अखिलेश यादव ने हाई पावर कमेटी से जांच कराने की मांग की; सपा प्रत्याशी ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आंकड़े रखे
राजनीति डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 30 अगस्त 2026, 05:00:15 AM IST

tajnews.in | आगरा: आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में करीब 15 हजार फर्जी मतदाता शामिल किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए उच्च अधिकारियों की हाई पावर कमेटी गठित करने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर कथित गड़बड़ियां की गई हैं। इस दौरान आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. प्रकाश चंद्र गुप्ता ने भी मतदाता सूची से जुड़े कई आंकड़े और कथित अनियमितताओं के दावे सामने रखे।
एक स्कूल में 96 शिक्षकों को मतदाता बनाने का दावा
डॉ. प्रकाश चंद्र गुप्ता ने दावा किया कि मतदाता सूची में कुछ विद्यालयों से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में शिक्षकों को मतदाता बनाया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक विद्यालय से 96 शिक्षकों को मतदाता बनाए जाने का मामला सामने आया है।
सपा का आरोप है कि किसी एक सामान्य विद्यालय में इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति और उनकी पात्रता की जांच की जानी चाहिए। पार्टी ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई है।
51,552 मतदाता बनाए गए, प्रमाणित फॉर्मों की संख्या पर सवाल
समाजवादी पार्टी के अनुसार, आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अब तक कुल 51,552 मतदाता बनाए गए हैं।
पार्टी का दावा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की ओर से लिखित रूप में बताया गया कि 1,679 आवेदन फॉर्म प्रमाणित किए गए थे, जबकि मतदाता सूची में 7,800 मतदाता शामिल किए जाने का आंकड़ा सामने आया।
सपा ने इन आंकड़ों के अंतर को गंभीर बताते हुए इसकी विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
आरटीआई में 26 स्कूलों के अस्तित्व पर उठे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाजवादी पार्टी ने आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी का भी हवाला दिया। पार्टी का दावा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी में 26 ऐसे विद्यालयों का उल्लेख सामने आया, जिनके संबंध में संबंधित नामों के आधार पर रिकॉर्ड में स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं हो सका।
इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे करीब 100 विद्यालयों को चिन्हित करने का दावा किया, जिनके धरातल पर अस्तित्व को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि उनके नाम मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज होने का आरोप है।
सपा ने मांग की है कि ऐसे सभी विद्यालयों, वहां कार्यरत बताए गए शिक्षकों और मतदाता बनने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।
पांच से अधिक बार की गई शिकायत
समाजवादी पार्टी के लीगल एडवाइजर एके श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर पार्टी की ओर से पांच से अधिक बार भारत निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं।
पार्टी का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। सपा ने मांग की है कि मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन कराया जाए और यदि किसी स्तर पर फर्जी दस्तावेजों या गलत प्रमाणन के आधार पर नाम शामिल किए गए हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
डीआईओएस बोले—यह जानकारी मेरे कार्यकाल की नहीं
इस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक रविंद्र पाल तोमर ने कहा कि संबंधित जानकारी उनके कार्यकाल की नहीं है। उन्होंने बताया कि आरटीआई के तहत 26 स्कूलों के संबंध में जानकारी मांगी गई थी, लेकिन विद्यालयों के नाम शॉर्ट फॉर्म में लिखे गए थे।
उनके अनुसार, रिकॉर्ड की जांच कराई गई तो उन संक्षिप्त नामों के आधार पर संबंधित विद्यालयों का स्पष्ट विवरण नहीं मिल सका।
मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर सामने आए आरोपों ने मामले को राजनीतिक रूप से गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी जहां करीब 15 हजार फर्जी मतदाता बनाए जाने का आरोप लगाते हुए हाई पावर कमेटी से जांच की मांग कर रही है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और मतदाता सूची से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मतदाता सूची में शामिल प्रत्येक नाम, संबंधित विद्यालय और प्रमाणन प्रक्रिया का सत्यापन किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
फिलहाल सपा के आरोपों की स्वतंत्र जांच और निर्वाचन अधिकारियों की आगे की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मतदाता सूची में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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