अस्पताल ने पुरानी बीमारी और गंभीर निमोनिया को बताया मौत का कारण, प्लास्टर गिरने की घटना से किसी संबंध से किया इनकार; परिजनों की ओर से उठे सवालों के बीच मेडिकल रिकॉर्ड और जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण
Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 22 August, 2026, 8:56:58 PM IST.

tajnews.in | आगरा: सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी), आगरा में 10 वर्षीय बच्चे उमैर की मौत के बाद प्लास्टर गिरने की घटना से उसके संबंध को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया है कि उमैर की मृत्यु लंबे समय से चली आ रही बीमारी और गंभीर निमोनिया के कारण हुई तथा 21 अगस्त को बाल रोग वार्ड में छत का प्लास्टर गिरने की घटना का उसकी मौत से कोई संबंध नहीं था। दूसरी ओर, पूरे घटनाक्रम को लेकर यह सवाल सामने आया है कि प्लास्टर गिरने के समय उमैर की चिकित्सकीय स्थिति क्या थी, क्या उसे उस घटना में कोई चोट आई थी और मृत्यु से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड में क्या कारण दर्ज किया गया है।
उपलब्ध अस्पताल के आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, नसीराबाद कॉलोनी, आगरा निवासी 10 वर्षीय उमैर को करीब पांच महीने की उम्र से दौरे की शिकायत थी। लगभग 11 महीने की उम्र में एम्स, नई दिल्ली में उसे West Syndrome का निदान किया गया था। अस्पताल के अनुसार बच्चा लंबे समय से developmental delay से भी प्रभावित था।

एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) आगरा द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट
19 अगस्त की रात गंभीर हालत में भर्ती हुआ था उमैर
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, उमैर को 19 अगस्त 2026 की रात 9:37 बजे चार दिन से बुखार और लगातार बढ़ती सांस की तकलीफ के साथ इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार भर्ती के समय बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और उसके शरीर में खून की भी कमी थी। चिकित्सकों ने आवश्यक रक्त जांच, चेस्ट एक्स-रे और सीटी स्कैन सहित विभिन्न जांचें कराईं। इसके बाद बच्चे को हाई-फ्लो ऑक्सीजन पर रखा गया और ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया गया।
प्रेस नोट के अनुसार संक्रमण और मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने के लिए उसे एंटीबायोटिक और अन्य आवश्यक दवाएं दी जा रही थीं। अस्पताल का कहना है कि उपचार के बावजूद उसकी हालत बिगड़ती गई और उसे गंभीर निमोनिया हो गया।
21 अगस्त की शाम वेंटिलेटर पर लिया गया
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक उपचार के बावजूद उमैर की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। गंभीर निमोनिया और दौरों के कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
प्रेस नोट के अनुसार 21 अगस्त 2026 की शाम करीब सात बजे बच्चे को वेंटिलेटर पर लिया गया और आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं दी गईं। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसकी हालत गंभीर बनी रही।
इसके बाद 22 अगस्त की सुबह करीब छह बजे उमैर की मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने मृत्यु का मुख्य कारण लंबे समय से चली आ रही बीमारी और गंभीर निमोनिया बताया है।
प्लास्टर गिरने की घटना से मौत का संबंध अस्पताल ने नकारा
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल 21 अगस्त को एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाल रोग वार्ड में छत का प्लास्टर गिरने की घटना को लेकर है।
घटना के संबंध में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार बाल रोग वार्ड में छत का प्लास्टर गिरा था और एक बच्चे के घायल होने की बात कही गई थी। घटना के बाद वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
इसके बाद सोशल मीडिया पर उमैर की मौत को प्लास्टर गिरने की घटना से जोड़कर दावे किए गए।
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने अपने आधिकारिक प्रेस नोट में इन दावों को तथ्यहीन, असत्य और निराधार बताते हुए कहा कि 21 अगस्त को हुई प्लास्टर गिरने की घटना का उमैर की मृत्यु से कोई संबंध नहीं था।
इस प्रकार फिलहाल दो बातें अलग-अलग सामने आती हैं—एक ओर अस्पताल का स्पष्ट पक्ष है कि उमैर की मृत्यु उसकी पुरानी बीमारी और गंभीर निमोनिया के कारण हुई, जबकि दूसरी ओर प्लास्टर गिरने की घटना को लेकर अलग सवाल उठाए जा रहे हैं। इन दोनों पहलुओं के बीच वास्तविक चिकित्सकीय संबंध का निष्कर्ष उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
पोस्टमार्टम नहीं होने से मृत्यु के कारण की स्वतंत्र पुष्टि का सवाल
अस्पताल के प्रेस नोट के अनुसार चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद बच्चे की मृत्यु हो गई। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने परिजनों से पोस्टमार्टम कराने का आग्रह किया था, लेकिन परिजनों ने लिखित रूप में पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पोस्टमार्टम न होने की स्थिति में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि मृत्यु के कारण की पुष्टि किन चिकित्सकीय दस्तावेजों और जांचों के आधार पर की गई तथा पुलिस स्तर पर मामले को किस प्रकार दर्ज और देखा गया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 ऐसी परिस्थितियों में पुलिस द्वारा मृत्यु की जांच और रिपोर्ट तैयार करने से संबंधित है। इसके प्रावधानों में दुर्घटना, मशीनरी से हुई मृत्यु या ऐसी परिस्थितियां जिनमें अपराध की आशंका हो, शामिल हैं। इसी धारा की उपधारा (3) में मृत्यु के कारण को लेकर संदेह होने पर शव को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजने का प्रावधान भी है।
वहीं BNSS की धारा 196 मजिस्ट्रेट द्वारा मृत्यु के कारण की जांच से संबंधित है। परिस्थितियों के अनुसार मजिस्ट्रेट पुलिस जांच के अतिरिक्त मृत्यु के कारण की जांच कर सकता है और कानून में पहले से दफन शव को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए निकलवाने का प्रावधान भी मौजूद है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि इस मामले में पोस्टमार्टम अनिवार्य रूप से होना ही चाहिए था। यह परिस्थितियों और संबंधित जांच अधिकारियों के आकलन पर निर्भर करता है। इसलिए इस मामले में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने मृत्यु को किस रूप में दर्ज किया और क्या कोई मेडिको-लीगल जांच की गई।
क्या प्लास्टर गिरने और उमैर की मौत के बीच कोई संबंध था?
उपलब्ध अस्पताल के आधिकारिक पक्ष के आधार पर ऐसा कोई चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि उमैर की मृत्यु प्लास्टर गिरने से लगी चोटों के कारण हुई। अस्पताल ने स्पष्ट रूप से उसकी पुरानी बीमारी और गंभीर निमोनिया को मृत्यु का कारण बताया है।
दूसरी ओर, यदि प्लास्टर गिरने की घटना के दौरान उमैर उसी वार्ड में मौजूद था, तो घटना के समय उसकी चिकित्सकीय स्थिति, किसी संभावित चोट की मेडिकल एंट्री और उसके बाद के उपचार संबंधी रिकॉर्ड इस सवाल को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसलिए इस स्तर पर प्लास्टर गिरने की घटना को उमैर की मौत का कारण बताना भी उचित नहीं होगा और बिना स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच के दोनों घटनाओं के बीच किसी भी संभावित संबंध को पूरी तरह खारिज करना भी पाठकों के सामने उपलब्ध सभी दस्तावेजों के बिना अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
उमैर की पुरानी बीमारी का इतिहास भी अस्पताल ने बताया
अस्पताल प्रशासन ने उमैर के स्वास्थ्य का विस्तृत इतिहास भी अपने प्रेस नोट में रखा है। इसके अनुसार बच्चे को पांच महीने की उम्र से दौरे की समस्या थी और लगभग 11 महीने की उम्र में एम्स, नई दिल्ली में West Syndrome का निदान किया गया था। वह लंबे समय से developmental delay से भी प्रभावित था।
19 अगस्त को भर्ती किए जाने के समय उसे चार दिन से बुखार और बढ़ती सांस की तकलीफ थी। अस्पताल के अनुसार उसकी हालत पहले से गंभीर थी और इलाज के दौरान उसे हाई-फ्लो ऑक्सीजन, रक्त चढ़ाने तथा संक्रमण और दौरों को नियंत्रित करने के लिए दवाएं दी जा रही थीं। बाद में गंभीर निमोनिया के कारण उसे वेंटिलेटर पर लिया गया।
प्लास्टर गिरने की घटना ने अस्पताल भवन की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए
उमैर की मौत का कारण अस्पताल प्रशासन ने प्लास्टर गिरने की घटना से अलग बताया है। इसके बावजूद बाल रोग वार्ड में छत का प्लास्टर गिरना अपने आप में अस्पताल की भवन सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यदि किसी ऐसे वार्ड में, जहां गंभीर हालत में बच्चे भर्ती हों, छत का प्लास्टर गिरता है तो यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि भवन की नियमित सुरक्षा जांच कब हुई थी और घटना के बाद संबंधित हिस्से की तकनीकी जांच किस स्तर पर कराई गई।
घटना के बाद वार्ड में भर्ती बच्चों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किए जाने और प्रभावित हिस्से में मरम्मत कार्य की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में भवन सुरक्षा संबंधी जांच की रिपोर्ट भी पूरे प्रकरण को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी हैं?
उमैर की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष स्पष्ट है कि मृत्यु पुरानी बीमारी और गंभीर निमोनिया के कारण हुई तथा प्लास्टर गिरने की घटना से उसका कोई संबंध नहीं था।
लेकिन पूरे प्रकरण में पारदर्शिता के लिए कुछ सवालों का तथ्यात्मक उत्तर सामने आना महत्वपूर्ण होगा—
- 21 अगस्त की प्लास्टर गिरने की घटना के समय उमैर की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति क्या थी?
- क्या उसके मेडिकल रिकॉर्ड में उस घटना से संबंधित कोई चोट दर्ज की गई थी?
- प्लास्टर गिरने की घटना के बाद उमैर के उपचार में कोई बदलाव दर्ज किया गया था?
- 21 अगस्त की शाम वेंटिलेटर पर लिए जाने के संबंध में मेडिकल रिकॉर्ड में क्या कारण दर्ज है?
- मृत्यु प्रमाण और अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड में मृत्यु का कारण किस रूप में दर्ज किया गया?
- पोस्टमार्टम से इनकार करने वाला परिजनों का लिखित दस्तावेज किस स्तर पर लिया गया?
- पुलिस ने मृत्यु को किस श्रेणी में दर्ज किया और क्या किसी प्रकार की मेडिको-लीगल जांच की गई?
- अस्पताल भवन में प्लास्टर गिरने की घटना के बाद भवन की सुरक्षा जांच किस स्तर पर कराई गई?
इन सवालों के दस्तावेजी और चिकित्सकीय उत्तर सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
एसएन मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान में भर्ती 10 वर्षीय बच्चे की मौत गंभीर और संवेदनशील मामला है। अस्पताल प्रशासन ने अपनी ओर से विस्तृत प्रेस नोट जारी कर उमैर की पुरानी बीमारी और गंभीर निमोनिया को मृत्यु का कारण बताया है तथा प्लास्टर गिरने की घटना से किसी भी संबंध से इनकार किया है।
दूसरी ओर, बाल रोग वार्ड में प्लास्टर गिरने की घटना ने अस्पताल की भवन सुरक्षा और रखरखाव को लेकर अलग सवाल खड़े किए हैं। इन दोनों घटनाओं को आपस में जोड़ने या पूरी तरह अलग मानने से पहले उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज, पुलिस की जांच और भवन सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट को देखना जरूरी होगा।
ऐसे संवेदनशील मामले में सोशल मीडिया के दावों या आरोप-प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेजी और चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकालना ही उचित होगा। खासकर जब पोस्टमार्टम नहीं हुआ हो, तब मृत्यु से जुड़े उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता का महत्व और बढ़ जाता है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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