Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Saturday, April 11, 2026, 01:50:30 PM IST

सीतापुर: मेडिकल के पेशे को समाज में भगवान का दूसरा रूप माना जाता है, और एक ब्लड बैंक (Blood Bank) वह पवित्र जगह होती है जहां इंसानियत के नाते खून दान करके लोगों की डूबती हुई सांसों को बचाया जाता है। लेकिन क्या हो जब जिंदगी बचाने वाला यही ब्लड बैंक किसी की बेरहम मौत का ‘बूचड़खाना’ बन जाए? उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला और खौफनाक मामला सामने आया है। यहां के नैपालपुर इलाके में स्थित एक ब्लड बैंक के भीतर, काम को लेकर हुए एक मामूली से विवाद में इंसानियत की सरेआम हत्या कर दी गई। ब्लड बैंक संचालक (मैनेजर) के 40 वर्षीय बेटे शिवेश सिंह ने अपने अहंकार और गुंडागर्दी के नशे में चूर होकर 35 वर्षीय लैब टेक्नीशियन सतीश यादव के सिर में बिल्कुल सटाकर गोली मार दी। सतीश की मौके पर ही तड़प-तड़प कर दर्दनाक मौत हो गई। हत्यारे का दुस्साहस यहीं नहीं रुका; उसने खुद को बचाने के लिए इस नृशंस हत्या को ‘आत्महत्या’ (Suicide) का रूप देने की एक बेहद शातिर और खौफनाक साजिश भी रची। लेकिन यूपी पुलिस की तेज-तर्रार फोरेंसिक जांच ने चंद घंटों में ही इस पूरे खूनी खेल का पर्दाफाश कर दिया और हत्यारे को बेनकाब कर सलाखों के पीछे धकेल दिया है।
रात 2 बजे का वह खौफनाक मंजर: जिंदगी बचाने की जगह हुआ कत्ल
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, यह पूरी दिल दहला देने वाली वारदात 10 अप्रैल की देर रात करीब 2:00 बजे की है। सीतापुर शहर के व्यस्ततम नैपालपुर इलाके में स्थित इस निजी ब्लड बैंक में अमूमन रात के समय भी मरीजों के तीमारदारों की आवाजाही लगी रहती है। 35 वर्षीय सतीश यादव यहां बतौर लैब टेक्नीशियन काम करते थे। सतीश एक बेहद मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जिन पर अपने परिवार के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी थी। घटना वाली रात भी सतीश अपनी नाइट ड्यूटी (Night Shift) पर पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे। उसी वक्त ब्लड बैंक के संचालक का 40 वर्षीय बेटा शिवेश सिंह वहां पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि शिवेश सिंह अक्सर ब्लड बैंक के कामकाज में दखलंदाजी करता था और कर्मचारियों पर अपना रोब झाड़ता था। रात 2 बजे किसी मेडिकल प्रोटोकॉल या काम के तरीके को लेकर शिवेश और सतीश के बीच कहासुनी शुरू हो गई। सतीश ने अपने पेशेवर अनुभव के आधार पर शिवेश को कुछ समझाने की कोशिश की, जो शिवेश के झूठे अहंकार (Ego) को गहरी ठेस पहुंचा गया। रसूख और सत्ता के नशे में चूर शिवेश ने अपना आपा खो दिया। बात इतनी बढ़ गई कि शिवेश ने अचानक अपनी कमर से एक अवैध असलहा (तमंचा) निकाला और बिना कुछ सोचे-समझे सतीश यादव के सिर पर तान कर ट्रिगर दबा दिया। रात के सन्नाटे में गोली की एक गगनभेदी आवाज गूंजी और सतीश खून से लथपथ होकर ब्लड बैंक के फर्श पर गिर पड़े। कुछ ही पलों में सतीश ने वहीं दम तोड़ दिया।
कातिल की शातिर चाल: हत्या को आत्महत्या साबित करने का गंदा खेल
सतीश यादव को मौत के घाट उतारने के बाद शिवेश सिंह के चेहरे पर कोई पश्चाताप नहीं था, बल्कि उसके शातिर दिमाग ने खुद को कानून के फंदे से बचाने की साजिश रचना शुरू कर दिया था। उसने सतीश के शव को इस तरह से व्यवस्थित किया जैसे कि उसने खुद को गोली मारी हो। शिवेश ने हत्या में इस्तेमाल किए गए उस तमंचे को बहुत ही चालाकी से सतीश यादव के हाथ के पास रख दिया। उसने क्राइम सीन (Crime Scene) से अपने फिंगरप्रिंट्स मिटाने की कोशिश की और ब्लड बैंक में मौजूद अन्य कर्मचारियों को डरा-धमका कर चुप रहने की हिदायत दी।
इसके बाद शिवेश ने ही पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करके यह झूठी सूचना दी कि उनके ब्लड बैंक में एक लैब टेक्नीशियन ने डिप्रेशन में आकर अपनी ही कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलते ही सीतापुर पुलिस की पीआरवी और स्थानीय थाने की फोर्स भारी संख्या में मौके पर पहुंच गई। पुलिस को पहली नजर में घटनास्थल का नजारा देखकर लगा कि शायद यह वास्तव में एक सुसाइड का मामला है। लेकिन पुलिस अधिकारियों की पैनी नजरों से वह शातिर कातिल ज्यादा देर तक बच नहीं सका। खून के छींटों (Blood Spatter) की दिशा और हथियार के रखे जाने के तरीके ने पुलिस के मन में गहरे संदेह के बीज बो दिए थे।
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फोरेंसिक जांच से खुला मौत का राज, सख्ती के आगे टूटा कातिल
सीतापुर पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल फोरेंसिक (Forensic) टीम और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स को मौके पर बुला लिया। टीम ने जब शव की बारीकी से जांच की, तो कई अहम खुलासे हुए। आमतौर पर जब कोई व्यक्ति खुद को गोली मारता है, तो उसके हाथों पर गनपाउडर (Gunpowder Residue) के निशान छूट जाते हैं, लेकिन सतीश यादव के हाथों पर ऐसा कोई निशान नहीं था। इसके अलावा, सिर में जिस एंगल (कोण) से गोली लगी थी, वह खुद से मारना लगभग नामुमकिन था। इन वैज्ञानिक सबूतों ने शिवेश सिंह की गढ़ी हुई ‘सुसाइड थ्योरी’ की धज्जियां उड़ा दीं।
सबूत हाथ में आते ही पुलिस ने अपना असली रंग दिखाया। शक की सुई शिवेश सिंह पर ही घूम रही थी। पुलिस ने ब्लड बैंक के दरवाजों को बंद करवाया और शिवेश को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी। पहले तो वह अपने रसूख की धौंस जमाता रहा और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा। लेकिन जब पुलिस ने फोरेंसिक सबूतों को उसके सामने रखा और कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया। शिवेश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि काम को लेकर हुए विवाद और अपना ईगो हर्ट होने की वजह से उसने सतीश की हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार को जब्त कर लिया है और आरोपी के खिलाफ हत्या, सबूत मिटाने और गुमराह करने की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।
रोता-बिलखता परिवार और स्वास्थ्य कर्मियों में भारी आक्रोश
जैसे ही सतीश यादव की हत्या की खबर उनके परिवार तक पहुंची, उनके घर में कोहराम मच गया। सतीश के मासूम बच्चे और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि सतीश उनका इकलौता सहारा था, जो दिन-रात मेहनत करके दो वक्त की रोटी का इंतजाम करता था। पीड़ित परिवार ने पुलिस और योगी सरकार से गुहार लगाई है कि इस रसूखदार हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और पीड़ित परिवार को न्याय के साथ-साथ उचित मुआवजा भी मुहैया कराया जाए।
इस खौफनाक वारदात ने सीतापुर के पूरे मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ में भी एक गहरी दहशत और भारी आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। शहर के सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और लैब में काम करने वाले कर्मचारियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि अगर वे लोग जो दिन-रात जागकर लोगों की जान बचाते हैं, वे अपने ही कार्यस्थल (Workplace) पर सुरक्षित नहीं हैं, तो वे काम कैसे करेंगे? कर्मचारियों ने मांग की है कि चिकित्सा प्रतिष्ठानों में हथियारों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए और ऐसे रसूखदार प्रबंधकों के खिलाफ ‘बुलडोजर’ जैसी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सीतापुर पुलिस ने पूरे मामले की निष्पक्ष और तेज जांच का भरोसा दिलाया है। अब देखना यह है कि यह ‘खूनी ब्लड बैंक’ का हत्यारा कब तक कानून के शिकंजे में अपने गुनाहों की सजा काटता है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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