फतेहपुर सीकरी में आफत बना चेक डैम: बारिश में डूब रही किसानों की फसलें, ब्लॉक प्रमुख ने जल निकासी गेट लगाने की उठाई मांग

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agriculture desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 08 July, 2026, 08:35:12 PM IST.

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tajnews.in | फतेहपुर सीकरी: बरसात के मौसम में ग्रामीण अंचलों के अन्नदाताओं के लिए एक बेहद गंभीर और संकटपूर्ण खबर सामने आ रही है। क्षेत्र के गंभीर नाले पर बने एक चेक डैम के कारण सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि पर जलभराव का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। किसानों की खड़ी फसलों को होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए फतेहपुर सीकरी की ब्लॉक प्रमुख मंजू गुड्डू चाहर ने लघु सिंचाई विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने विभाग से चेक डैम में तुरंत जल निकासी गेट (स्लूइस गेट) लगाने की मांग की है। ब्लॉक प्रमुख ने विभागीय अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र भेजकर कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर यह सुधार नहीं किया गया, तो आगामी भारी बारिश के दौरान आसपास के दर्जनों गांवों के खेत पूरी तरह से जलमग्न हो जाएंगे और गरीब किसानों को भारी आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ेगा।

HIGHLIGHTS
  1. किसानों का संकट: गंभीर नाले पर बना लगभग छह फीट ऊंचा चेक डैम बना मुसीबत, पानी रुकने से हर साल बर्बाद हो रही हैं फसलें।
  2. ब्लॉक प्रमुख की मांग: मंजू गुड्डू चाहर ने लघु सिंचाई विभाग को लिखा पत्र, मानसून के दौरान जलभराव रोकने के लिए स्लूइस गेट लगाने की वकालत।
  3. चार गांव प्रभावित: राजस्थान सीमा के नजदीक बने इस डैम से उन्देरा, दूरा, टीकरी और दौरेठा गांवों के खेतों में भर जाता है बाढ़ का पानी।
  4. दोहरा लाभ: गेट लगने से आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पानी आसानी से निकाला जा सकेगा और बारिश के बाद जल संरक्षण भी संभव होगा।

फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों से प्राप्त जमीनी विवरण के अनुसार, यह पूरी समस्या उन्देरा, दूरा, टीकरी और दौरेठा गांवों से होकर गुजरने वाले गंभीर नाले के कारण उत्पन्न हुई है। राजस्थान सीमा के बिल्कुल समीप, टीकरी और दौरेठा की सीमा पर सिंचाई विभाग द्वारा लगभग छह फीट ऊंचा और चार फीट चौड़ा एक चेक डैम बनाया गया है। इस चेक डैम के निर्माण के समय इंजीनियरों की बड़ी लापरवाही सामने आई, क्योंकि इसमें पानी की विलग निकासी के लिए कोई भी गेट या चैनल नहीं बनाया गया। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि मानसून के दौरान जब नाले में पानी का स्तर तेजी से बढ़ता है, तो डैम के कारण बहाव पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। पानी आगे न बढ़ने की वजह से बैक मारता है और चारों गांवों के निचले खेतों में समूचा पानी भर जाता है, जिससे हर साल किसानों की मेहनत से उगाई गई बाजरा और अन्य खरीफ फसलें सड़कर नष्ट हो जाती हैं।

ब्लॉक प्रमुख मंजू गुड्डू चाहर ने किसानों के इस दर्द को प्रशासनिक पटल पर प्रमुखता से उठाते हुए लघु सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों को विधिक व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इस समस्या से क्षेत्र के सैकड़ों किसान लंबे समय से मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। किसानों को हर वर्ष लाखों रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने विभाग से पुरजोर मांग की है कि इस मानसून सत्र के दौरान खेतों को डूबने से बचाने के लिए चेक डैम के बीच में एक मजबूत लोहे का स्लूइस गेट (जल निकासी द्वार) तुरंत स्थापित किया जाए। इस गेट के लग जाने से जब भी नाले में पानी का दबाव बढ़ेगा, तो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा, जिससे खेतों में जलभराव की नौबत ही नहीं आएगी।

इसके अतिरिक्त, ब्लॉक प्रमुख ने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि यह व्यवस्था केवल किसानों की फसलों की सुरक्षा ही नहीं करेगी, बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण की दृष्टि से भी एक बेहतरीन मॉडल साबित होगी। उन्होंने कहा कि मानसून की समाप्ति के बाद इस गेट को वापस पूरी तरह से बंद किया जा सकेगा, जिससे नाले का पानी रुक जाएगा और आने वाले रबी सत्र (गेहूं और सरसों की बुवाई) के लिए क्षेत्र का भूजल स्तर (वाटर टेबल) बेहतर बना रहेगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जनहित और किसान हित को सर्वोपरि रखते हुए सिंचाई विभाग को इस संवेदनशील मामले में बिना किसी प्रशासनिक विलंभ के तुरंत धरातल पर कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए, ताकि चालू बरसात के मौसम में गरीब अन्नदाताओं की खून-पसीने की कमाई और फसल दोनों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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