Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Sunday, 31 May 2026, 12:45:15 PM IST

आगरा: ताजनगरी के अत्यंत प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू (एस.एन.) मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के पावन अवसर पर एक वृहद और व्यापक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष संगोष्ठी और जन-जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य चिकित्सालय में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को तंबाकू व धूम्रपान के जानलेवा दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना था। मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा के कुशल एवं विधिक निर्देशन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में ओपीडी (OPD) ब्लॉक और वार्डों से आए लगभग 150 से 200 मरीजों एवं उनके परिजनों ने अत्यंत उत्साह के साथ बढ़-चढ़कर भाग लिया। चिकित्सा विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ उपस्थित जनसमुदाय को समझाया कि तंबाकू का नशा केवल एक खराब आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक व शारीरिक विसंगति है, जिससे वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान एस.एन. मेडिकल कॉलेज के दूरदर्शी प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने संस्थान की ओर से जनसामान्य के नाम एक अत्यंत भावुक और विधिक संदेश जारी किया। प्रधानाचार्य ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि तंबाकू का जानलेवा सेवन न केवल इसे चबाने या फूंकने वाले व्यक्ति के बहुमूल्य स्वास्थ्य को दीमक की तरह चाट जाता है, बल्कि कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों के इलाज में पूरे परिवार को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद कर देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे इस प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज का मुख्य उद्देश्य केवल बीमारियों का इलाज करना ही नहीं है, बल्कि चिकित्सालय परिसर में आने वाले प्रत्येक मरीज और तीमारदार को इस जानलेवा सामाजिक बुराई और लत के खिलाफ मानसिक रूप से तैयार व जागरूक करना है। उन्होंने विशेष रूप से देश की युवा पीढ़ी और छात्रों का आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाएं और तंबाकू निर्मित उत्पादों से हमेशा दूरी बनाए रखें।
मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने मुख्य वक्ता के रूप में संगोष्ठी को संबोधित करते हुए इस वर्ष के तंबाकू निषेध दिवस की वैश्विक थीम “तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बच्चों की सुरक्षा” (Protecting Children from Tobacco Industry Interference) के वैज्ञानिक and विधिक पहलुओं पर व्यापक प्रकाश डाला। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तंबाकू निर्माता कंपनियां विभिन्न आकर्षक और भ्रामक विज्ञापनों व फ्लेवर्ड उत्पादों के माध्यम से सीधे तौर पर स्कूली बच्चों और अबोध युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कुत्सित कोशिशें कर रही हैं। डॉ. विशाल सिन्हा ने जोर देकर कहा कि चिकित्सा विज्ञान के अनुसार तंबाकू निर्भरता (टोबैको डिपेंडेंसी) एक पूरी तरह से उपचार योग्य बीमारी है। यदि कोई व्यक्ति दृढ़ संकल्प कर ले और उसे उचित चिकित्सकीय परामर्श, नियमित काउंसलिंग, बिहेवियरल थेरेपी और परिवार का पूरा संबल व सहयोग मिले, तो वह इस जानलेवा लत से हमेशा के लिए मुक्त हो सकता है।
संगोष्ठी में विभाग की वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य डॉ. कश्यपी गर्ग ने तंबाकू के सेवन से मानव शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ने वाले भयंकर शारीरिक एवं मानसिक आघातों का एक विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने नैदानिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और खैनी का अनवरत सेवन मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों (COPD) और साइलेंट हैमरेज या हार्ट अटैक (हृदय रोग) का सबसे मुख्य और प्राथमिक कारण है। इसके अतिरिक्त, यह इंसान के तंत्रिका तंत्र को कमजोर कर अत्यधिक अवसाद और घबराहट जैसी गंभीर मानसिक विसंगतियों को भी जन्म देता है। उन्होंने उपस्थित लोगों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि तंबाकू को आज ही त्यागने से न केवल जानलेवा बीमारियों का खतरा टल जाता है, बल्कि इंसान के जीवन की समग्र गुणवत्ता और काम करने की क्षमता में एक अभूतपूर्व विधिक व जादुई सुधार आता है।
चिकित्सालय की वरिष्ठ रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. विदुषी एवं डॉ. अदिति ने जागरूकता सत्र में भाग ले रहे मरीजों और तीमारदारों को दैनिक जीवन में तंबाकू छोड़ने के व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक उपाय बेहद सरल भाषा में समझाए। महिला डॉक्टरों ने कहा कि जब भी किसी मरीज को निकोटीन की तीव्र तलब महसूस हो, तो वह तुरंत अपना ध्यान किसी अन्य रचनात्मक कार्य में बटाए, पर्याप्त मात्रा में पानी पिए या सौंफ और मिश्री का सेवन करे। उन्होंने बताया कि नशे की इस जंजीर को तोड़ने के लिए शुरुआती 72 घंटे सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते हैं, जिसमें इंसान का दृढ़ संकल्प, डॉक्टर का विधिक मार्गदर्शन और उसके परिवार का भावनात्मक साथ मिलकर किसी भी पुराने से पुराने आदी व्यक्ति को पूरी तरह से तंबाकू मुक्त और स्वस्थ नागरिक बना सकते हैं।
समारोह के मुख्य प्रशासनिक सत्र में डॉक्टरों द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उत्साहजनक आंकड़े की घोषणा की गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि एस.एन. मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के अंतर्गत नियमित रूप से संचालित होने वाले विशेष ‘तंबाकू निषेध एवं परामर्श केंद्र’ (टोबैको सेसेशन सेंटर – TCC) में अब तक लगभग 200 से अधिक तंबाकू पर निर्भर व्यक्तियों का विधिक पंजीकरण किया जा चुका है। इस आधुनिक परामर्श केंद्र पर तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और गुटखे की लत छोड़ने के इच्छुक सभी नागरिकों को विशेषज्ञ मनोरोग चिकित्सकों द्वारा पूरी तरह से मुफ्त काउंसलिंग, एडवांस्ड निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) और अत्यंत आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती हैं। इस केंद्र की वजह से ताजनगरी और आस-पास के जिलों के सैकड़ों लोग आज एक सामान्य और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
समारोह के अंतिम चरण में ओपीडी ब्लॉक में एक अत्यंत जीवंत और खुला संवाद सत्र (इरेक्टिव सेशन) आयोजित किया गया। इस सत्र में उपस्थित दर्जनों ग्रामीण और शहरी तीमारदारों ने अपने परिजनों की नशे की लत को लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे सवाल किए और अपनी विधिक व व्यावहारिक शंकाओं का मौके पर ही त्वरित समाधान पाया। कई मरीजों ने डॉक्टरों के परामर्श से प्रभावित होकर मंच के सम्मुख ही तंबाकू के पैकेट फेंककर भविष्य में कभी भी नशा न करने की सामूहिक शपथ ली। पूरे कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन चिकित्सालय के सभी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तीमारदारों द्वारा ‘तंबाकू मुक्त आगरा’ और ‘स्वस्थ भारतीय समाज’ के निर्माण के लिए जनसामान्य में स्वास्थ्य जागरूकता की अलख जगाने के पवित्र संकल्प के साथ हुआ।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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