Uttar Pradesh Desk, Taj News | Tuesday, April 28, 2026, 08:45:30 PM IST

बरेली: बेरोजगारी आज के दौर की एक सबसे बड़ी और गंभीर समस्या बन चुकी है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ सफेदपोश शातिर अपराधी युवाओं के सुनहरे भविष्य के सपनों का सौदा करते हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस ने एक ऐसे ही बेहद चौंकाने वाले और हाई-प्रोफाइल (High Profile) ठगी के सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, बरेली में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये डकारने वाली तीन शातिर युवतियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये युवतियां कोई मामूली ठग नहीं थीं, बल्कि ये खुद को आईएएस (IAS) और एसडीएम (SDM) बताकर समाज में अपना रौब झाड़ती थीं। पुलिस ने इनके पास से लाखों रुपये की नकदी, लग्जरी कार, फर्जी दस्तावेज और लैपटॉप बरामद किए हैं। बैंक खातों में जमा 55 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम को भी फ्रीज कर दिया गया है। थाना बारादरी पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने ठगी के एक बहुत बड़े और संगठित नेटवर्क की कमर तोड़कर रख दी है। आइए, इस फर्जी आईएएस गैंग के काम करने के तरीके, लग्जरी लाइफस्टाइल और पुलिस की इस शानदार जांच पड़ताल का बहुत ही विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

ऐसे खुला राज: पीड़िता ने दर्ज कराई थी शिकायत
इस पूरे फर्जीवाड़े और सुनियोजित ठगी का पर्दाफाश तब हुआ जब एक पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस का दरवाजा खटखटाया। अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) और क्षेत्राधिकारी नगर तृतीय पंकज श्रीवास्तव ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस पूरे ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि थाना बारादरी क्षेत्र के फाइक एन्क्लेव फेस-2 की रहने वाली प्रीति लयल ने 26 अप्रैल को थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। प्रीति लयल ने अपनी शिकायत में बताया कि वह एक सरकारी नौकरी की तलाश में थीं और इसी दौरान उन्हें इस शातिर गैंग ने अपने जाल में फंसा लिया।
पीड़िता प्रीति लयल के अनुसार, साल 2022 में उनकी मुलाकात शिखा पाठक (असली नाम शिखा शर्मा) नाम की एक युवती से हुई थी। शिखा ने प्रीति का विश्वास जीतने के लिए एक बहुत ही शातिर कहानी गढ़ी। उसने अपनी सगी बहन विप्रा शर्मा को एक बड़ा अधिकारी बताते हुए कहा कि वह उत्तर प्रदेश शासन में एसडीएम (SDM) के पद पर तैनात है। शिखा ने दावा किया कि उसकी बहन की शासन में सीधी और गहरी पहुंच है और वह आसानी से किसी भी विभाग में सरकारी नौकरी लगवा सकती है। बेरोजगार और नौकरी की तलाश में परेशान प्रीति इस सफेदपोश झांसे में आ गईं। आरोपियों ने यूपीएसएसएससी (UPSSSC) के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर पक्की नौकरी दिलाने का पक्का वादा किया। इस नौकरी के एवज में प्रीति और उनके तीन अन्य परिचितों से किश्तों में कुल 11 लाख रुपये की मोटी रकम ठग ली गई।
फर्जी नियुक्ति पत्र और लखनऊ से डाक भेजने का खेल
इस शातिर महिला गैंग का काम करने का तरीका (Modus Operandi) किसी भी पेशेवर साइबर क्रिमिनल से कम नहीं था। 11 लाख रुपये ऐंठने के बाद जब पीड़ितों ने नौकरी और नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) की मांग शुरू की, तो आरोपियों ने एक नया खेल खेला। उन्होंने अपने लैपटॉप का इस्तेमाल करके हूबहू असली दिखने वाले सरकारी नियुक्ति पत्र फर्जी तरीके से तैयार किए। पीड़ितों को पूरी तरह से विश्वास दिलाने के लिए आरोपियों ने इन फर्जी दस्तावेजों को सीधे ईमेल (Email) और व्हाट्सएप (WhatsApp) के माध्यम से भेजा।
इतना ही नहीं, आरोपियों का शातिराना दिमाग यहीं तक सीमित नहीं था। वे जानते थे कि अगर स्थानीय स्तर से डाक भेजी गई तो पीड़ितों को शक हो सकता है। इसलिए वे खुद लखनऊ (Lucknow) जाते थे और वहां के डाकघर से स्पीड पोस्ट के जरिए ये फर्जी नियुक्ति पत्र पीड़ितों के घर भेजते थे। लिफाफे पर उत्तर प्रदेश शासन की मुहर और लखनऊ की डाक टिकट देखकर पीड़ितों को पक्का यकीन हो जाता था कि उनकी नौकरी वास्तव में लग गई है। लेकिन जब पीड़ितों ने संबंधित सरकारी कार्यालयों में जाकर अपनी ज्वाइनिंग (Joining) के बारे में जानकारी ली, तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। वहां उन्हें बताया गया कि ऐसे कोई नियुक्ति पत्र विभाग द्वारा जारी ही नहीं किए गए हैं। खुद के ठगे जाने का अहसास होने पर पीड़ितों ने अपना पैसा वापस मांगा, लेकिन आरोपियों ने पैसा लौटाने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां देने लगीं।
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कार पर लिखा ‘SDM FR’, लग्जरी लाइफस्टाइल का शौक
इस गैंग की मुख्य सरगना डॉक्टर विप्रा शर्मा थी। विप्रा शर्मा की वेशभूषा, बातचीत का तरीका और रहन-सहन किसी उच्च अधिकारी से बिल्कुल भी कम नहीं था। वह खुद को खुलेआम एक आईएएस (IAS) अधिकारी और एसडीएम बताती थी। आम जनता पर अपना पुलिसिया और प्रशासनिक रौब झाड़ने के लिए विप्रा शर्मा ने एक बेहद महंगी और लग्जरी महिंद्रा XUV 700 (Mahindra XUV 700) कार खरीद रखी थी। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि उसने इस कार के शीशे पर बड़े-बड़े अक्षरों में “SDM FR उत्तर प्रदेश सरकार” लिखवा रखा था। इस नीली बत्ती और वीआईपी (VIP) नंबर वाली कार को देखकर कोई भी आसानी से विश्वास कर लेता था कि वह वास्तव में कोई बड़ी अधिकारी है।
पुलिस अधिकारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि विप्रा शर्मा की सगी बहन शिखा शर्मा और उनकी एक अन्य साथी दीक्षा पाठक इस गैंग के लिए नए शिकार तलाशने का काम करती थीं। वे शहर के कोचिंग संस्थानों, कैफे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जाकर बेरोजगार युवाओं से दोस्ती करती थीं और फिर उन्हें अपनी ‘अधिकारी बहन’ की बातों में फंसा लेती थीं। पुलिस पूछताछ में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि ये तीनों युवतियां साल 2021-22 से ही इस गोरखधंधे में लिप्त थीं। उन्होंने बेरोजगारों के पसीने की कमाई से ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जी। ठगी के पैसों से उन्होंने न केवल महंगी कारें खरीदीं, बल्कि बरेली के पॉश इलाके पवन विहार (Pawan Vihar) में एक आलीशान मकान भी खरीद लिया था। इसी पवन विहार वाले मकान को उन्होंने फर्जी दस्तावेज और नियुक्ति पत्र तैयार करने का अपना मुख्य अड्डा बना रखा था।
पुलिस का एक्शन: 55 लाख फ्रीज, 3 युवतियां जेल में
शिकायत दर्ज होने के बाद थाना बारादरी पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना और सर्विलांस (Surveillance) की मदद से 27 अप्रैल को शहर के डेंटल कॉलेज रोड पर घेराबंदी की। वहां से पुलिस ने इस गैंग की तीनों मुख्य आरोपियों— डॉक्टर विप्रा शर्मा, शिखा शर्मा और दीक्षा पाठक को धर दबोचा। इनकी गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने इनके ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, तो वहां से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 4.50 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की है। इसके अलावा 10 बैंक चेकबुक, 4 महंगे मोबाइल फोन (जिनमें आईफोन और वीवो शामिल हैं), 2 आधुनिक लैपटॉप और 3 बैंक पासबुक भी सीज किए गए हैं। जब पुलिस ने इन बैंक खातों की गहराई से जांच की, तो उनके होश उड़ गए। इन विभिन्न बैंक खातों में कुल 55 लाख रुपये की भारी रकम जमा थी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन सभी खातों को फ्रीज (Freeze) करवा दिया है। इसके अलावा, ठगी के पैसों से खरीदी गई उस लग्जरी महिंद्रा XUV 700 कार को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।
पुलिस ने इन तीनों शातिर युवतियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (छल के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) सहित बीएनएस (BNS) की अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस का मानना है कि इस गैंग ने बरेली और आसपास के जिलों में कई अन्य बेरोजगार युवाओं को भी अपना शिकार बनाया होगा। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क और इनसे जुड़े अन्य सफेदपोश लोगों की सरगर्मी से तलाश में जुटी है। यह घटना बेरोजगार युवाओं के लिए एक बहुत बड़ा सबक है कि वे किसी भी शॉर्टकट या दलालों के चक्कर में पड़कर अपनी गाढ़ी कमाई न गंवाएं।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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