एलआईयू रिपोर्ट और जनशिकायतों में अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम आने के बाद पुलिस ने शुरू की नए सिरे से जांच; ठेकेदारों के कथित सिंडिकेट और विकास कार्यों में अनियमितताओं की भी पड़ताल
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | शनिवार, 29 अगस्त 2026, 10:45:12 AM IST

tajnews.in | आगरा: नगर निगम के विकास कार्यों में कथित धांधली और अवैध वसूली के आरोपों की जांच में अब नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। एलआईयू की जांच रिपोर्ट और आधा दर्जन से अधिक शिकायतों में नगर निगम के मुख्य अभियंता समेत कुछ कर्मचारियों के नाम सामने आने के बाद पुलिस ने पूरे प्रकरण की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
आरोप है कि पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन की आड़ में वर्षों से नगर निगम के विकास कार्यों में कथित दखल दिया जा रहा था और ठेकेदारों का एक समूह टेंडर एवं विकास कार्यों को प्रभावित करता था। पुलिस अब इन आरोपों और एलआईयू रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों की जांच कर रही है।
एलआईयू रिपोर्ट में कथित सिंडिकेट का उल्लेख
रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम के विकास कार्यों में कथित तौर पर ठेकेदारों और अन्य लोगों के एक सिंडिकेट की भूमिका की शिकायतें सामने आई थीं। एलआईयू जांच में इन आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई।
जांच के दौरान नगर निगम के मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी से संबंधित कुछ आरोप भी सामने आए हैं। रिपोर्ट में उन पर चार फर्मों के संचालन से जुड़ा आरोप होने का उल्लेख किया गया है। पुलिस अब इन आरोपों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।
चार फर्मों का नाम भी जांच के दायरे में
मामले की जांच में मेहताब ट्रेडर्स, बजरंग ट्रेडर्स, सैय्यद ट्रेडर्स और एसएस इंटरप्राइजेज नाम की फर्मों का उल्लेख सामने आया है।
पुलिस इन फर्मों और नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच किसी संभावित संबंध तथा विकास कार्यों एवं ठेकों से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ और क्या नगर निगम के कार्यों या टेंडर प्रक्रिया को कथित तौर पर प्रभावित किया गया।
दिसंबर 2025 में एलआईयू को सौंपी गई थी जांच
पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के अनुसार, नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ विकास कार्यों के नाम पर कथित धांधली और अवैध वसूली की शिकायतों की जांच दिसंबर 2025 में एलआईयू को सौंपी गई थी।
जनवरी 2026 में एलआईयू की रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रकरण में कई तथ्य जांच के दायरे में आए। इसके बाद पुलिस स्तर पर मामले की आगे की जांच की जा रही है।
अनाधिकृत एसोसिएशन बनाए जाने की भी जांच
रिपोर्ट में नगर निगम से जुड़े एक कथित अनाधिकृत पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, एसोसिएशन की गतिविधियों और उसकी आड़ में ठेकेदारों तथा अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच की जा रही है।
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कथित सिंडिकेट के प्रभाव के कारण कुछ फर्मों को टेंडर मिलने और विकास कार्यों में अनियमितताएं होने की स्थिति पैदा हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच की जा रही है।
ठेकेदारों की फर्में ब्लैकलिस्ट, कई मुकदमे दर्ज
प्रकरण से जुड़े मामलों में नगर निगम के सात बड़े ठेकेदारों की फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद कई ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे।
बताया गया है कि स्वरूप नगर और फजलगंज थानों में दर्ज मामलों में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं, कथित सिंडिकेट का सरगना बताए जा रहे कमला नगर निवासी ठेकेदार गोविंद शर्मा की तलाश जारी है।
गोविंद शर्मा की तलाश में पुलिस की टीमें सक्रिय
पुलिस के अनुसार, फरार आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग स्थानों पर टीमें सक्रिय हैं। सूत्रों के हवाले से उसके संपर्क कानपुर, लखनऊ, दिल्ली और राजस्थान तक बताए गए हैं।
पुलिस संभावित ठिकानों पर तलाश और दबिश की कार्रवाई कर रही है। मामले से जुड़े एक वाहन को भी पुलिस ने कब्जे में लेकर आगरा लाने की कार्रवाई की है।
हालांकि, आरोपी की तलाश और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि जांच के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
एडीसीपी योगेश कुमार कर रहे जांच
पुलिस आयुक्त के अनुसार, एसोसिएशन, नगर निगम के मुख्य अभियंता और अन्य कर्मचारियों समेत जिन लोगों के संबंध में शिकायतें और आरोप सामने आए हैं, उनकी जांच स्टाफ ऑफिसर एवं एडीसीपी योगेश कुमार कर रहे हैं।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसमें सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम के विकास कार्यों और कथित ठेकेदार सिंडिकेट से जुड़े इस मामले की जांच तेज होने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि, मुख्य अभियंता, कर्मचारियों और अन्य लोगों पर लगे आरोपों की अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और सक्षम अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्य अभियंता, कर्मचारियों, फर्मों और अन्य व्यक्तियों से जुड़े आरोप जांच और शिकायतों के आधार पर हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों की जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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