एस्सेल समूह के चेयरमैन ने टीवी18 और रिलायंस समूह पर लगाया कथित अभियान चलाने का आरोप; कंपनी बोली—किसी व्यक्ति या कारोबार को निशाना बनाने का सवाल नहीं
बिजनेस डेस्क, 🌐 tajnews.in | शनिवार, 29 अगस्त 2026, 06:46:04 AM IST

tajnews.in | नई दिल्ली: एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्र ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके प्रमुख मुकेश अंबानी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुभाष चंद्र का दावा है कि उनके समूह की वित्तीय स्थिति और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) से जुड़े कथित 22,000 करोड़ रुपये के लोन सेटलमेंट के मामले को लेकर उनके खिलाफ गलत धारणा बनाने का प्रयास किया गया।
वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि रिलायंस समूह और उससे जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ अभियान नहीं चलाते हैं और न ही ऐसा करना उनकी नीति का हिस्सा है।
2019 में ज़ी को खरीदने के प्रस्ताव का दावा
सुभाष चंद्र ने अपने बयान में दावा किया कि वर्ष 2019 में वह ज़ी से जुड़े संभावित सौदे के सिलसिले में मुकेश अंबानी से मिले थे। उनके अनुसार, उस समय कंपनी की वित्तीय स्थिति और कर्ज को लेकर बातचीत हुई थी।
सुभाष चंद्र का दावा है कि उनसे कथित तौर पर यह कहा गया कि बैंक के ब्याज और अन्य वित्तीय दायित्वों को चुकाने की क्षमता किसी दूसरे संभावित खरीदार की तुलना में अलग तरीके से देखी जा रही थी।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
45 हजार करोड़ के कर्ज में से 43 हजार करोड़ चुकाने का दावा
सुभाष चंद्र ने अपने बयान में एस्सेल समूह की वित्तीय स्थिति का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि समूह पर एक समय करीब 45 हजार करोड़ रुपये का कॉरपोरेट कर्ज था, जिसमें से लगभग 43 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2019 में वित्तीय संकट की खबरों के बाद ज़ी के शेयरों में तेज गिरावट आई थी। उनके अनुसार, जनवरी 2019 में एक दिन के भीतर कंपनी के शेयरों में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
सुभाष चंद्र ने दावा किया कि इसके बाद उन्होंने संभावित खरीद को लेकर बातचीत की और कहा कि यदि कंपनी को खरीदने का इरादा है तो उससे जुड़े कर्ज और वित्तीय दायित्वों पर भी विचार करना होगा।
22,000 करोड़ रुपये के मुद्दे पर गलत धारणा बनाने का आरोप
सुभाष चंद्र ने कहा कि 22,000 करोड़ रुपये से जुड़े वित्तीय मुद्दे को लेकर उनके बारे में गलत धारणा बनाई गई। उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि इस मामले के संबंध में पूरी तस्वीर और तथ्यों को समझना जरूरी है।
उनका कहना है कि उनके खिलाफ प्रस्तुत किए गए कथित वित्तीय दावों और वास्तविक परिस्थितियों के बीच अंतर को समझे बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
हालांकि, 22,000 करोड़ रुपये से जुड़े इस विवाद के सभी वित्तीय और कानूनी पहलुओं पर स्वतंत्र आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष इस रिपोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
रिलायंस ने आरोपों को बताया गलत
सुभाष चंद्र के आरोपों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि कंपनी और समूह किसी व्यक्ति या कारोबार को निशाना बनाने के उद्देश्य से कोई अभियान नहीं चलाते हैं।
कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, रिलायंस समूह किसी को नुकसान पहुंचाने या किसी व्यक्ति को किसी मामले में फंसाने की कोशिश नहीं करता। कंपनी ने सुभाष चंद्र की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत बताया।
हर्ष गोयनका की सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र
इस पूरे विवाद के बीच उद्योगपति हर्ष गोयनका की एक सोशल मीडिया पोस्ट का भी उल्लेख सामने आया है। पोस्ट में सुभाष चंद्र और उनके कारोबारी मामलों को लेकर कुछ सवालों और चर्चाओं का जिक्र किया गया।
हालांकि, सोशल मीडिया पर उठाए गए सवालों या दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। उनसे जुड़े किसी भी आरोप या दावे पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
सुभाष चंद्र ने वीडियो जारी कर दिया स्पष्टीकरण
शुक्रवार को सुभाष चंद्र की ओर से एक स्पष्टीकरण वीडियो भी जारी किया गया, जिसमें उन्होंने अपने पक्ष और 22,000 करोड़ रुपये से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले को समझने के लिए सभी तथ्यों को सामने रखना आवश्यक है। उनका दावा है कि वित्तीय मुद्दे को लेकर ऐसी धारणा बनाई गई, जो उनके अनुसार वास्तविक स्थिति को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती।
फिलहाल यह मामला सुभाष चंद्र की ओर से लगाए गए आरोपों और रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से दिए गए स्पष्ट खंडन के बीच बना हुआ है। ऐसे में विवाद से जुड़े वित्तीय दावों, संभावित कारोबारी बातचीत और आरोपों के संबंध में किसी भी निष्कर्ष को संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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