मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 के तहत 187 वाहनों के चालान, 49 का संचालन बंद; 52 वाहन अनफिट मिले, स्कूल संचालकों को कमियां दूर करने की अंतिम मोहलत
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 30 अगस्त 2026, 06:40:00 AM IST

tajnews.in | आगरा: स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने अनफिट और निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित हो रहे वाहनों पर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने स्कूल संचालकों को 31 अगस्त तक वाहनों में मिली कमियां दूर कराने की अंतिम मोहलत दी है। इसके बाद कोई अनफिट या सुरक्षा मानकों के विपरीत स्कूली वाहन सड़क पर संचालित मिला तो संबंधित संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार, कार्रवाई में प्राथमिकी दर्ज कराने तक की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
परिवहन विभाग ने मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 के तहत 11 से 25 अगस्त तक विशेष अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की फिटनेस, दस्तावेजों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की।
अभियान के दौरान 187 वाहनों के चालान किए गए, जबकि 49 वाहनों का संचालन बंद कराया गया। जांच में 52 वाहन अनफिट पाए गए। इन वाहनों के संचालकों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा के भीतर कमियां दूर कराने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूलों में पहुंचकर किया जा रहा वाहनों का भौतिक सत्यापन
एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार के अनुसार, परिवहन विभाग की टीमें स्कूलों में पहुंचकर वाहनों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं।
जिन वाहनों के बारे में स्कूल प्रबंधन की ओर से बताया जा रहा है कि वे फिलहाल संचालित नहीं हो रहे हैं या खड़े हैं, उनके संबंध में स्कूल संचालकों को प्रधानाचार्य के लेटरहेड पर जानकारी देनी होगी। इसके साथ वाहन की वर्तमान गूगल लोकेशन और फोटो भी उपलब्ध करानी होगी।
स्कूल प्रबंधन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित वाहन कब से खड़ा है। यदि वाहन खराब या अनफिट है तो उसे सुरक्षा और फिटनेस मानकों के अनुरूप कब तक दुरुस्त कराया जाएगा, इसकी जानकारी भी विभाग को देनी होगी।
केवल फिटनेस प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं
स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की जांच केवल फिटनेस प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं है। परिवहन विभाग वाहन के पंजीकरण, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र के साथ उसकी वास्तविक तकनीकी स्थिति और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी जांच कर रहा है।
स्कूली वाहनों के लिए प्रमुख सुरक्षा आवश्यकताओं में शामिल हैं—
- वाहन का वैध फिटनेस प्रमाणपत्र।
- पंजीकरण, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र का वैध होना।
- चालक के पास निर्धारित श्रेणी का वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना।
- बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों के अनुसार चालक और वाहन का संचालन।
- वाहन में निर्धारित मानकों के अनुसार अग्निशमन यंत्र उपलब्ध होना।
- आवश्यकता के अनुसार अटेंडेंट या परिचालक की व्यवस्था।
- आपातकालीन निकास का सुरक्षित और कार्यशील होना।
- बैठने की निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को वाहन में न बैठाना।
- लागू नियमों के अनुसार GPS/VLTD, CCTV और अन्य तकनीकी सुरक्षा व्यवस्थाएं।
- ब्रेक, टायर, लाइट, दरवाजे और अन्य तकनीकी सुरक्षा उपकरणों का सही स्थिति में होना।
31 अगस्त के बाद नहीं मिलेगी राहत
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनफिट वाहनों और सुरक्षा मानकों में कमियां पाए जाने वाले वाहनों को दुरुस्त कराने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है।
इसके बाद भी यदि कोई अनफिट वाहन बच्चों को लेकर सड़क पर संचालित मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ परिस्थितियों के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कराने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
कागजों में बंद दिखाकर सड़क पर चलाने वालों पर भी नजर
परिवहन विभाग की कार्रवाई अब केवल दस्तावेजों की जांच तक सीमित नहीं रखी जा रही है। स्कूलों की ओर से जो वाहन बंद या खड़े बताए जा रहे हैं, उनका भी भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कागजों में बंद दिखाया गया कोई अनफिट वाहन चोरी-छिपे बच्चों को लेकर सड़क पर संचालित न हो।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में अब 31 अगस्त की समयसीमा महत्वपूर्ण है। इसके बाद परिवहन विभाग की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि अनफिट वाहनों को वास्तव में दुरुस्त किया गया है या नहीं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कितनी सख्ती बरती जाती है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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