Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Tuesday, 26 May 2026, 09:42:44 AM IST

Agra Labhchand Market SC Case के अंतर्गत ताजनगरी के हृदय स्थल राजा मंडी बाजार स्थित ऐतिहासिक लाभचंद्र मार्केट ध्वस्तीकरण प्रकरण में माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक अत्यंत कड़ा और ऐतिहासिक रुख अख्तियार किया है। अमरजोत सिंह सूरी बनाम अरविंद मल्लप्पा बंगारी के इस बहुचर्चित विधिक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को न्यायिक आदेशों का अक्षर-अक्षर अनुपालन सुनिश्चित करने का एक अंतिम अवसर प्रदान किया है। न्यायालय की इस उच्च स्तरीय अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान देश के अटॉर्नी जनरल द्वारा प्रस्तुत किए गए उस दावे पर याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकीलों ने गंभीर आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि ध्वस्तीकरण की विधिक कार्रवाई को पूरी तरह अंजाम दिया जा चुका है। याचिकाकर्ता ने इस शासकीय दावे को धरातलीय वास्तविकताओं के सर्वथा विपरीत, तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत और भ्रामक निरूपित किया है। न्यायालय ने समूचे परिदृश्य की विधिक समीक्षा करने के उपरांत आदेशों के पूर्ण अनुपालन अथवा विस्तृत हलफनामा दायर करने की समय सीमा तय कर दी है, जिससे प्रशासनिक सर्किल में भारी खलबली परिलक्षित हो रही है।
अवमानना याचिका की सुनवाई में तीखी बहस, देश के सर्वोच्च विधिक अधिकारी के वक्तव्य पर कड़ा प्रतिवाद
प्राप्त न्यायिक विवरण के अनुसार, आगरा के राजा मंडी बाजार स्थित लाभचंद्र接收 मार्केट के ध्वस्तीकरण आदेश के उल्लंघन से संबंधित अवमानना याचिका पर सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत में तीखी विधिक बहस परिलक्षित हुई। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की द्विसदस्यीय खंडपीठ के सम्मुख जब इस मामले को सूचीबद्ध किया गया, तो देश के अटॉर्नी जनरल ने पैरवी करते हुए बेंच को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि लाभचंद्र मार्केट में पूर्व में पारित ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश का पूरी तरह से अनुपालन किया जा चुका है और अब वहां किसी भी प्रकार का अवैध ढांचा या विधिक अतिक्रमण शेष नहीं है। उन्होंने न्यायालय से इस अवमानना याचिका को बंद करने का आग्रह भी किया।
शासकीय तंत्र के इस वक्तव्य पर याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट रूम के भीतर ही कड़े शब्दों में प्रतिवाद दर्ज कराया। याचिकाकर्ता के कौंसिल ने अटॉर्नी जनरल के इस बयान को तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत, भ्रामक और सत्य से परे निरूपित किया। उन्होंने तर्क प्रस्तुत किया कि धरातलीय स्तर पर ध्वस्तीकरण की कोई वास्तविक विधा पूरी नहीं की गई है और अवैध निर्माण अभी भी जस का तस खड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत से मांग की कि भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने के कारण प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना की विधिक धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4 अगस्त की अंतिम समय सीमा निर्धारित, विस्तृत शपथ पत्र के साथ साक्ष्य प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश
दोनों पक्षों के तर्कों और विधिक प्रतिवाद का गहराई से अवलोकन करने के उपरांत, खंडपीठ ने वर्तमान यथास्थिति को देखते हुए मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने अवमाननाकर्ताओं को किसी भी त्वरित दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व अपनी विधिक स्थिति स्पष्ट करने और आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक और अंतिम अवसर प्रदान किया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से परिलक्षित किया है कि यदि आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन नहीं किया गया है, तो प्रतिवादी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से एक विस्तृत हलफनामा दायर कर अपना विधिक पक्ष न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत करें।
इसके साथ ही, माननीय पीठ ने याचिकाकर्ता को भी यह विधिक छूट प्रदान की है कि वे हलफनामे के माध्यम से धरातलीय स्थिति को स्पष्ट करने वाले प्रासंगिक और प्रमाणित दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड पर दाखिल कर सकते हैं। सर्वोच्च अदालत ने यह कड़ा संदेश दिया है कि विधिक आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस हाई-प्रोफाइल विधिक विवाद की अगली कड़क सुनवाई के लिए माननीय न्यायालय द्वारा 4 अगस्त 2026 की अंतिम तिथि मुकर्रर की गई है, जिससे आगरा के प्रशासनिक और भू-माफिया गलियारों में हड़कंप व्याप्त है।
कब्जे में बने रहने के लिए किराए के भुगतान का कोई विधिक दायित्व नहीं, न्याय के संतुलन पर सर्वोच्च टिप्पणी
सुनवाई के अंतिम चरण में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने न्याय के संतुलन को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी विधिक टिप्पणी भी की। खंडपीठ ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि यदि कोई विवादित ढांचा अवैध कब्जे अथवा विधिक आदेशों के उल्लंघन के दायरे में आता है, तो उस ढांचे के भीतर अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए किसी कथित समझौते या विधा के तहत किराया देने का कोई विधिक अथवा विधिक रूप से बाध्यकारी दायित्व याचिकाकर्ता पर बिल्कुल नहीं बनता है।
न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि यदि किसी पक्ष पर कोई वित्तीय या विधिक देनदारी बकाया है, तो न्याय के समरूप संतुलन को साधने के लिए उसे आगामी सुनवाई की तिथि से पूर्व हर हाल में चुकाया जाना अनिवार्य होगा। राजा मंडी के इस लाभचंद्र मार्केट प्रकरण ने अब एक बड़ा विधिक रूप ले लिया है, जिसकी सीधी आंच जिला प्रशासन और नगर निगम के उन अधिकारियों पर भी आ सकती है जिन्होंने अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को ध्वस्तीकरण की आधी-अधूरी और रिपोर्ट प्रेषित की थी। बाह और पिन्हाट क्षेत्र के प्रबुद्ध विधिक जानकारों का मानना है कि 4 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई ताजनगरी के रियल एस्टेट और विधिक परिदृश्य की दिशा तय करने में एक युगांतकारी मील का पत्थर सिद्ध होगी। पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी इस मामले की वैधानिक कागजी कार्रवाई पर अपनी पैनी प्रशासनिक नजर बनाए हुए हैं।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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