Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Friday, 12 June 2026, 06:45:18 PM IST

शाहजहाँपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जनपद में मिलिट्री इंटेलीजेंस और स्थानीय पुलिस के संयुक्त प्रयासों से सेना के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले एक बेहद चौंकाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। थाना रोजा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाके दुर्गा इंक्लेव के निवासी महज 21 वर्षीय युवक आर्यन वर्मा ने भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित और अति-वरिष्ठ ‘ब्रिगेडियर’ पद की फर्जी पहचान बनाकर अपना एक नकली सैन्य साम्राज्य खड़ा कर रखा था। वह सेना के उच्च रैंक के अधिकारियों की तरह बकायदा स्टार और फ्लैग (झंडा) लगी लग्जरी टाटा हैरियर कार, वर्दी,Regimental Cane (सैन्य छड़ी) और बकायेदारों के साथ घूमता था। इसकी भनक जब सेना के खुफिया विभाग को लगी तो सुरक्षा एजेंसियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सेना के अधिकारी पिछले अप्रैल महीने से ही इस शातिर बहुरूपिये को दबोचने के लिए जाल बिछा रहे थे, लेकिन वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। शुक्रवार सुबह सैन्य अधिकारियों ने एक बेहद सटीक और चालाकी भरी रणनीति के तहत उसे कैंट क्षेत्र स्थित शहीद संग्रहालय (म्यूजियम) में दबोच लिया। आरोपी से वर्तमान में बरेली से आई आर्मी इंटेलीजेंस की टीम बेहद कड़ाई से पूछताछ कर रही है, जिसके बाद उसे स्थानीय पुलिस प्रशासन के सुपुर्द किया जाएगा।
सैन्य सूत्रों और स्थानीय पुलिस से प्राप्त विस्तृत और खोजी विवरण के अनुसार, अभियुक्त आर्यन वर्मा लंबे समय से शाहजहाँपुर, बरेली और इसके आस-पास के जनपदों में भारतीय सेना के ब्रिगेडियर की फुल यूनिफॉर्म (औपचारिक सैन्य वर्दी) पहनकर खुलेआम घूमता था और सरकारी विभागों व आम जनता पर अपना धौंस जमाता था। जब इस सनसनीखेज मामले की खुफिया इनपुट देश की सुरक्षा एजेंसियों तक पहुँची, तो मिलिट्री इंटेलीजेंस के अधिकारियों के कान खड़े हो गए। देश की संप्रभुता और सेना की प्रतिष्ठा से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने अप्रैल माह से ही उसकी हर गतिविधि पर गुप्त रूप से नजर रखनी शुरू कर दी थी। वह इतना शातिर था कि बार-बार अपनी गाड़ियों और सुरक्षा घेरे को बदलकर चकमा दे रहा था। अंततः सेना के विंग ने उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक बेहद दिलचस्प ‘ट्रैप’ (जाल) तैयार किया, जिसे बेहद गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया।
अधिकारियों ने आर्यन वर्मा के अहंकार और उसके छद्म वेश का फायदा उठाने के लिए एक आम नागरिक बनकर उसके मोबाइल पर संपर्क किया। फोन करने वाले सैन्य अधिकारी ने उसे बताया कि शाहजहाँपुर कैंट क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठित शहीद म्यूजियम (संग्रहालय) परिसर में एक विशेष प्रेरक सत्र का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ भारतीय सेना में भर्ती होने के इच्छुक स्थानीय युवाओं और अभ्यर्थियों को देश सेवा के प्रति जागरूक करने के लिए एक ‘ब्रिगेडियर’ स्तर के अधिकारी के मुख्य ओजस्वी भाषण और मार्गदर्शन की नितांत आवश्यकता है। इस बड़े सम्मान और आमंत्रण के झांसे में आकर बहुरूपिया आर्यन वर्मा पूरी तरह जाल में फंस गया। शुक्रवार सुबह वह निर्धारित समयानुसार अपनी टाटा हैरियर कार, जिस पर बकायदा सेना के आधिकारिक स्टार और ब्रिगेडियर रैंक का फ्लैग लगा हुआ था, उससे अत्यंत वीआईपी (VIP) अंदाज में ठाट-बाट के साथ सीधे शहीद संग्रहालय के मुख्य द्वार पर पहुँच गया।
जैसे ही गाड़ी संग्रहालय परिसर के भीतर आकर रुकी, वहाँ सादे कपड़ों में पहले से ही पूरी मुस्तैदी के साथ घात लगाकर बैठे सेना के जांबाज जवानों ने बिना कोई अतिरिक्त मौका दिए कार को चारों तरफ से घेर लिया और नकली ब्रिगेडियर को उसकी कार से खींचकर अपनी गिरफ्त में ले लिया। सेना की इस औचक दबिश से परिसर में मौजूद उसके सुरक्षाकर्मी और ड्राइवर पूरी तरह सन्न रह गए। तलाशी के दौरान कार के भीतर से और अभियुक्त के पास से कई गंभीर और आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गईं। उसके पास से एक अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाला फर्जी पहचान पत्र (ID Card) मिला है, जिस पर ‘आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज’ (AFMC) के डीन की फर्जी मुहर (सील) और हस्ताक्षर अंकित थे। इसके अतिरिक्त, वह अपने हाथ में थल सेना के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उपयोग की जाने वाली विशेष ‘आर्मी रेजिमेंटल केन’ (सैन्य छड़ी) भी रखता था, जो उसके वेश को असली लुक देती थी। पुलिस को उसकी कमर से एक अत्यंत परिष्कृत नकली पिस्टल भी मिली है, जिसका प्रयोग वह लोगों को डराने और अपनी सुरक्षा का भ्रम पैदा करने के लिए करता था।
इस पूरे सनसनीखेज फर्जीवाड़े का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि आर्यन वर्मा अकेले इस अपराध को अंजाम नहीं दे रहा था, बल्कि उसने बकायदा एक निजी सुरक्षा दस्ता भी किराए पर ले रखा था। उसकी कार के आगे-पीछे दो तगड़े बाउंसर चलते थे, जिन्हें वह आम लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ‘एनएसजी (NSG) कमांडो’ के रूप में पेश करता था। वह हर जगह यह दावा करता था कि देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं के तहत उसे केंद्र सरकार से ‘स्पेशल सिक्योरिटी’ (विशेष सुरक्षा आवरण) प्राप्त है। पुलिस ने जब उसके निजी ड्राइवर को हिरासत में लेकर तलाशी ली, तो उसके पास से भी एक जाली सरकारी कर्मचारी पहचान पत्र बरामद हुआ, जिसका उपयोग वे टोल प्लाजा और पुलिस चेकिंग से बचने के लिए करते थे। शाहजहाँपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) सौरभ दीक्षित ने आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि मिलिट्री पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई के बाद आरोपी अभी सेना की कस्टडी में है। बरेली से विशेष रूप से बुलाई गई आर्मी इंटेलीजेंस की कोर टीम राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह पता लगा रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे सेना के किसी अंदरूनी दस्तावेज की चोरी या कोई बड़ा गिरोह तो काम नहीं कर रहा है। जैसे ही सेना अपनी पूछताछ पूरी कर आरोपी को पुलिस प्रशासन को सौंपेगी, थाना रोजा में सुसंगत और गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई और जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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