवाओं का यह भारी जोश और उत्साह इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और अपनी सनातन संस्कृति से कितनी गहराई से जुड़ी हुई है।
23 अप्रैल: अलौकिक झांकियों से सजी ऐतिहासिक ‘विशाल शोभायात्रा’
महोत्सव का सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित दिन 23 अप्रैल 2026 होगा, जब आगरा की सड़कें भगवान परशुराम की भक्ति के रंग में पूरी तरह से रंगी नजर आएंगी। शोभायात्रा प्रभारी कमल शर्मा ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह भव्य शोभायात्रा 23 अप्रैल को सायं 4 बजे महर्षि परशुराम इंटर कॉलेज (जमुना किनारा) के प्रांगण से अपना नगर भ्रमण शुरू करेगी। शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए यह शोभायात्रा गुजरेगी, जहां जगह-जगह पर सामाजिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा और आरती के माध्यम से इसका भव्य स्वागत किया जाएगा।
शोभायात्रा को एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रूप देने के लिए देश भर से विशेष आकर्षण बुलाए गए हैं। महामंत्री दिलीप भारद्वाज ने बताया कि इस बार यात्रा में दो दर्जन (24) से अधिक अलौकिक और मनमोहक झांकियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें सबसे प्रमुख आकर्षण एटा से आ रहा ‘काली का अखाड़ा’ होगा, जहां अखाड़े के वीर कलाकार अपने हैरतअंगेज पारंपरिक युद्ध कौशल और शौर्य का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा, विशालकाय बाहुबली हनुमान जी, शिव के अघोरी स्वरूप और राधा-कृष्ण के स्वरूप में नृत्य करते हुए कलाकार श्रद्धालुओं को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देंगे। ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजे और शंख ध्वनि के बीच यह शोभायात्रा आगरा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगी।

यह भी पढ़ें
अलौकिक रूप में सजेगा भगवान परशुराम का ‘मेन डोला’
शोभायात्रा का सबसे पवित्र और केंद्रीय आकर्षण भगवान परशुराम जी का ‘मुख्य डोला’ (Main Chariot) होगा। मेन डोला प्रभारी धीरज शर्मा ने बताया कि इस बार भगवान परशुराम जी के रथ को एक अत्यंत भव्य, विशाल और अलौकिक रूप में सजाया जा रहा है। डोले पर भगवान परशुराम की विशाल प्रतिमा विराजमान होगी, जो अपने चिर-परिचित स्वरूप यानी एक हाथ में शास्त्र (वेद) और दूसरे हाथ में शस्त्र (फरसा या परशु) लिए भक्तों को दर्शन देगी। यह स्वरूप समाज को यह संदेश देता है कि ज्ञान और शक्ति दोनों ही समाज के निर्माण और सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
समिति के संयोजक जुगल किशोर शर्मा ने बताया कि इस इतने बड़े आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए पूरी व्यवस्था कर ली गई है। शोभायात्रा की व्यवस्था हेतु समिति के समस्त पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों को उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। अनुशासन बनाए रखने के लिए समिति के सैकड़ों वॉलिंटियर्स शोभायात्रा के साथ-साथ चलेंगे। इसके साथ ही, मीडिया प्रभारी मुकुल जमदग्नि ने जानकारी दी कि इस वृहद आयोजन के सुचारू संचालन के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन के साथ लगातार बैठकें की गई हैं। प्रशासन को शोभायात्रा के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था (Traffic Management), साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त रखने के लिए पहले ही अवगत करा दिया गया है, ताकि आम जनता और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
भगवान परशुराम: न्याय, शौर्य और ज्ञान के शाश्वत प्रतीक
इस पावन अवसर पर भगवान परशुराम के जीवन चरित्र और उनके आदर्शों को याद करना अत्यंत आवश्यक है। महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र के रूप में अवतरित भगवान परशुराम को न्याय और धर्म की स्थापना का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। उनका फरसा केवल युद्ध का अस्त्र नहीं है, बल्कि वह समाज में फैले अन्याय, अत्याचार और अहंकार को जड़ से खत्म करने का एक वैचारिक प्रतीक है। उन्होंने अपने जीवनकाल में यह सिद्ध किया कि जब भी सत्ता मदमस्त हो जाती है और धर्म का पतन होने लगता है, तब समाज को परशुराम जैसे शौर्य और क्रांति की आवश्यकता होती है।
आज के आधुनिक युग में भी उनके विचार पूरी तरह से प्रासंगिक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की रक्षा के लिए केवल ज्ञान प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर उस ज्ञान की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने का साहस भी होना चाहिए। आगरा में आयोजित होने वाला यह जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को भगवान परशुराम के इन्हीं उच्च आदर्शों, न्यायप्रियता और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने का एक बहुत बड़ा सामाजिक प्रयास है।
इस महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता के दौरान आयोजन समिति के कई प्रमुख स्तंभ मौजूद रहे, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया। इनमें मुख्य रूप से राहुल चतुर्वेदी, योगेश भारद्वाज, आचार्य राहुल रावत, शशांक तिवारी, अमित शर्मा, संजय शर्मा, रानू रावत, मुकुल जमदग्नि, धीरज शर्मा, शिवम शर्मा, नितेश भारद्वाज, प्रभाकर शर्मा, शिबा शर्मा, अमोल दीक्षित और नैतिक तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इन सभी पदाधिकारियों ने आगरा शहर की समस्त धर्मप्रेमी जनता से विनम्र अपील की है कि वे 19 अप्रैल के हवन और 23 अप्रैल की भव्य शोभायात्रा में सपरिवार भारी संख्या में सम्मिलित होकर भगवान परशुराम का आशीर्वाद प्राप्त करें और इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाएं।
Trending Tags

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
7579990777



