इमरजेंसी और मेडिसिन विभाग में उखड़ रहा प्लास्टर, सीलन ने बढ़ाई चिंता

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ऑडिट टीम ने दो भवनों का किया सर्वे, अभी छह अन्य भवनों का होना है निरीक्षण; रिपोर्ट के बाद तय होगी मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कार्रवाई

आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 30 अगस्त 2026, 05:34:15 AM IST

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tajnews.in | आगरा: एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और मेडिसिन विभाग सहित पुराने भवनों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। भवनों के कई हिस्सों में प्लास्टर उखड़ने और दीवारों व छतों में सीलन दिखाई देने के बाद उनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है। ऑडिट टीम ने अब तक दो भवनों का सर्वे पूरा कर लिया है, जबकि परिसर के छह अन्य भवनों का निरीक्षण अभी बाकी है।

HIGHLIGHTS
  1. एसएन मेडिकल कॉलेज परिसर के कुल 8 पुराने भवनों का कराया जा रहा स्ट्रक्चरल ऑडिट।
  2. इमरजेंसी वार्ड में 10 से 12 स्थानों पर उखड़ा मिला प्लास्टर, दीवारों में सीलन से बढ़ी चिंता।
  3. बाल रोग विभाग की छत से भी गिर रहा प्लास्टर, 40 से 70 साल पुरानी हैं कई इमारतें।
  4. ऑडिट टीम ने 2 भवनों का सर्वे किया पूरा, शेष 6 भवनों की रिपोर्ट के बाद होगी मरम्मत की कार्रवाई।

एसएन मेडिकल कॉलेज परिसर में कुल आठ भवनों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जा रहा है। जांच का उद्देश्य पुराने भवनों की मजबूती, उनकी वर्तमान संरचनात्मक स्थिति और आवश्यक मरम्मत का तकनीकी आकलन करना है।

इमरजेंसी वार्डों में 10 से 12 स्थानों पर उखड़ा मिला प्लास्टर

जानकारी के अनुसार, 21 अगस्त से इमरजेंसी में भर्ती वार्डों के निरीक्षण का काम शुरू किया गया था। सर्वे के दौरान टीम को करीब 10 से 12 स्थानों पर प्लास्टर खराब और उखड़ा हुआ मिला। कई हिस्सों में सीलन के निशान भी दिखाई दिए।

इसके बाद ऑडिट टीम ने परिसर के अन्य भवनों की जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि सभी चिन्हित भवनों का निरीक्षण पूरा होने के बाद उनकी संरचनात्मक स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

बताया गया कि जांच के दायरे में शामिल कुछ इमारतें करीब 40 वर्ष पुरानी हैं, जबकि कुछ भवनों की उम्र 70 वर्ष से अधिक बताई जा रही है। लंबे समय से लगातार उपयोग और पुराने निर्माण को देखते हुए इन भवनों की तकनीकी जांच आवश्यक मानी जा रही है।

बाल रोग विभाग की छत से भी उखड़ा प्लास्टर

ऑडिट के दौरान बाल रोग विभाग की इमारत में भी कई स्थानों पर स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। विभाग की छत से जगह-जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ पाया गया। दीवारों और छत के कुछ हिस्सों में सीलन के निशान भी दिखाई दिए हैं।

बड़े अस्पताल परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही रहती है। ऐसे में भवनों की स्थिति को लेकर मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है।

ऑडिट टीम अब यह आकलन करेगी कि प्लास्टर और सीलन की समस्या केवल सतही मरम्मत से जुड़ी है या भवनों के कुछ हिस्सों में व्यापक तकनीकी सुधार की आवश्यकता है।

दो भवनों का सर्वे पूरा, छह का निरीक्षण बाकी

एसएन मेडिकल कॉलेज परिसर में चिन्हित कुल आठ भवनों का ऑडिट कराया जाना है। अब तक दो भवनों का सर्वे पूरा किया जा चुका है, जबकि छह भवनों का निरीक्षण अभी बाकी है।

सभी भवनों की जांच पूरी होने के बाद ऑडिट टीम विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट के आधार पर भवनों की मजबूती, मरम्मत की आवश्यकता और आवश्यक सुरक्षा उपायों को लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जहां केवल प्लास्टर और सीलन की समस्या है, वहां आवश्यक मरम्मत कराई जा सकती है। वहीं, जिन हिस्सों में तकनीकी रूप से अधिक गंभीर स्थिति सामने आती है, वहां व्यापक मरम्मत या अन्य संरचनात्मक उपायों की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा।

ऑडिट रिपोर्ट पर टिकी नजर

एसएन मेडिकल कॉलेज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पुराने भवनों में उखड़ते प्लास्टर और सीलन की स्थिति के बाद चल रहा स्ट्रक्चरल ऑडिट महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सभी की नजर शेष छह भवनों के निरीक्षण और अंतिम ऑडिट रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भवनों की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति क्या है और मरीजों, तीमारदारों तथा कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए किन भवनों में कितनी और किस स्तर की कार्रवाई की आवश्यकता है।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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Chief Editor, Taj News


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